नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने शिवसेना उद्धव गुट के छह सांसदों का एकनाथ शिंदे गुट में विलय को मान्यता देने के लोकसभा अध्यक्ष के फैसले पर तत्काल रोक लगाने से इनकार कर दिया है। जस्टिस पीएस नरसिम्हा की अध्यक्षता वाली बेंच ने लोकसभा कार्यालय को नोटिस जारी किया है। सुप्रीम कोर्ट ने दो हफ्ते में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
शिवसेना उद्धव गुट की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि लोकसभा अध्यक्ष ने उसकी पार्टी के छह सांसदों को दूसरी प्रतिद्वंद्वी पार्टी में विलय को मान्यता दे दी है। ये एक संवैधानिक मसला है। लोकसभा अध्यक्ष ने 18 जुलाई को शनिवार की रात में इस विलय को मान्यता दी। छह सांसदों के विलय होने के बाद शिंदे गुट के पास सांसदों की संख्या 13 हो गई है। स्पीकर के इस फैसले की वजह से संसद में पार्टी के कामकाज में बाधा आ रही है।
