नई दिल्ली। छात्रों के विरोध प्रदर्शनों के बीच शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट परिसर में संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों के समर्थन का एक अहम दृश्य देखने को मिला। सुप्रीम कोर्ट के लॉन में बड़ी संख्या में वरिष्ठ और युवा वकीलों ने एक साथ भारत के संविधान की प्रस्तावना का सामूहिक पाठ किया। इस कार्यक्रम को संविधान की भावना, नागरिक अधिकारों और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त करने के प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है।
इस सामूहिक कार्यक्रम का नेतृत्व ओडिशा हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश और गाजा को लेकर संयुक्त राष्ट्र की जांच समिति के अध्यक्ष जस्टिस एस. मुरलीधर तथा वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह ने किया। कार्यक्रम में सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष विकास सिंह सहित बड़ी संख्या में अधिवक्ता शामिल हुए।
कार्यक्रम में वरिष्ठ अधिवक्ताओं आनंद ग्रोवर, अंजना प्रकाश, शादान फरासत, अरुंधति काटजू, महालक्ष्मी पवनी, नंदिता राव, पी.वी. सुरेंद्रनाथ, मनाली सिंघल, संगीता भारती, पी.वी. दिनेश, जयंत ठाकुर और वृंदा ग्रोवर समेत अनेक वकीलों ने भाग लिया। इस दौरान कई अधिवक्ताओं के हाथों में तिरंगा और भारतीय संविधान की प्रति भी दिखाई दी, जिसने कार्यक्रम को एक प्रतीकात्मक और संवैधानिक स्वरूप दिया।

गौरतलब है कि हाल के दिनों में कथित पेपर लीक प्रकरण को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए जंतर-मंतर पर छात्रों ने प्रदर्शन किया था। प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर कई छात्र संगठनों और अधिवक्ताओं ने आपत्ति जताई थी। इसी क्रम में सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन, सुप्रीम Court Advocates-on-Record Association तथा ऑल इंडिया लॉयर्स यूनियन सहित कई वकील संगठनों ने भी पुलिस कार्रवाई के खिलाफ विरोध दर्ज कराया था।
सुप्रीम कोर्ट परिसर में संविधान की प्रस्तावना का सामूहिक पाठ उसी विरोध और लोकतांत्रिक मूल्यों के समर्थन की एक महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है। इस आयोजन के माध्यम से अधिवक्ताओं ने संविधान की सर्वोच्चता, नागरिक अधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
