पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छ परिसर के उद्देश्य से पटना स्थित राम लखन सिंह यादव कॉलेज, अनिसाबाद की राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) इकाई ने सोमवार को “प्लास्टिक मुक्त परिसर” अभियान का आयोजन किया। इस अभियान का उद्देश्य कॉलेज परिसर को सिंगल-यूज प्लास्टिक से मुक्त बनाना, स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाना और पर्यावरण संरक्षण के लिए सामूहिक भागीदारी सुनिश्चित करना है।
अभियान के दौरान कॉलेज प्रशासन ने शिक्षकों, शिक्षकेत्तर कर्मचारियों और छात्रों से प्लास्टिक के उपयोग को कम करने तथा परिसर को स्वच्छ और हरित बनाए रखने का संकल्प लेने की अपील की। ‘प्लास्टिक को कहें ना, पर्यावरण बचाएं’ का दिया संदेश
कार्यक्रम का मुख्य संदेश था-
“प्लास्टिक को कहें ना, पर्यावरण बचाएं, हम सब मिलकर स्वच्छ परिसर बनाएं। “इस संदेश के माध्यम से कॉलेज परिवार को पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने और प्लास्टिक मुक्त समाज के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया गया।
सुबह 11 बजे से चला जागरूकता अभियान
एनएसएस इकाई के आह्वान पर कॉलेज के शिक्षक, शिक्षकेत्तर कर्मचारी और स्वयंसेवकों ने अभियान में भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान परिसर की स्वच्छता, प्लास्टिक कचरे के निष्पादन और पर्यावरण संरक्षण के महत्व पर चर्चा की गई।
एनएसएस समन्वयक ने की सहयोग की अपील
कॉलेज के एनएसएस समन्वयक प्रो. प्रसिद्ध कुमार ने कहा कि स्वच्छ और प्लास्टिक मुक्त परिसर केवल एक अभियान नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी है। उन्होंने सभी शिक्षकों, कर्मचारियों और छात्रों से इस पहल को सफल बनाने और इसे नियमित जनआंदोलन का रूप देने की अपील की।
उन्होंने कहा कि “स्वच्छ कॉलेज, हमारा संकल्प” केवल एक नारा नहीं, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए स्वच्छ और सुरक्षित पर्यावरण बनाने का संकल्प है।
पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सकारात्मक पहल
कॉलेज प्रशासन का मानना है कि प्लास्टिक के बढ़ते उपयोग से पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य दोनों प्रभावित हो रहे हैं। ऐसे में शैक्षणिक संस्थानों की जिम्मेदारी है कि वे विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करें और व्यवहारिक स्तर पर बदलाव की शुरुआत करें।
इस अभियान के माध्यम से कॉलेज परिसर को प्लास्टिक मुक्त बनाने के साथ-साथ छात्रों में स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है।
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देशभर में प्लास्टिक प्रदूषण एक गंभीर चुनौती बन चुका है। ऐसे समय में शैक्षणिक संस्थानों द्वारा चलाए जा रहे “प्लास्टिक मुक्त परिसर” जैसे अभियान केवल परिसर की स्वच्छता तक सीमित नहीं हैं, बल्कि युवाओं में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी और टिकाऊ जीवनशैली अपनाने की सोच विकसित करने का माध्यम भी हैं। यदि ऐसे अभियान नियमित रूप से चलाए जाएं तो उनका सकारात्मक प्रभाव समाज के व्यापक स्तर पर देखने को मिल सकता है।
