सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु में गोवध पर पूर्ण रोक लगाने के मद्रास हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दिया है। जस्टिस विक्रम नाथ की अध्यक्षता वाली बेंच ने मद्रास हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाने का आदेश दिया।
तमिलनाडु सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर राज्य में गोवध पर पूर्ण रोक लगाने के मद्रास हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी है। तमिलनाडु सरकार ने कहा है कि हाईकोर्ट का आदेश तमिलनाडु एनिमल प्रिजर्वेशन एक्ट के प्रावधानों का उल्लंघन करने वाला है।
याचिका में कहा गया है कि तमिलनाडु एनिमल प्रिजर्वेशन एक्ट में 10 साल से ज्यादा की उम्र की उन गायों का वध करने का प्रावधान है जो काम करने या प्रजनन करने लायक नहीं हैं। याचिका में कहा गया है कि तमिलनाडु एनिमल प्रिजर्वेशन एक्ट के अलावा प्रिवेंशन ऑफ क्रूएल्टी टू एनिमल्स एक्ट, प्रिवेंशन ऑफ क्रूएल्टी टू एनिमल्स (स्लॉटर हाउस) रुल्स, तमिलनाडु अर्बन लोकल बॉडीज एक्ट और तमिलनाडु अर्बन लोकल बॉडीज रुल्स के प्रावधानों के मुताबिक भी पशुओं का वध करने की शर्तें तय की गई हैं लेकिन उनका वध करने पर पूर्ण रोक नहीं है। लेकिन हाईकोर्ट ने गोवध पर पूर्ण रोक लगाकर इन प्रावधानों का उल्लंघन किया है।
बता दें कि मद्रास हाईकोर्ट ने 27 मई को गोवध पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का आदेश दिया था। याचिकाकर्ता और हिन्दू मक्कल काची के महासचिव के सूर्या प्रशांत ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर मांग की थी कि वध तय जगह पर करने का दिशानिर्देश जारी करने की मांग की थी। लेकिन हाईकोर्ट ने गाय या बछड़े के वध पर कभी और और कहीं भी करने पर पूर्ण रोक लगा गिया था।
