डोली प्रथा से लेकर जल-जंगल-जमीन और मजदूर-किसानों के सवालों तक लंबी लड़ाइयों का किया स्मरण
नवादा। बिहार के चर्चित जन आंदोलनों के पुरोधा कामरेड डॉ. विनयन की 79वीं जयंती के अवसर पर शुक्रवार, 11 सितंबर को डॉ. विनयन आश्रम, ग्राम नवादा में कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता जन मुक्ति आंदोलन के महासचिव हरी लाल प्रसाद सिंह ने की। इस दौरान डॉ. विनयन के चाहने वाले साथियों और आंदोलन से जुड़े कार्यकर्ताओं ने उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
कार्यक्रम की शुरुआत “डॉ. विनयन अमर रहें” के गगनभेदी नारों के साथ हुई। जन मुक्ति आंदोलन के विभिन्न गांवों से आए पुराने साथी, नौजवान और कार्यकर्ताओं ने कार्यक्रम में हिस्सा लिया।
वंचितों और शोषितों के सवालों को बनाया आंदोलन का आधार
कार्यक्रम में वक्ताओं ने डॉ. विनयन के जीवन और उनके लंबे आंदोलनकारी संघर्ष को याद किया। वर्ष 1947 में आगरा में जन्मे डॉ. विनयन डॉक्टरेट की पढ़ाई पूरी करने के बाद जेपी आंदोलन के दौरान बिहार आए थे। उन्होंने बिहार के सबसे वंचित इलाकों में से एक जहानाबाद को अपनी कर्मभूमि बनाया और यहीं से लंबे समय तक सामाजिक एवं जन आंदोलनों को नेतृत्व दिया।

डॉ. विनयन ने डोली प्रथा के खिलाफ आंदोलन चलाया। उन्होंने बोधगया के महंत के खिलाफ भी अभियान चलाकर संघर्ष किया। इसके अलावा जमींदारी प्रथा, शोषण और मजदूरों की समस्याओं को लेकर भी उन्होंने लंबी लड़ाइयां लड़ीं।
मजदूर-किसानों से लेकर जल, जंगल और जमीन तक संघर्ष
डॉ. विनयन ने विदेशी कंपनियों से जुड़े डंकल प्रस्ताव के खिलाफ भी आंदोलन किया। इसके साथ ही बाबरी मस्जिद विध्वंस के खिलाफ भी उन्होंने संघर्ष किया। दुर्गावती जलाशय परियोजना में कामगारों के समर्थन में भी उन्होंने आवाज उठाई।
मुख्य रूप से उन्होंने बिहार के शोषित और वंचित वर्गों के जमीनी मुद्दों को अपने आंदोलनों का आधार बनाया। कैमूर के पहाड़ी इलाकों में जल, जंगल और जमीन के सवाल पर भी उन्होंने लंबा संघर्ष किया।

वक्ताओं ने कहा कि मजदूर किसान संग्राम समिति से लेकर जन मुक्ति आंदोलन के निर्माण तक डॉ. विनयन की महत्वपूर्ण भूमिका रही। यही वजह है कि ग्रामीण इलाकों में आज भी उनके संघर्षों को याद किया जाता है और उनकी जयंती के अवसर पर बड़ी संख्या में लोग जुटते हैं।
आज भी जारी है डॉ. विनयन की विरासत
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि डॉ. विनयन द्वारा बनाए गए जन मुक्ति आंदोलन के माध्यम से आज भी भूमिहीनों के आवास के लिए पांच डिसमिल जमीन, मजदूरी, सामाजिक अत्याचार, शोषण और दमन जैसे मुद्दों को लेकर काम किया जा रहा है।

कार्यक्रम में जन मुक्ति आंदोलन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष संत प्रसाद, मार्क्सवादी सामाजिक चिंतक रामप्रवेश यादव, हरेंद्र मांझी, राजेंद्र मांझी, शिवजन्म पासवान, सुदामा शर्मा, रामप्रवेश जी सरपंच सहित सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया।
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