बिहार विधानसभा के मानसून सत्र का पहला दिन वंदे मातरम् और राष्ट्रगान के साथ शुरू हुआ। सत्र के प्रारंभ में विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने सभी मंत्रियों, विधायकों और पत्रकारों का स्वागत करते हुए लोकतांत्रिक मूल्यों, संसदीय मर्यादा और जनसेवा के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बिहार विधानसभा भारतीय लोकतंत्र का सर्वोच्च मंच है, जहां जनता की अपेक्षाओं, आकांक्षाओं और समस्याओं का संवैधानिक मर्यादाओं के अनुरूप समाधान खोजा जाता है। यह केवल कानून बनाने का मंच नहीं, बल्कि जनभावनाओं, लोककल्याण और संविधान की भावना का जीवंत प्रतीक भी है।
बिपार्ड प्रशिक्षण का किया उल्लेख
स्पीकर डॉ. प्रेम कुमार ने हाल ही में बिहार लोक प्रशासन एवं ग्रामीण विकास संस्थान (बिपार्ड), गया में आयोजित दो दिवसीय प्रबोधन कार्यक्रम में भाग लेने वाले सभी विधायकों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में संसदीय प्रक्रिया, विधायी एवं बजटीय कार्य, समितियों की कार्यप्रणाली, विशेषाधिकार, संसदीय आचरण, जनप्रतिनिधियों की भूमिका और नई तकनीकों जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञों ने मार्गदर्शन दिया। इससे सदस्यों को सदन की कार्यवाही अधिक प्रभावी और जनोन्मुख बनाने में मदद मिलेगी।
लोकतंत्र में संवाद सबसे बड़ी ताकत
विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि लोकतंत्र की सफलता इस बात में है कि विचार अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन राष्ट्र और समाज के हित का उद्देश्य एक होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों का दायित्व निजी हितों से ऊपर उठकर जनता के कल्याण को प्राथमिकता देना है। यदि सदन में अनुशासन, शालीनता और सकारात्मक संवाद की परंपरा कायम रहेगी तो लोकतंत्र और मजबूत होगा।
बिहार की गौरवशाली विरासत का किया उल्लेख
अपने संबोधन में डॉ. प्रेम कुमार ने कहा कि बिहार ज्ञान, तप, त्याग और लोकतांत्रिक परंपराओं की भूमि रही है।
उन्होंने भगवान बुद्ध, भगवान महावीर, आचार्य चाणक्य, नालंदा विश्वविद्यालय और विक्रमशिला विश्वविद्यालय का उल्लेख करते हुए कहा कि बिहार ने विश्व को ज्ञान, सुशासन और मानवीय मूल्यों की दिशा दिखाई है।
जनहित के मुद्दों पर सार्थक चर्चा की अपील
स्पीकर ने कहा कि मानसून सत्र राज्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इस दौरान कई विधायी, वित्तीय और जनहित से जुड़े विषय सदन के समक्ष आएंगे।
उन्होंने सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों से लोकतांत्रिक परंपराओं का सम्मान करते हुए स्वस्थ बहस और रचनात्मक सहयोग की अपील की।
“सदन बहस का मंच है, टकराव का नहीं”
अपने संबोधन में उन्होंने कहा—
“यह सदन बहस का मंच है, संघर्ष का नहीं; तर्क का मंच है, कटुता का नहीं; समाधान का मंच है, टकराव का नहीं।”
उन्होंने कहा कि जनता ने सभी जनप्रतिनिधियों को अपने विश्वास के साथ सदन में भेजा है। इसलिए प्रत्येक सदस्य का आचरण लोकतंत्र की गरिमा से जुड़ा है।
विकास के मुद्दों पर चर्चा का आग्रह
स्पीकर ने सभी सदस्यों से आग्रह किया कि पांच दिवसीय मानसून सत्र के दौरान प्रश्नकाल, शून्यकाल और विधायी कार्यों में सक्रिय भागीदारी करें तथा बिहार के विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, उद्योग, रोजगार, महिला सशक्तिकरण, युवाओं के भविष्य, सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण और सुशासन जैसे विषयों पर सार्थक चर्चा करें।
अंत में उन्होंने सभी सदस्यों से लोकतांत्रिक मूल्यों, संसदीय परंपराओं, अनुशासन और जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का संकल्प लेने का आह्वान किया।
