“साहित्य केवल शब्दों का विन्यास नहीं, बल्कि समाज, संस्कृति और समय की चेतना का जीवंत दस्तावेज़ है।” यह विचार प्रयागराज के उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र (एनसीजेडसीसी), संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा आयोजित संवाद श्रृंखला ‘विमर्श’ में मुख्य वक्ता एवं इलाहाबाद डिग्री कॉलेज (इलाहाबाद विश्वविद्यालय) के विधि विभाग के सहायक आचार्य डॉ. श्लेष गौतम ने व्यक्त किए।
केंद्र के बहुउद्देशीय सभागार में आयोजित कार्यक्रम में अपने व्याख्यान में डॉ. गौतम ने कहा कि साहित्य सृजन एक शाश्वत, सकारात्मक एवं निरंतर चलने वाली चिंतन और अभिव्यक्ति की प्रक्रिया है, जो समय, काल और परिस्थितियों को आत्मसात करते हुए परंपरा, प्रयोग, परिवर्तन और प्रतिरोध को शब्दों की गरिमा के साथ अभिव्यक्त करती है। साहित्य केवल यथार्थ और कल्पना का समन्वय नहीं, बल्कि वैचारिकी, युगबोध, मानवीय संवेदनाओं तथा सामाजिक उत्तरदायित्व का सशक्त माध्यम भी है। उन्होंने कहा कि साहित्य समाज को दिशा देने, सांस्कृतिक मूल्यों को संरक्षित रखने और नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य करता है।
डॉ. श्लेष गौतम ने कहा कि बदलते समय में साहित्य की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि यही समाज को संवेदनशीलता, मानवीय मूल्यों और सांस्कृतिक चेतना से जोड़ता है। साहित्य व्यक्ति और समाज के बीच संवाद का ऐसा सेतु है, जो पीढ़ियों को जोड़ने का कार्य करता है।

डॉ. श्लेष गौतम साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान रखते हैं। उनके काव्य संग्रह ‘चाँद सुलगता है’ के लिए उन्हें उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान द्वारा डॉ. हरिवंश राय बच्चन युवा गीतकार सम्मान (2012) से सम्मानित किया जा चुका है। इसके अतिरिक्त उन्हें शिशु वल्लभ अलंकरण, जनकवि कैलाश गौतम सम्मान तथा लोककलाविद् सम्मान सहित अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों से अलंकृत किया गया है। वे संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार की जूनियर फेलोशिप तथा अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर पर फेलोशिप प्राप्त कर चुके हैं। राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय कवि सम्मेलनों में काव्यपाठ और संचालन के माध्यम से भी उन्होंने अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराई है।
डॉ. गौतम की प्रकाशित कृतियों में ‘चाँद सुलगता है’, ‘राम तुम्हारा नाम’, ‘आदमकद बौने’, ‘नई सदी को पढ़ो कबीरा’, ‘राम युग से परे, राम युग बोध हैं’, ‘चखना गुरु’, ‘संवादों की ताकत से इतिहास बदलते देखा है’ सहित अनेक चर्चित पुस्तकें शामिल हैं। वे इलाहाबाद विश्वविद्यालय की राजभाषा कार्यान्वयन समिति के सदस्य भी हैं। कार्यक्रम का शुभारंभ केंद्र निदेशक सुदेश शर्मा तथा मुख्य वक्ता डॉ. श्लेष गौतम ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। कार्यक्रम का संचालन आकाश अग्रवाल ने किया।
