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प्रयागराज में रशीद जहाँ पर केंद्रित ‘एक इंक़लाबी आवाज़’ विचार गोष्ठी में उनके साहित्य, चिकित्सा, महिला शिक्षा और प्रगतिशील आंदोलन से जुड़े योगदान को याद किया गया। वक्ताओं ने उनकी विरासत को आज के समय में फिर पढ़ने की जरूरत बताई।

“साहित्य केवल शब्दों का विन्यास नहीं, बल्कि समाज, संस्कृति और समय की चेतना का जीवंत दस्तावेज़ है।” यह विचार प्रयागराज…