नई दिल्ली। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) गुट के छह सांसदों के एकनाथ शिंदे गुट में विलय को लोकसभा अध्यक्ष द्वारा मान्यता दिए जाने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। मामले की सुनवाई जल्द कराने की मांग सोमवार को भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष की गई। अदालत ने याचिका पर जल्द सुनवाई का भरोसा दिया है।
याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता देवदत्त कामत ने अदालत में कहा कि यह केवल राजनीतिक नहीं बल्कि एक महत्वपूर्ण संवैधानिक मामला है। उन्होंने दलील दी कि लोकसभा अध्यक्ष ने 18 जुलाई की रात छह सांसदों के शिंदे गुट में विलय को मान्यता दी, जबकि यह फैसला संसद में पार्टी की स्थिति और अधिकारों को सीधे प्रभावित करता है।
याचिका में कहा गया है कि इस निर्णय के बाद शिंदे गुट के लोकसभा सांसदों की संख्या बढ़कर 13 हो गई है, जिससे संसद के भीतर पार्टी की कार्यप्रणाली और प्रतिनिधित्व पर असर पड़ा है। इसी आधार पर लोकसभा अध्यक्ष के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है।
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए याचिका पर जल्द सुनवाई का आश्वासन दिया है। अब इस मामले पर अदालत के विस्तृत आदेश का इंतजार रहेगा।
