भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के सांसद अमरा राम ने बिहार के नालंदा जिले के नगरनौसा में डिग्री कॉलेज की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई की कड़ी निंदा की है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में कानून व्यवस्था पूरी तरह विफल हो चुकी है और बिहार “जंगलराज के चरम” पर पहुंच गया है।
पटना में आयोजित संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए अमरा राम ने कहा कि नगरनौसा में डिग्री कॉलेज की मांग कर रहे छात्रों पर पुलिस द्वारा बर्बरतापूर्ण लाठीचार्ज किया गया और 39 छात्रों को जेल भेज दिया गया। उन्होंने कहा कि यह लोकतांत्रिक अधिकारों पर सीधा हमला है।
उन्होंने बताया कि गिरफ्तार छात्रों में एसएफआई की बिहार राज्य अध्यक्ष कांति कुमारी, जिला सचिव गायत्री कुमारी समेत तीन छात्राएं और 36 छात्र शामिल हैं। अमरा राम ने कहा कि छात्राओं को भी जेल भेजना सरकार के “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” जैसे नारों की वास्तविकता को उजागर करता है।
सांसद ने आरोप लगाया कि पुलिस ने नगरनौसा में कई घरों में घुसकर बुजुर्ग महिलाओं, बच्चों और अन्य ग्रामीणों के साथ मारपीट की तथा तोड़फोड़ कर पूरे इलाके में भय का माहौल बना दिया। उन्होंने कहा कि यह किसी लोकतांत्रिक सरकार का नहीं बल्कि दमनकारी शासन का उदाहरण है।

अमरा राम ने सवाल उठाया कि जब स्थानीय अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) ने धरनारत छात्रों को लिखित रूप से नगरनौसा में डिग्री कॉलेज खोलने का आश्वासन दिया था, तब बाद में उस निर्णय को बदलने और कॉलेज को दूसरी जगह स्थापित करने की कोशिश क्यों की गई। उन्होंने कहा कि अपनी मांग को लेकर शांतिपूर्ण विरोध कर रहे छात्रों पर लाठीचार्ज करना और उन्हें जेल भेजना न्यायसंगत नहीं कहा जा सकता।
उन्होंने घोषणा की कि वह नगरनौसा जाकर जनसभा करेंगे। इस दौरान उनके साथ पार्टी के राज्य सचिव ललन चौधरी, विधायक अजय कुमार तथा एसएफआई के राष्ट्रीय महासचिव सृजन भट्टाचार्य भी मौजूद रहेंगे। अमरा राम ने कहा कि इस आंदोलन को सड़क से लेकर संसद तक मजबूती से उठाया जाएगा।
संवाददाता सम्मेलन में सीपीएम राज्य सचिव ललन चौधरी, एसएफआई के राष्ट्रीय महासचिव सृजन भट्टाचार्य, सीपीएम राज्य सचिव मंडल सदस्य मनोज कुमार चंद्रवंशी सहित अन्य नेता भी उपस्थित रहे।
नगरनौसा आंदोलन का बैकग्राउंड
नालंदा जिले का नगरनौसा पिछले कुछ समय से डिग्री कॉलेज की स्थापना को लेकर आंदोलन का केंद्र बना हुआ है। स्थानीय छात्र-छात्राओं और ग्रामीणों का कहना है कि उच्च शिक्षा के लिए उन्हें दूर-दराज के शहरों का रुख करना पड़ता है, जिससे आर्थिक और सामाजिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इसी मांग को लेकर लगातार धरना-प्रदर्शन चल रहा है। हाल के दिनों में आंदोलन के दौरान पुलिस कार्रवाई, छात्रों की गिरफ्तारी और राजनीतिक दलों की सक्रियता के बाद यह मामला पूरे बिहार में चर्चा का विषय बन गया है।
