पटना।Bihar Anti Human Trafficking Unit : बिहार में मानव तस्करी के बढ़ते मामलों पर अंकुश लगाने के लिए पुलिस मुख्यालय ने बड़ा कदम उठाने की तैयारी शुरू कर दी है। विश्व मानव तस्करी विरोधी दिवस (30 जुलाई) के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) विनय कुमार ने राज्य के सभी महिला थानों में अलग एंटी ट्रैफिकिंग यूनिट गठित करने का प्रस्ताव तैयार करने का निर्देश दिया।
उन्होंने कहा कि मानव तस्करी अब साइबर अपराध से भी अधिक गंभीर और तेजी से फैलने वाला अपराध बन चुकी है। राज्य में मानव तस्करी के मामले साइबर अपराध की तुलना में लगभग तीन गुना अधिक दर्ज हो रहे हैं। ऐसे में प्रत्येक जिले में महिला थाने के भीतर समर्पित एंटी ट्रैफिकिंग सेल की आवश्यकता है।
डीजीपी ने सुझाव दिया कि प्रत्येक महिला थाने में दो अलग इकाइयां बनाई जाएं। पहली इकाई मानव तस्करी के मामलों की जांच करेगी, जबकि दूसरी महिलाओं एवं बच्चों के विरुद्ध अपराधों पर कार्य करेगी। दोनों इकाइयों का नेतृत्व इंस्पेक्टर स्तर का अधिकारी करे तथा महिला थाने का नेतृत्व डीएसपी रैंक के अधिकारी के हाथ में हो।
उन्होंने कहा कि यदि कोई बच्चा तीन महीने तक लापता रहता है तो उसका मामला स्वतः एंटी ट्रैफिकिंग यूनिट को स्थानांतरित किया जाना चाहिए। उन्होंने इसे “साइलेंट क्राइम” बताते हुए कहा कि इसके दुष्परिणाम लंबे समय तक पीड़ित परिवारों को प्रभावित करते हैं।
डीजीपी ने बताया कि वर्ष 2020 में सामान्य अपहरण के लगभग 8 हजार मामले दर्ज हुए थे, जबकि 2025 तक यह संख्या बढ़कर 24 हजार से अधिक हो गई। हालांकि बरामदगी दर लगभग 70 प्रतिशत है, लेकिन मानव तस्करी के मामलों में पीड़ितों की रिकवरी दर अपेक्षाकृत कम है, जो चिंता का विषय है।

उन्होंने सभी पुलिस अधिकारियों से अपील की कि गुमशुदा बच्चों और महिलाओं के मामलों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए तथा अभियुक्तों को सजा दिलाने तक प्रभावी पैरवी की जाए।
कार्यक्रम में एडीजी (कमजोर वर्ग) के. एस. अनुपम ने बताया कि राज्य के लगभग 1200 थानों को वात्सल्य पोर्टल से जोड़ दिया गया है और अब तक 10 हजार से अधिक गुमशुदा बच्चों का डेटा पोर्टल पर अपलोड किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन नया सवेरा 3.0 के तहत अब तक 88 मानव तस्करों को सजा दिलाई जा चुकी है।
कार्यक्रम के अंत में डीजीपी ने मानव तस्करी के खिलाफ उत्कृष्ट कार्य करने वाले पुलिस अधिकारियों और जिलों को सम्मानित किया। तस्करों की गिरफ्तारी में पटना पहले और सहरसा दूसरे स्थान पर रहा, जबकि नाबालिगों एवं महिलाओं की बरामदगी में किशनगंज पहले तथा सीतामढ़ी दूसरे स्थान पर रहा।
मुख्य बातें
- बिहार के सभी महिला थानों में एंटी ट्रैफिकिंग यूनिट बनाने की तैयारी।
- डीजीपी बोले— मानव तस्करी साइबर अपराध से भी बड़ा खतरा।
- प्रत्येक महिला थाने में दो विशेष इकाइयों का प्रस्ताव।
- 1200 थाने वात्सल्य पोर्टल से जुड़े।
- 10 हजार से अधिक गुमशुदा बच्चों का डेटा अपलोड।
- ऑपरेशन नया सवेरा 3.0 में 88 तस्करों को सजा।
- पटना और सहरसा उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले जिले।
महत्वपूर्ण आंकड़े
विवरण | आंकड़ा |
|---|---|
| महिला थानों में प्रस्तावित एंटी ट्रैफिकिंग यूनिट | सभी जिले |
| वात्सल्य पोर्टल से जुड़े थाने | 1,200 |
| अपलोड गुमशुदा बच्चों का रिकॉर्ड | 10,000+ |
| ऑपरेशन नया सवेरा 3.0 में सजा पाए तस्कर | 88 |
| 2020 में अपहरण के मामले | 8,000 |
| 2025 में अपहरण के मामले | 24,000+ |
| सामान्य अपहरण बरामदगी दर | 70%महत्वपूर्ण आंकड़े |
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