पटना। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद वामपंथी छात्र एवं युवा संगठनों ने इसे छात्र आंदोलन की बड़ी जीत बताया है। भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) [CPI(M)] की बिहार राज्य कमेटी तथा संयुक्त छात्र-युवा मोर्चा ने अलग-अलग प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दावा किया कि छात्रों के लंबे आंदोलन, भूख हड़ताल और देशव्यापी विरोध के दबाव में केंद्र सरकार को यह फैसला लेना पड़ा।
CPI(M) बिहार राज्य कमेटी ने अपने बयान में कहा कि पिछले एक महीने से चल रहे छात्र आंदोलन ने सरकार को झुकने पर मजबूर किया। पार्टी ने देशभर के छात्र-युवाओं, विशेष रूप से बिहार के छात्रों को आंदोलन की सफलता के लिए बधाई देते हुए इसे लोकतांत्रिक संघर्ष की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।
हालांकि पार्टी ने कहा कि आंदोलन अभी समाप्त नहीं हुआ है। CPI(M) ने नई शिक्षा नीति (NEP-2020) वापस लेने, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) को समाप्त करने, नीट परीक्षा की तैयारी के दौरान आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिजनों को मुआवजा देने, बिहार में गिरफ्तार विधायक संदीप सौरव, डॉ. गौतम कृष्ण सहित अन्य नेताओं और छात्रों की रिहाई तथा छात्रों पर दर्ज मामलों को वापस लेने की मांग दोहराई।
संयुक्त छात्र-युवा मोर्चा की ओर से जारी बयान में कहा गया कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा छात्रों और युवाओं की बड़ी जीत है। संगठनों का दावा है कि जंतर-मंतर से शुरू हुआ आंदोलन धीरे-धीरे देशव्यापी अभियान में बदल गया और छात्रों की एकजुटता के कारण सरकार को अपना रुख बदलना पड़ा।

संगठनों ने आरोप लगाया कि आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई और दमन हुआ, लेकिन इससे आंदोलन और मजबूत हुआ। उनका कहना है कि छात्र-युवा अब भी शिक्षा और रोजगार से जुड़े मुद्दों पर संघर्ष जारी रखेंगे।
संयुक्त छात्र-युवा मोर्चा ने कहा कि उनकी अगली प्राथमिकताओं में राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) को समाप्त करना, नई शिक्षा नीति (NEP-2020) वापस लेना, सभी रिक्त सरकारी पदों पर स्थायी नियुक्ति, डोमिसाइल नीति लागू करना, ‘सबको शिक्षा-सबको काम’, समान कार्य के लिए समान वेतन तथा बिहार के विभिन्न विश्वविद्यालयों में कार्यरत अतिथि सहायक प्राध्यापकों का नियमितीकरण शामिल है।
CPI(M) के अनुसार, छात्र आंदोलन को बिहार के विभिन्न जिलों में भारत का छात्र फेडरेशन (SFI), भारत की जनवादी नौजवान सभा (DYFI), ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन (AISF) और ऑल इंडिया यूथ फेडरेशन (AIYF) के कार्यकर्ताओं का व्यापक समर्थन मिला। संगठनों ने आने वाले दिनों में इन मुद्दों पर राज्यव्यापी आंदोलन तेज करने की घोषणा की है।
वहीं, डीवाईएफआई के राज्य सचिव उमेश शर्मा और एसएफआई के राज्य सचिव देवदत्त कुमार ने संयुक्त बयान जारी कर कहा कि नीट पेपर लीक, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे, गिरफ्तार छात्रों की रिहाई और अन्य मांगों को लेकर पटना सहित बिहार के सभी जिलों में प्रतिवाद मार्च निकाला गया। उन्होंने दावा किया कि छात्रों की एकजुटता के कारण केंद्र सरकार को शिक्षा मंत्री का इस्तीफा लेना पड़ा और अब सरकार को छात्रों की अन्य मांगों पर भी सकारात्मक निर्णय लेना चाहिए।
