बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और आरजेडी के कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव ने हज़ारों करोड़ के महाघोटाले के आरोपी रिशु श्री मामले को लेकर बिहार सरकार से 13 सवाल पूछे हैं। उन्होंने अपने सवालों में बिहार सरकार पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं और उसके जवाब माँगे है। उन्होंने अपने सवालों में पूछा है की रिशु श्री सिंडिकेट का असली सरग़ना का नाम कब सामने आएँगे। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि जिन विभागों में महाघोटाले को अंजाम दिया गया उन विभागों के मंत्रियों ने ज़िम्मेदारी लेते हुए अब तक इस्तीफ़ा क्यों नहीं दिया। नेता प्रतिपक्ष ने बिहार सरकार से जो 13 सवाल किए है और जिसका जवाब माँगा है freelancerpost उसे हू-ब-हू प्रकाशित कर रहा है।

1. एक मामूली सा ठेकेदार (रिशु श्री) कई विभागों के टेंडरों को अपनी मर्जी से कैसे मैनेज कर रहा था? सरकार का निगरानी तंत्र इतने वर्षों तक क्या कर रहा थी? या अधिकारियों द्वारा निजी लाभ के लिए सब कुछ नजरअंदाज किया जा रहा था?
2. ED की जांच में सामने आए चैट्स से पता चलता है कि रिशु श्री कई वरिष्ठ IAS अधिकारियों के प्रभावशाली कॉकस को सत्ता और सर्वोच्च अधिकारियों का संरक्षण कैसे प्राप्त था? वह अधिकारियों को निर्देश किसकी शह पर देता था?
3. चार्जशीट में बड़ी मछलियों को छोड़ दिया गया है? क्या ऐसा करने में देरी के पीछे क्या कोई राजनैतिक दबाव है या सत्ता में बैठे राजनेताओं को खुद पकड़े जाने का डर है?
4. दो IAS अधिकारियों को निलंबित किया गया लेकिन चार्जशीट में उनका नाम नहीं है? उनकी तत्काल गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई? क्या सरकार को उनसे सबके पत्ते खोल देने की धमकी मिली है? भाजपा और जदयू ने सत्ता संरक्षित और पोषित भ्रष्टाचारियों को सजा से इम्यूनिटी क्यों दिया हुआ है?
5. वित्त विभाग के तत्कालीन संयुक्त सचिव, जल संसाधन विभाग, भवन निर्माण विभाग के इंजीनियरों की गिरफ्तारी के बाद, क्या सरकार ने इस बात की समीक्षा की है कि इन्होंने अब तक कुल कितने करोड़ के सरकारी फंड को डायवर्ट किया? और अगर हां तो इस राशि को सार्वजनिक करने में देरी क्यों की जा रही है? क्या सरकार में बैठे लोगों को इसमें से “कट” मिलना बाकी है?
6. आरोपी रिशु श्री पहले से तय करता था कि ठेका किसे मिलेगा और उसी हिसाब से विभागीय टेंडर की शर्तें (क्राइटेरिया) बदलवा देता था। क्या इस सिंडिकेट के सरगना मुख्यमंत्री और मुख्यमंत्री कार्यालय और निवास में बैठे अधिकारी थे और है?
7. जांच में सामने आया है कि सरकारी विभागों में बिल पास कराने और टेंडर देने के बदले 2% से 3.5% तक का फिक्स्ड कमीशन चलता था। क्या यह भ्रष्टाचार में नग्न सरकार के “जीरो टॉलरेंस” के दावों की धज्जियां नहीं उड़ाता?
8. क्या सरकार रिशुश्री और उनसे संबंधित कंपनियों को मिले सभी टेंडरों की स्वतंत्र न्यायिक जांच कराएगी? या सरकार को चिंता है कि उनके अपने प्रिय पोषित अधिकारी फंस ना जाएं?
9. क्या यह संयोग है कि सारी Beneficiary कंपनियाँ गुजरात से है इसलिए उसे बचाया जा रहा है?
10. रिशु श्री द्वारा अधिकारियों और उनके परिवारों की विदेशी यात्राओं, एयर टिकट और महंगे गिफ्ट्स का खर्च उठाने की बात सामने आई है। गृह विभाग, EOU, निगरानी और खुफिया विभाग (Intelligence Bureau) इस वित्तीय लेन-देन से बेखबर क्यों थे? या सरकार से उन्हें बेखबर रहने का ढोंग करने के लिए कहा गया था?
11. छापेमारी में रिशु श्री के पास से 99 संपत्तियों के डीड और करोड़ों की नकदी/जेवरात मिले हैं। बिहार की जनता जानना चाहती है कि एक ठेकेदार के पास राज्य के बजट का एक बड़ा हिस्सा कैसे चला गया?
12. सरकार केवल “छोटी मछलियों” और कुछ चुनिंदा अधिकारियों को बलि का बकरा बना रही है। इस सिंडिकेट के शीर्ष पर बैठे असली राजनैतिक आकाओं और “अमृत”पान करने वाले अधिकारियों के नाम कब सामने लाए जाएंगे?
13. जिन विभागों में यह महाघोटाला हुआ, उनके विभागीय मंत्रियों ने अभी तक अपनी नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा क्यों नहीं दिया है?
