बिहार की राजनीति में बहुप्रतीक्षित बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव ने सोमवार को नया मोड़ ले लिया। जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने हजारों समर्थकों के साथ शक्ति प्रदर्शन करते हुए बांकीपुर विधानसभा सीट के लिए अपना नामांकन पत्र दाखिल किया। नामांकन से पहले निकली विशाल पदयात्रा ने राजधानी पटना की सड़कों पर चुनावी माहौल को पूरी तरह गर्म कर दिया।
स्काउट एवं गाइड मैदान से शुरू हुई पदयात्रा कोतवाली थाना, डाकबंगला चौराहा, एसपी वर्मा रोड, जेपी गोलंबर और गांधी मैदान होते हुए कलेक्ट्रेट पहुंची। पूरे रास्ते जन सुराज के कार्यकर्ताओं और समर्थकों का उत्साह देखने लायक था। “लड़ेंगे बांकीपुर, जीतेंगे बांकीपुर” और “बदलाव का संकल्प” जैसे नारों से पूरा मार्ग गूंजता रहा।
‘यह सिर्फ मेरा नहीं, बिहार के भविष्य का नामांकन’
नामांकन दाखिल करने के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए प्रशांत किशोर ने चुनाव को केवल एक विधानसभा सीट तक सीमित नहीं बताया। उन्होंने कहा कि यह बिहार की राजनीति में बदलाव की शुरुआत है।
उन्होंने कहा,
“यह मेरा नामांकन नहीं है। यह बिहार में बदलती हुई तस्वीर का नामांकन है, बिहार के बेहतर भविष्य का नामांकन है और बिहार में अपराधी लोगों को कुर्सी छोड़ने का आह्वान है। यह बदलाव की शुरुआत है।”
‘बांकीपुर किसी नेता का नहीं, जनता का गढ़’
प्रशांत किशोर ने कहा कि बांकीपुर को किसी एक राजनीतिक दल या नेता का गढ़ मानना उचित नहीं है।
उन्होंने कहा,
“बांकीपुर किसी पार्टी या नेता का गढ़ नहीं है, बल्कि जनता का गढ़ है। जनता तय करेगी कि यह किसका गढ़ होगा।”
उन्होंने दावा किया कि यह उपचुनाव केवल विधायक चुनने का चुनाव नहीं, बल्कि बिहार के नेतृत्व और राजनीतिक जवाबदेही का भी चुनाव है।

बीजेपी पर साधा निशाना
प्रशांत किशोर ने अपने संबोधन में भारतीय जनता पार्टी पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि यह चुनाव बिहार में “बीजेपी के अहंकार पर अंकुश लगाने” और जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों को जवाबदेह बनाने का अवसर है।
उन्होंने कहा,
“यह उपचुनाव विधायक चुनने का चुनाव नहीं है। यह बिहार में नेतृत्व बदलने का चुनाव है। यह बिहार में बीजेपी के अहंकार को अंकुश लगाने का चुनाव है और चुने हुए प्रतिनिधियों को जनता के प्रति जवाबदेह बनाने का चुनाव है।”
बांकीपुर उपचुनाव पर बढ़ी राजनीतिक सरगर्मी
प्रशांत किशोर के नामांकन के साथ ही बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव का राजनीतिक तापमान और बढ़ गया है। आने वाले दिनों में विभिन्न दलों के चुनाव प्रचार और जनसभाओं के साथ मुकाबला और दिलचस्प होने की संभावना है। राजनीतिक विश्लेषकों की नजर अब इस बात पर टिकी है कि यह चुनाव स्थानीय मुद्दों तक सीमित रहेगा या राज्य की व्यापक राजनीति का केंद्र बनेगा।
