दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली दंगा मामले में आरोपी उमर खालिद की जमानत याचिका पर दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया है। अदालत ने इस याचिका को सह-आरोपी शरजील इमाम की जमानत याचिका के साथ टैग करते हुए 27 अगस्त को अगली सुनवाई तय की है। इससे पहले ट्रायल कोर्ट दोनों की नई जमानत याचिकाएं खारिज कर चुकी थी। मामला यूएपीए के तहत दर्ज है और इसमें कई अन्य आरोपियों के खिलाफ भी आरोपपत्र दाखिल किया जा चुका है।
Author: Sanjay Kumar
जंतर-मंतर प्रदर्शन में कथित पैलेट गन इस्तेमाल के मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार को घायलों के इलाज और RAF के रिकॉर्ड सुरक्षित रखने का निर्देश दिया है। कांग्रेस ने छात्रों पर अत्यधिक बल प्रयोग का आरोप लगाया है, जबकि भाजपा ने इन आरोपों से इनकार किया है। इसी बीच बिहार के सिवान में AK-47 से हवाई फायरिंग के मामले ने भी बहस को नया मोड़ दे दिया है। पढ़िए पूरी विशेष रिपोर्ट।
दिल्ली हाईकोर्ट ने क्रिकेटर युवराज सिंह के व्यक्तित्व अधिकारों की रक्षा करते हुए उनके नाम और पहचान का कथित अनधिकृत व्यावसायिक इस्तेमाल करने वाले आपत्तिजनक ऑनलाइन कंटेंट को हटाने का अंतरिम आदेश दिया है। अदालत ने प्रतिवादियों को नोटिस जारी करते हुए कहा कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म स्वयं कंटेंट नहीं हटा सकते, बल्कि ऐसे मामलों में न्यायिक आदेश आवश्यक होता है। युवराज सिंह की ओर से अदालत को बताया गया कि कुछ लिंक हटाए जा चुके हैं, जबकि कई अन्य अब भी सक्रिय हैं।
दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट ने JNU छात्र संघ की पूर्व अध्यक्ष और SFI की संयुक्त सचिव आइशी घोष के खिलाफ 2021 के प्रदर्शन मामले में जारी गैर-जमानती वारंट रद्द कर दिया। अदालत ने उन्हें ₹1,000 का जुर्माना लगाया और भविष्य में हर सुनवाई में उपस्थित रहने की चेतावनी दी। यह मामला बंग भवन प्रदर्शन से जुड़ी एफआईआर का है, जिसमें IPC की धारा 188 और 447 के तहत मामला दर्ज किया गया था।
दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट में कथित हंगामे और अभद्र व्यवहार के मामले में गिरफ्तार दो लॉ छात्रों प्रबल प्रताप सिंह और चंद्रभान को ₹25-25 हजार के निजी मुचलके पर जमानत दे दी। अदालत ने दोनों को जांच में सहयोग करने, ट्रायल के दौरान हर तारीख पर उपस्थित रहने और गवाहों या साक्ष्यों को प्रभावित नहीं करने का निर्देश दिया है। यह मामला 10 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में हुई घटना से जुड़ा है।
सुप्रीम कोर्ट ने डिजिटल अरेस्ट के बढ़ते मामलों पर चिंता जताते हुए केंद्र सरकार से इसे आपराधिक कानूनों में अलग अपराध घोषित करने और कड़े दंड का प्रावधान करने की सिफारिश की है। अदालत ने कहा कि पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर आरोपियों की संपत्ति जब्त करने पर भी विचार होना चाहिए। सुनवाई के दौरान डीपफेक और साइबर ठगी की बढ़ती घटनाओं पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की गई।
जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों की Facial Recognition और बायोमेट्रिक निगरानी को चुनौती देते हुए सीपीएम सांसद एए रहीम ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। याचिका में कहा गया है कि संसद के कानून के बिना ऐसी निगरानी असंवैधानिक है और इससे नागरिकों की निजता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन होता है। दिल्ली पुलिस की निगरानी व्यवस्था और राष्ट्रीय आपराधिक डाटाबेस से लिंक करने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए गए हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगाते हुए छह राज्यों के मुख्य सचिवों को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने नाबालिग प्रदर्शनकारियों को तुरंत रिहा करने, प्रदर्शन से जुड़े CCTV फुटेज, ड्रोन रिकॉर्डिंग, बॉडी कैमरा और डिजिटल डेटा सुरक्षित रखने के निर्देश दिए। साथ ही प्रदर्शनकारियों की निजी जानकारी सार्वजनिक नहीं करने और छात्रों के खिलाफ निरोधात्मक कार्रवाई से बचने को कहा। अदालत ने पुलिस बल प्रयोग पर चिंता जताते हुए निष्पक्ष जांच की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
दिल्ली के कड़कड़डूमा कोर्ट ने 2020 दिल्ली दंगों के दौरान आईबी अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या मामले में दोषी करार दिए गए ताहिर हुसैन समेत पांच आरोपियों की सजा पर फैसला सुरक्षित रख लिया है। दिल्ली पुलिस ने अदालत से सभी दोषियों को फांसी की सजा देने की मांग की है। अदालत अब 31 जुलाई को सजा का ऐलान करेगी। इस मामले में छह अन्य आरोपियों को बरी कर दिया गया है। यह मामला 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े सबसे चर्चित मामलों में शामिल है।
जंतर-मंतर छात्र प्रदर्शन मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हर नागरिक को शांतिपूर्ण और कानून के दायरे में रहकर प्रदर्शन करने का संवैधानिक अधिकार है। कोर्ट ने पुलिस द्वारा कथित बल प्रयोग की निष्पक्ष जांच और पूरे देश के लिए प्रदर्शन प्रबंधन की समान गाइडलाइन बनाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।