जनता दल यूनाइटेड प्रवक्ता परिमल कुमार, प्रदेश प्रवक्ता हिमराज राम और मीडिया पैनलिस्ट डा0 मधुरेंदु पांडेय ने बयान जारी कर दावा किया है कि बिहार में नीतीश कुमार की भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति को वर्तमान एनडीए सरकार और अधिक प्रभावी एवं मजबूत बनाने की दिशा में लगातार ठोस कदम उठा रही है। इसी का नतीजा है की राज्य सरकार ने सभी नौ प्रमंडलों में स्पेशल विजिलेंस कोर्ट की स्थापना का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। इसके साथ ही प्रत्येक जिले में निगरानी थाना और सभी अनुमंडलों में निगरानी ओपी स्थापित किए जाएंगे, ताकि भ्रष्टाचार के मामलों की त्वरित जांच और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित हो सके। भ्रष्टाचार के मामलों में सरकारी गवाहों को परिवहन भत्ता उपलब्ध कराने का निर्णय भी सरकार की गंभीर प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

जेडीयू प्रवक्तों ने कहा कि सरकार का यह निर्णय नीतीश कुमार के सालों से स्थापित उस सुदृढ़ व्यवस्था का विस्तार है, जिसके तहत बिहार में भ्रष्टाचार के विरुद्ध कठोर और संस्थागत कार्रवाई की परंपरा विकसित हुई। वर्ष 2006 में सरकार ने निगरानी अन्वेषण ब्यूरो को अधिक सशक्त बनाया और भ्रष्टाचार के मामलों में कार्रवाई को गति दी। इसके बाद विशेष न्यायालय अधिनियम लागू कर भ्रष्टाचार में संलिप्त लोक सेवकों की अवैध संपत्ति जब्त करने का प्रावधान किया गया, जो पूरे देश में एक अनुकरणीय पहल साबित हुई।
उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली तत्कालीन सरकार में लोक सेवाओं का अधिकार अधिनियम, लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम और लोक प्राधिकारों की जवाबदेही बढ़ाने वाले कानून लागू किए गए। जिससे आम नागरिकों को समयबद्ध सेवाएं मिलने लगीं और भ्रष्टाचार की संभावनाओं में उल्लेखनीय कमी आई। सभी सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों की संपत्ति का वार्षिक विवरण सार्वजनिक करने की व्यवस्था भी पारदर्शिता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम रही।

सरकार ने ई-टेंडरिंग, ई-प्रोक्योरमेंट, डिजिटल भुगतान, ऑनलाइन निगरानी प्रणाली और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के डिजिटलीकरण को बढ़ावा देकर मानवीय हस्तक्षेप कम किया। व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाया। इन सुधारों का परिणाम है कि बिहार में सुशासन की संस्कृति लगातार मजबूत हुई है और भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई को संस्थागत आधार मिला है।
बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जीरो टॉलरेंस की नीति भविष्य में भी पूरी दृढ़ता के साथ जारी रहेगी और सुशासन, पारदर्शिता तथा जवाबदेह प्रशासन के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता और अधिक सशक्त होगी।
