ईरान से युद्ध के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा होमुर्ज की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालने का ऐलान करने के बाद एक बार फिर कयास लगाए जाने लगे हैं कि अमेरिका की इस दादागिरी के बाद से विश्व के हालात बिगड़ने वाले हैं. निश्चित रूप से अमेरिका का यह कदम वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है इसका गहरा असर पडने के चांस हैं, क्योंकि दुनिया की मिलने वाला एक तिहाई तेल (यानी 30 से 40%) समुद्री मार्ग होमुर्ज से होकर गुजरता है. अगर अमेरिका वहां 20 प्रतिशत टैक्स वसूलेगा तो कच्चे तेल की कीमतों में इजाफा होना तय है. इससे भारत जैसे विकासशील देशों में पेट्रोल डीजल महंगा होगा. जाहिर है इसका असर रोजाना की चीजों की कीमतों पर पड़ेगा यानी महंगाई बढ़ेगी.

खतरनाक मोड़ पर विश्व!
अमेरिका के इस फैसले का जो दूसरा सीधा असर पड़ेगा, वह यह है कि विश्व तीसरे विश्व युद्ध की ओर बढ़ता नजर आएगा. क्योंकि ईरान अब अपने हमले तेज कर देगा इसके बाद चीन और रूस भी शांत नहीं बैठेंगे. उनका दखल टेंशन को और बढ़ाएगा. जाहिर है अमेरिका ने ऐसा कदम उठाकर वैश्विक व्यापारिक मार्गों की हाईजैकिंग करने की कोशिश की है. वह सिर्फ होमुर्ज का गार्जियन बनने का नहीं दुनिया का गार्जियन बनने की कोशिश में नजर आता है. ऐसे में अमेरिका और ईरान का युद्ध बेहद खतरनाक मोड़ पर आकर खड़ा हो गया है. ईरान का अल्टीमेटम बताता है कि जल्दी कोई सुलह की गुंजाइश नहीं दिख रही है. टेंशन की बात यह है कि इतने लंबे समय से चल रहे हैं इस युद्ध का हम भारतीयों पर गहरा असर पड़ रहा है. ज्यादा लंबा युद्ध खींचने पर निश्चित रूप से हमारी जेब और ढ़ीली होगी.
गार्जियनशिप की कीमत
ट्रंप ने अपने ताजा बयान में कहा है कि अमेरिका ही इस समुद्री मार्ग की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालेगा और इसके बदले उसे भुगतान दिया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि हम काफी वक्त से इस समुद्री रास्ते की सुरक्षा में अहम भूमिका निभाते रहे हैं, इसलिए इसकी भरपाई की जानी चाहिए. ट्रंप ने कहा कि अमेरिका इस समुद्री रास्ते का गार्जियन बनेगा जिससे कि विश्व में तेल आपूर्ति की में कोई दिक्कत ना आए. उन्होंने साफ-साफ इस गार्जियनशिप की कीमत भी बता दी. उन्होंने कहा कि अमेरिका को सभी समुद्री मार्गों पर 20 फीसदी शुल्क दिया जाना चाहिए.

ईरान का पलटवार
अमेरिकी राष्ट्रपति के इस ऐलान पर ईरान ने कड़ी प्रतिक्रिया जताई है. ईरान ने कहा है कि हम होमुर्ज में अमेरिकी दखल को स्वीकार नहीं करेंगे. हम बिना इजाजत अमेरिका की किसी भी एक्टिविटी का मुंह तोड़ जवाब देंगे. ईरान ने अमेरिका का साथ देने वाले देशों को भी चेताते हुए कहा है कि जो भी इस मसले पर अमेरिका का साथ देगा, वह हमारे खिलाफ युद्ध में शामिल माना जाएगा.
जंग पर क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
जानकार मानते हैं कि होमुर्ज जलडमरूमध्य पर वर्चस्व की जंग इतनी जल्दी इतनी आसानी से खत्म होने वाली नहीं है. क्योंकि ईरान चाहता है कि इस रणनीतिक समुद्री रास्ते से आने-जाने वाले सभी जहाज उसके बनाए नियमों और रूट का पालन करें. ईरान यहां पर एकाधिकार चाहता है जबकि अमेरिका इसे वैश्विक व्यापार के लिए खतरनाक मानता है. हाल ही में जब ईरान ने हो होमुर्ज में तीन जहाजों पर हमले किए तो अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने युद्ध विराम को समाप्त घोषित कर दिया.
जून 2026 में दोनों पक्षों के बीच जो शांति समझौता हुआ, उसे अमेरिका और ईरान ने अपने-अपने हिसाब से देखना शुरू कर दिया. इस वजह से बात बिगड़ गई. जानकार मानते हैं कि दोनों देशों की मांगे इतनी विरोधी हैं कि किसी एक बिंदु पर सहमति बनना एकदम से असंभव नजर आ रहा है. जैसे- अमेरिका ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर कठोर है वह चाहता है कि ईरान जीरो एनरिचमेंट की पॉलिसी का पालन करें और अपने बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम को सीमित करे. वहीं ईरान का कहना है कि अमेरिका इजरायली हमले के खिलाफ पक्की सुरक्षा गारंटी दे साथ ही आर्थिक प्रतिबंध हटाए और युद्ध में हुए नुकसान का हर्जाना दे यही वजह है कि किसी एक बिंदु पर सहमति दोनों देशों में नहीं बन पा रही है.
इसके अलावा जानकार मानते हैं कि क्षेत्रीय गुटबाजी और इजराइल लेबनान का मोर्चा भी दोनों के बीच सहमति न बन पाने की एक बड़ी वजह है. ईरान किसी भी स्थाई शांति समझौते के लिए लेबनान से इजरायली सेवा की पूर्ण वापसी की मांग कर रहा है. जबकि ईरान और अमेरिका मिलकर लेबनान पर हमले जारी रखे हुए हैं. यही वजह है की सुलह नहीं हो पा रही है. इस तरह से जब तक इन पहलुओं पर दोनों देशों के बीच सहमति नहीं बनेगी तब तक जंग होती रहेगी.
