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प्रयागराज में रशीद जहाँ पर केंद्रित ‘एक इंक़लाबी आवाज़’ विचार गोष्ठी में उनके साहित्य, चिकित्सा, महिला शिक्षा और प्रगतिशील आंदोलन से जुड़े योगदान को याद किया गया। वक्ताओं ने उनकी विरासत को आज के समय में फिर पढ़ने की जरूरत बताई।

प्रयागराज में ‘प्रज्ञा प्रयाग उत्सव मेला’ शुरू हो गया है। शिल्प हाट में लगे करीब 60 स्टॉल पर विभिन्न राज्यों के हस्तशिल्प, पारंपरिक कलाकृतियां और व्यंजन उपलब्ध हैं।

श्रीनगर के IFFJK 2026 में बिहार फिल्म प्रोत्साहन नीति और शूटिंग लोकेशन चर्चा में हैं। बिहार पवेलियन में फिल्मकारों ने VFX स्टूडियो और फिल्म निर्माण की संभावनाओं में रुचि दिखाई।

प्रयागराज में ‘दंशः विस्थापन का’ नाटक ने भारत-पाकिस्तान विभाजन की त्रासदी, विस्थापन और मानवीय संवेदनाओं को मंच पर जीवंत किया। प्रशिक्षित कलाकारों की भावपूर्ण प्रस्तुति से दर्शक भावुक हो गए।

कला एवं संस्कृति विभाग, बिहार सरकार की त्रैमासिक पत्रिका ‘कला संवाद’ के तृतीय संस्करण का विमोचन मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार ने किया। अंक में बिहार की कला, लोक परंपरा और सांस्कृतिक विरासत को प्रमुखता दी गई है।

प्रयागराज में आयोजित बाल रंग उत्सव में बाल कलाकारों ने ‘युगधारा’ और ‘जामुन का पेड़’ के जरिए साहित्य, गंगा की पीड़ा और सरकारी लालफीताशाही जैसे गंभीर विषयों को प्रभावशाली ढंग से मंच पर प्रस्तुत किया।

मुंगेर के हवेली खड़गपुर में आयोजित ‘एक शाम मोहम्मद रफ़ी के नाम’ संगीतमय कार्यक्रम में बिहार और पश्चिम बंगाल के कलाकारों ने मोहम्मद रफ़ी, किशोर कुमार, मुकेश, लता मंगेशकर और अन्य महान गायकों के सदाबहार गीत प्रस्तुत किए।

पटना के प्रेमचंद रंगशाला में गुलमोहर मैत्री द्वारा प्रस्तुत राष्ट्रभक्ति पर आधारित नाट्य प्रस्तुति ‘Operation Sindoor – The Righteous Strategy’ का सफल मंचन हुआ।

प्रयागराज स्थित उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र (NCZCC) और नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (NSD) के संयुक्त तत्वावधान में 30 दिवसीय प्रस्तुतिपरक नाट्य कार्यशाला का शुभारंभ हुआ। देशभर से प्राप्त 156 आवेदनों में से 30 प्रतिभागियों का चयन किया गया है।

पटना के प्रेमचंद रंगशाला में मुंशी प्रेमचंद जयंती समारोह 2026 के अवसर पर उनकी कालजयी कहानी ‘कफ़न’ पर आधारित नाटक का प्रभावशाली मंचन किया गया। रंग गुरुकुल, पटना की प्रस्तुति का निर्देशन गुंजन कुमार ने किया। कार्यक्रम में कला एवं संस्कृति मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार ने प्रेमचंद के साहित्य को आज भी प्रासंगिक बताते हुए युवाओं से उनकी रचनाओं को पढ़ने का आह्वान किया। दर्शकों ने प्रस्तुति को खूब सराहा।