पटना। बिहार विधान परिषद के मानसून सत्र के चौथे दिन गुरुवार को सदन की कार्यवाही शुरू होते ही छात्र आंदोलन और पटना में हुए प्रदर्शन को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। मामला इतना गरमा गया कि प्रश्नकाल सुचारु रूप से नहीं चल सका और सदन की कार्यवाही शुरू होने के करीब 16 मिनट बाद ही दोपहर 2:30 बजे तक स्थगित करनी पड़ी।
सरकार ने विधायकों के साथ दुर्व्यवहार का मुद्दा उठाया
सदन की शुरुआत में सरकार की ओर से पटना के डाक बंगला चौराहे पर हुए छात्र प्रदर्शन के दौरान कुछ विधायकों के साथ कथित दुर्व्यवहार और हमले का मुद्दा उठाया गया। सत्ता पक्ष के सदस्यों ने कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से विरोध प्रदर्शन करना सभी का अधिकार है, लेकिन जनप्रतिनिधियों को निशाना बनाना और उनके साथ अभद्र व्यवहार किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है।
सरकार की ओर से कहा गया कि घटना में शामिल लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही स्पष्ट किया गया कि कानून-व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
विपक्ष ने पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल
सरकार के बयान के बाद विपक्षी सदस्य अपनी सीटों से खड़े हो गए और जोरदार विरोध शुरू कर दिया। विपक्ष का कहना था कि प्रदर्शन कर रहे लोग छात्र थे, जो अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन कर रहे थे।
विपक्षी सदस्यों ने आरोप लगाया कि सरकार छात्रों की समस्याओं का समाधान करने के बजाय पुलिस बल का प्रयोग कर रही है। उन्होंने कहा कि छात्रों की मांगों पर संवाद होना चाहिए, न कि लाठीचार्ज और दमनात्मक कार्रवाई के जरिए उनकी आवाज दबाई जानी चाहिए।
अब्दुल बारी सिद्दीकी का स्थगन प्रस्ताव स्वीकार नहीं
इस दौरान राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के विधान पार्षद अब्दुल बारी सिद्दीकी ने छात्र आंदोलन के मुद्दे पर स्थगन प्रस्ताव लाने की कोशिश की। हालांकि सभापति ने प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया। इसके बाद राजद सदस्यों ने इस फैसले का विरोध करते हुए सदन में नारेबाजी शुरू कर दी।
सभापति ने कई बार सदन को शांत कराने का प्रयास किया, लेकिन लगातार हंगामे के कारण कार्यवाही सामान्य नहीं हो सकी।
16 मिनट में स्थगित हुआ सदन
लगातार शोर-शराबे और हंगामे के बीच सभापति ने मानसून सत्र के चौथे दिन की कार्यवाही शुरू होने के लगभग 16 मिनट बाद सदन को दोपहर 2:30 बजे तक स्थगित कर दिया।
