बिहार के किसानों के लिए राहत भरी खबर है। अब यदि कोई किसान अपने ही खेत से घरेलू या कृषि कार्य के लिए मिट्टी निकालता है तो उस पर बिना जांच के जुर्माना नहीं लगाया जाएगा। खान एवं भू-तत्व मंत्री प्रमोद कुमार ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि किसानों को अनावश्यक रूप से परेशान न किया जाए और हर मामले की पूरी जांच के बाद ही कार्रवाई की जाए।
बिहार सरकार ने किसानों के हित में बड़ा फैसला लेते हुए स्पष्ट किया है कि यदि कोई किसान अपने ही खेत से घरेलू अथवा कृषि उपयोग के लिए मिट्टी निकालता है तो उस पर बिना जांच के जुर्माना नहीं लगाया जाएगा। खान एवं भू-तत्व मंत्री प्रमोद कुमार ने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिया है कि ऐसे मामलों में पहले तथ्यों की पूरी जांच करें और उसके बाद ही कोई कार्रवाई करें।
बुधवार को विभागीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए मंत्री ने कहा कि उन्हें लगातार शिकायतें मिल रही हैं कि कई जगह किसानों पर अपने खेत की मिट्टी निकालने के कारण भी जुर्माना लगाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह स्वीकार्य नहीं है और किसानों को अनावश्यक रूप से परेशान नहीं किया जाना चाहिए।
अवैध खनन करने वालों पर करें सख्त कार्रवाई, किसानों को नहीं करें परेशान
मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि कार्रवाई केवल उन लोगों के खिलाफ हो जो वास्तव में अवैध खनन में संलिप्त हैं। किसानों के घरेलू और कृषि कार्यों को अवैध खनन की श्रेणी में नहीं रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि विभाग का उद्देश्य कानून का पालन कराना है, न कि ईमानदार किसानों को परेशान करना।
ईंट-भट्ठे की एफआईआर पर भी जताई नाराजगी
समीक्षा बैठक में मंत्री ने एक ऐसे मामले पर भी नाराजगी जताई, जिसमें केवल एक पुलिस सब-इंस्पेक्टर के निर्देश पर एक ईंट-भट्ठे के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर दी गई थी। उन्होंने सवाल उठाया कि खनन अधिकारी बिना स्वयं जांच किए किसी अन्य अधिकारी के निर्देश पर कार्रवाई कैसे कर सकते हैं। इतना ही नहीं, संबंधित एफआईआर में ईंट-भट्ठा मालिक का नाम तक दर्ज नहीं था। मंत्री ने स्पष्ट कहा कि किसी भी कार्रवाई से पहले खनन निरीक्षक स्वयं मौके की जांच करें और तथ्यों के आधार पर ही निर्णय लें।
5,000 करोड़ रुपये राजस्व का लक्ष्य
बैठक में विभाग के राजस्व संग्रह की भी समीक्षा की गई। मंत्री ने बताया कि वर्ष 2026-27 के लिए विभाग ने 5,000 करोड़ रुपये राजस्व संग्रह का लक्ष्य रखा है। उन्होंने कहा कि पटना, औरंगाबाद, भोजपुर, रोहतास, गया, नवादा, जमुई और अरवल जैसे जिले विभाग के प्रमुख राजस्व स्रोत हैं। इन जिलों का प्रदर्शन कमजोर होने पर पूरे विभाग का लक्ष्य प्रभावित हो सकता है।
जनप्रतिनिधियों के फोन का सम्मानपूर्वक जवाब दें अधिकारी
मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों के सांसद, विधायक, विधान पार्षद और जिला परिषद अध्यक्षों के मोबाइल नंबर अपने पास रखें। यदि किसी कारणवश तत्काल फोन नहीं उठा सकें तो बाद में अवश्य कॉल बैक करें। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों से बेहतर संवाद रहने पर जनता की कई समस्याओं का समाधान तेजी से हो सकता है।
सचिव की अधिकारियों को कड़ी चेतावनी
बैठक में विभाग के सचिव-सह-खनन आयुक्त अवनीश कुमार सिंह ने कई मामलों में अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर असंतोष जताया।
उन्होंने कहा कि-
- बालू घाटों के बंदोबस्त में देरी स्वीकार नहीं होगी।
- राजस्व संग्रह में सुधार हर हाल में करना होगा।
- एफआईआर दर्ज करने में लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी।
- प्रत्येक माह की 7 तारीख तक रिपोर्ट भेजना अनिवार्य होगा।
- लक्ष्य पूरा नहीं करने वाले अधिकारियों पर निलंबन या सेवा से बर्खास्तगी जैसी कार्रवाई की जा सकती है।
ईंट-भट्ठों के लिए आ सकती है OTS योजना
सचिव ने बताया कि विभाग ईंट-भट्ठा संचालकों के लिए वन टाइम सेटलमेंट (OTS) योजना लाने पर विचार कर रहा है। यदि मंत्रिमंडल से मंजूरी मिलती है तो बकायेदार संचालकों को केवल मूल राशि जमा करनी होगी, जबकि ब्याज माफ किया जा सकता है।

दो अधिकारियों को किया गया सम्मानित
बैठक के अंत में उत्कृष्ट कार्य के लिए विभाग के अधिकारियों आनंद किशोर और सचिन किशोर को प्रशस्ति-पत्र देकर सम्मानित किया गया।
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यह फैसला उन किसानों के लिए बड़ी राहत है, जिन्हें अपने ही खेत में कृषि या घरेलू कार्य के लिए मिट्टी निकालने पर कार्रवाई का सामना करना पड़ता था। साथ ही सरकार ने यह भी स्पष्ट संकेत दिया है कि विभाग की प्राथमिकता किसानों को परेशान करना नहीं, बल्कि संगठित अवैध खनन पर प्रभावी कार्रवाई करना है। दूसरी ओर अधिकारियों के लिए जवाबदेही बढ़ाने, राजस्व लक्ष्य पूरा करने और विभागीय अनुशासन को सख्ती से लागू करने का संदेश भी इस समीक्षा बैठक से साफ दिखाई देता है।
