नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने चारा घोटाला से जुड़े देवघर के मामले में लालू प्रसाद यादव की जमानत रद्द करने की सीबीआई की मांग को खारिज कर दिया है। जस्टिस एमएम सुंदरेश की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि हाईकोर्ट के जमानत के आदेश में हस्तक्षेप की कोई वजह नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट में अपील 2018 में की गयी है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वे हाईकोर्ट से अपील का निपटारा जल्द करने का आग्रह करेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट से अपील का निपटारा छह महीने में करने का आदेश दिया। दरअसल सीबीआई ने 2018 में लालू यादव को मिली सजा को बढ़ाने के लिए झारखंड हाईकोर्ट में अपील दाखिल किया था।
इस मामले में सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि इस मामले के आरोपी साठ वर्ष से ऊपर के हैं। सुनवाई के दौरान सीबीआई की ओर से पेश एएसजी एसवी राजू ने कहा था कि हाईकोर्ट ने लालू प्रसाद यादव की सजा को निलंबित कर कानून का गलत इस्तेमाल किया है। ये आदेश गैरकानूनी है। सुनवाई के दौरान लालू प्रसाद यादव की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा था कि इस मामले में कई आरोपी हैं और कुछ ने अभी तक सीबीआई की याचिका का जवाब नहीं दिया है। कुछ को तो कोर्ट का समन भी नहीं मिला है। तब कोर्ट ने कहा था कि हम जानते हैं कि ये याचिका क्या है। हम ये समझते हैं कि सीबीआई और लालू प्रसाद यादव के वकील इसका परिणाम जानते हैं। आप अपना काम कीजिए और हम अपना काम कर रहे हैं।

लालू प्रसाद यादव ने अपने जवाब में सीबीआई की याचिका का विरोध करते हुए कहा था कि केवल इस आधार पर कि सीबीआई इस फैसले से असंतुष्ट है हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती नहीं दी जा सकती है।
सीबीआई ने लालू को झारखंड के देवघर कोषागार के चारा घोटाला मामले में झारखंड हाईकोर्ट से मिली जमानत को चुनौती दी है। ट्रायल कोर्ट ने 2017 में इस मामले में लालू यादव को पांच साल की सजा सुनाई थी। हाईकोर्ट ने 2019 में लालू यादव के खराब स्वास्थ्य को देखते हुए जमानत दी थी। हाईकोर्ट को आदेश को सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। लालू कुल चार मुकदमों में सजायाफ्ता हैं।
लालू यादव की ओर से क्या दलील दी गई?
लालू प्रसाद यादव की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने अदालत को बताया कि इस मामले में कई अन्य आरोपी भी हैं, जिनमें से कुछ ने अभी तक CBI की अपील का जवाब नहीं दिया है और कुछ को अदालत का समन भी प्राप्त नहीं हुआ है। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की कि वह मामले की प्रकृति से पूरी तरह अवगत है और सभी पक्ष अपनी-अपनी कानूनी प्रक्रिया जारी रखें।
अपने लिखित जवाब में लालू प्रसाद यादव ने CBI की याचिका का विरोध करते हुए कहा था कि केवल किसी पक्ष के फैसले से असंतुष्ट होने के आधार पर हाईकोर्ट के जमानत आदेश को चुनौती नहीं दी जा सकती।
क्या है पूरा मामला?
देवघर कोषागार से जुड़े चारा घोटाला मामले में विशेष CBI अदालत ने वर्ष 2017 में लालू प्रसाद यादव को पांच वर्ष की सजा सुनाई थी। बाद में 2019 में झारखंड हाईकोर्ट ने उनके खराब स्वास्थ्य को देखते हुए उन्हें जमानत दे दी थी। CBI ने इसी जमानत आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। गौरतलब है कि लालू प्रसाद यादव चारा घोटाले के चार अलग-अलग मामलों में दोषसिद्ध हो चुके हैं।

अब सुप्रीम कोर्ट द्वारा CBI की याचिका खारिज किए जाने के बाद लालू प्रसाद यादव की जमानत बरकरार रहेगी, जबकि उनकी सजा बढ़ाने से संबंधित लंबित अपील पर झारखंड हाईकोर्ट को छह महीने के भीतर फैसला करना होगा।
