लखनऊ। सोशल मीडिया पर इन दिनों 80 और 90 के दशक का AI रेट्रो लुक ट्रेंड की होड़ मची है। फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप स्टेटस पर लोग अपनी तस्वीरें बदलकर शेयर कर बड़े आनंदित हो रहे हैं। यह ट्रेंड इंस्टाग्राम पर ‘Add Yours’ स्टिकर, वायरल चैलेंजेस और ChatGPT जैसे जनरेटिव AI टूल्स की आसान पहुंच के कारण जंगल की आग की तरह फैला है। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल, किरेन रिजिजू समेत खेल और बॉलीवुड जगत की कई प्रमुख हस्तियों ने भी अपनी रेट्रो तस्वीरें शेयर कर इसमें हिस्सा लिया है, जिससे आम जनता के बीच इसे जबरदस्त पब्लिसिटी मिली।
हालांकि, इस तरह के ‘फ्री ट्रेंड्स’ को लेकर साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों और अंतरराष्ट्रीय शोधकर्ताओं ने गंभीर चेतावनी दे रखी है। अनजाने में किसी भी थर्ड-पार्टी एआई टूल पर अपनी ओरिजिनल और हाई-रिजॉल्यूशन फोटो अपलोड करना आपकी डिजिटल निजता और बायोमेट्रिक सुरक्षा को सीधे जोखिम में डाल सकता है, जो आपकी जिंदगी के फाइनेंस और निजी जीवन से जुड़ी जानकारियों के लिए बड़ा खतरा है।
भारत में बढ़ता डिजिटल दायरा : AI रेट्रो लुक ट्रेंड क्यों बड़ा है यह खतरा?
भारत में स्मार्टफोन और सोशल मीडिया का दायरा जिस तेजी से बढ़ा है, उससे इस प्रकार के साइबर खतरों का असर करोड़ों लोगों पर पड़ सकता है। आंकड़ों के अनुसार, देश में लगभग 880 मिलियन (88 करोड़) से अधिक स्मार्टफोन उपभोक्ता हैं, यानी लगभग आधी आबादी स्मार्टफोन का इस्तेमाल कर रही है। सोशल मीडिया पर सक्रिय भारतीय यूज़र्स के आंकड़े इस खतरे की गंभीरता को दर्शाते हैं:
- Facebook यूज़र: 704 मिलियन (कुल जनसंख्या का 47.3%)
- Instagram यूज़र: 550 मिलियन (36.9%)
- Messenger यूज़र: 420 मिलियन (28.2%)
- LinkedIn यूज़र: 200 मिलियन (13.5%)
इसमें सबसे बड़ा हिस्सा 25 से 45 वर्ष आयु वर्ग का है, जो सोशल मीडिया और ऐसे ट्रेंड्स पर सबसे ज्यादा सक्रिय रहता है। इतनी बड़ी आबादी का AI रेट्रो लुक ट्रेंड की चपेट में आना डेटा सुरक्षा के लिहाज से बेहद चिंताजनक है।
बैकग्राउंड में कैसे काम करता है डेटा कलेक्शन का यह चक्र?
कानपुर के आईटी व डेटा साइंस एक्सपर्ट अवनीश त्रिपाठी ने ‘फ्रीलांसर पोस्ट’ से बातचीत में कैम्ब्रिज, एमआईटी (MIT) और ऑक्सफोर्ड जैसी यूनिवर्सिटीज के अध्ययनों का हवाला देते हुए इस पूरी प्रक्रिया को क्रमशः इस प्रकार समझाया :

- बायोमेट्रिक एक्सट्रैक्शन : हाई-रिजॉल्यूशन फोटो अपलोड होते ही एआई एल्गोरिदम चेहरे के ‘वेक्टर्स’ (Vector Points) निकाल लेते हैं। इसमें आंखों के बीच की दूरी, नाक और गालों की बनावट, और चेहरे के विशिष्ट निशान (जैसे तिल या टैटू) की मैपिंग शामिल है।
- 3D डिजिटल मॉडल और डीपफेक का खतरा : ऑक्सफोर्ड व एमआईटी लैब्स के अनुसार, जब एआई के पास अलग-अलग एंगल की तस्वीरें पहुंचती हैं, तो वह व्यक्ति का सटीक 3D मॉडल तैयार कर लेता है। इसका दुरुपयोग भविष्य में फेस-स्वैपिंग, डीपफेक वीडियो या फेशियल ऑथेंटिकेशन बायपास (वित्तीय स्पूफिंग) में हो सकता है।
- मुफ्त में एआई मॉडल ट्रेनिंग : कैम्ब्रिज रिसर्च के मुताबिक, टेक कंपनियां फेशियल रिकग्निशन सिस्टम सुधारने के लिए अरबों डॉलर खर्च करती हैं। ऐसे वायरल ट्रेंड्स के जरिए कंपनियां यूज़र्स से बिल्कुल मुफ्त में वेरिफाइड डेटा हासिल कर लेती हैं।
- मेटाडेटा और डिवाइस ट्रैकिंग : Kaspersky और Norton की रिपोर्ट्स के अनुसार, फोटो के साथ छुपा EXIF डेटा (लोकेशन, समय, कैमरा) और डिवाइस डिटेल्स (IP एड्रेस, फोन मॉडल, नेटवर्क) भी सर्वर पर सिंक हो जाते हैं।
- भविष्य की बनावट का अनुमान (Aging Prediction): जो टूल आपको 30-40 साल पुराना लुक दिखा रहा है, उसका एल्गोरिदम मशीन लर्निंग के ज़रिए यह भी रिकॉर्ड कर रहा है कि आप आने वाले 10-20 सालों में कैसे दिखेंगे।
विशेषज्ञ की चेतावनी: बायोमेट्रिक डेटा लीक होना क्यों घातक है?
गुड़गांव के साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट अंशुल बाजपेयी ने बताया कि बायोमेट्रिक डेटा की तुलना सामान्य पासवर्ड से नहीं हो सकती। पासवर्ड लीक होने पर उसे बदला जा सकता है, लेकिन अगर आपके चेहरे की फेशियल ज्योमेट्री (Face Geometry) किसी सर्वर या डार्क वेब पर लीक हो गई, तो उसे कभी रीसेट नहीं किया जा सकता।
बचाव के प्राथमिक उपाय
- प्राइवेसी पॉलिसी ज़रूर जांचें : फोटो अपलोड करने से पहले देखें कि ऐप आपके डेटा को मॉडल ट्रेनिंग के लिए रिटेन या शेयर तो नहीं कर रहा।
- अनजान लिंक्स और ऐप्स से दूरी बनाएं : सोशल मीडिया पर तैर रहे अनधिकृत लिंक्स या थर्ड-पार्टी ऐप्स का इस्तेमाल न करें।
- पहचान सुरक्षित रखें : महज कुछ लाइक्स के लिए किसी भी अज्ञात डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपनी ओरिजिनल हाई-क्वालिटी फोटो न दें।
एक अन्य टेक एक्सपर्ट नितेश गुप्ता ने भी फ्रीलांसर पोस्ट से बातचीत करते हुए लोगों से अपील करते हुए कहा है कि “किसी ट्रेंड का हिस्सा बनने से पहले आप डिजिटल दुनिया की ABCD अवश्य समझें, कहीं ऐसा न हो कि 80-90s के पुराने दौर में लौटने के चक्कर में आप अपने भविष्य को पूरी तरह दांव पर लगाने जा रहे हों”।
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