भाकपा (माले) ने बिहार में बढ़ती मॉब लिंचिंग, फर्जी मुठभेड़ों, बुलडोजर कार्रवाई और पुलिस दमन के खिलाफ 4 जुलाई को राज्यव्यापी विरोध दिवस मनाने का ऐलान किया है। पार्टी के महासचिव ने बुधवार को आरा में आयोजित प्रेस वार्ता में यह घोषणा की।
दीपंकर भट्टाचार्य ने कहा कि बिहार में सुशासन की जगह अब पुलिस राज, बुलडोजर राज और फर्जी मुठभेड़ों का दौर चल रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि मॉब लिंचिंग, जाति पूछकर हत्याएं, दलितों-पिछड़ों और गरीबों पर बढ़ते हमले लोकतंत्र और संविधान पर गंभीर हमला हैं। इन मुद्दों को लेकर पार्टी 4 जुलाई को पूरे राज्य में विरोध प्रदर्शन करेगी।
प्रेस वार्ता से पहले दीपंकर भट्टाचार्य के नेतृत्व में पार्टी की एक उच्चस्तरीय टीम ने बिहारशरीफ, नगरनौसा और भोजपुर के बेलौटी गांव का दौरा किया। टीम ने राजगीर में पीट-पीटकर मारे गए दलित युवकों श्रवण पासवान और पिंटू पासवान के परिजनों से मुलाकात की। इसके अलावा नगरनौसा में डिग्री कॉलेज स्थानांतरण के विरोध में आंदोलन कर रहे लोगों पर हुए पुलिस दमन के पीड़ितों से भी बातचीत की गई।
भोजपुर के बेलौटी गांव में भरत तिवारी के परिजनों से मुलाकात के बाद दीपंकर ने आरोप लगाया कि सरकार दोषियों को बचाने और पूरे मामले को प्रभावित करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने निष्पक्ष जांच और संबंधित प्रभावशाली लोगों को जांच पूरी होने तक निलंबित करने की मांग की।
उन्होंने कहा कि किसी भी घटना को जाति के आधार पर नहीं देखा जाना चाहिए और हर पीड़ित को समान न्याय मिलना चाहिए। साथ ही उन्होंने महंगाई, बेरोजगारी, मनरेगा की कमजोर होती स्थिति और नए श्रम कानूनों को भी जनता के अधिकारों पर हमला बताया।
दीपंकर भट्टाचार्य ने केंद्र सरकार पर भी निशाना साधते हुए कहा कि शिक्षा और रोजगार के सवाल पर युवाओं के साथ अन्याय हो रहा है। उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफे की मांग की।
भाकपा (माले) ने घोषणा की है कि आने वाले दिनों में “दाम बांधो, काम दो”, “बुलडोजर राज खत्म करो”, “कानून का राज स्थापित करो” और “लोकतंत्र बचाओ” जैसे मुद्दों पर राज्यव्यापी जनआंदोलन का नया चरण अगस्त से शुरू किया जाएगा। से शुरू किया जाएगा।
