दिल्ली हाईकोर्ट ने पूछा- क्या दिल्ली में रहने जैसी कड़ी शर्तों के साथ जमानत दी जा सकती है? NIA ने जमानत का विरोध करते हुए गवाह को प्रभावित करने का आरोप लगाया
नई दिल्ली। टेरर फंडिंग मामले में जेल में बंद जम्मू-कश्मीर के बारामूला से लोकसभा सांसद इंजीनियर रशीद की नियमित जमानत याचिका पर बुधवार को दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। कोर्ट ने नेशनल इंवेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) से पूछा कि क्या इंजीनियर रशीद को कड़ी शर्तों के साथ जमानत दी जा सकती है, जिसमें उन्हें दिल्ली में ही रहने की शर्त भी शामिल हो। कोर्ट ने NIA के वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ लूथरा से इस संबंध में निर्देश लेकर आने को कहा। मामले की अगली सुनवाई 3 नवंबर 2026 को होगी।
मामले की सुनवाई जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस विकास महाजन की बेंच कर रही है। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि इंजीनियर रशीद की कश्मीर में स्थानीय प्रभाव को देखते हुए उनकी शारीरिक मौजूदगी वहां एक चिंता का विषय हो सकती है, लेकिन लंबे समय से हिरासत में रहने के पहलू को भी ध्यान में रखना होगा। रशीद करीब सात साल से जेल में हैं और मामले में बड़ी संख्या में गवाह हैं।
NIA ने जमानत का किया विरोध
NIA की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा ने इंजीनियर रशीद की जमानत का विरोध किया। उन्होंने कहा कि रशीद के खिलाफ पर्याप्त सामग्री मौजूद है और आरोप गंभीर हैं।
NIA की ओर से यह भी आरोप लगाया गया कि पहले जब इंजीनियर रशीद को जमानत मिली थी, तब उन्होंने एक गवाह को प्रभावित करने की कोशिश की थी। NIA के मुताबिक इस संबंध में कॉल डाटा रिकॉर्ड (CDR) महत्वपूर्ण हो सकता है। एजेंसी ने यह भी कहा कि मामले में दो गवाहों की गवाही महत्वपूर्ण है, जिनमें से एक संरक्षित गवाह है।
कोर्ट ने निर्देश दिया कि इन दोनों महत्वपूर्ण गवाहों के बयान अगली सुनवाई से पहले ट्रायल कोर्ट में दर्ज किए जाएं।
दिल्ली में रहने की शर्त पर जमानत का सवाल
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने NIA से यह स्पष्ट करने को कहा कि क्या इंजीनियर रशीद को ऐसी कड़ी शर्तों के साथ जमानत दी जा सकती है, जिसके तहत उन्हें दिल्ली में ही रहना होगा।
कोर्ट की ओर से यह संभावना इसलिए उठाई गई क्योंकि रशीद के कश्मीर में स्थानीय प्रभाव को लेकर NIA ने चिंता जताई है। अब NIA इस प्रस्ताव पर अपना पक्ष रखेगी और उसके बाद कोर्ट आगे की सुनवाई करेगा।
पहले भी मिली थी अंतरिम जमानत
इंजीनियर रशीद को इससे पहले अपने पिता के निधन के बाद अंतिम संस्कार और 40वें दिन की रस्म में शामिल होने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट से अंतरिम जमानत मिली थी।
उनके पिता की 18 मई 2026 को AIIMS, दिल्ली में मौत हुई थी। इसके बाद हाईकोर्ट ने उन्हें अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए अंतरिम जमानत दी थी। बाद में 40वें दिन की रस्म में शामिल होने के लिए उन्हें 25 जून से 30 जून तक दोबारा अंतरिम जमानत दी गई थी।
इसके अलावा उन्हें संसद के सत्र में हिस्सा लेने की अनुमति भी दी गई थी। इंजीनियर रशीद की नियमित जमानत से जुड़ा मामला अब हाईकोर्ट के सामने लंबित है।
2024 में उमर अब्दुल्ला को हराकर बने सांसद
इंजीनियर रशीद ने 2024 लोकसभा चुनाव में बारामूला सीट से जीत दर्ज की थी। उन्होंने नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को करीब 2.04 लाख वोटों के अंतर से हराया था।
NIA ने उन्हें 2019 में UAPA के तहत कथित टेरर फंडिंग मामले में गिरफ्तार किया था। वह तब से तिहाड़ जेल में हैं।
2022 में आरोप तय हुए थे
इस मामले में पटियाला हाउस कोर्ट ने 16 मार्च 2022 को इंजीनियर रशीद समेत कई आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया था। मामले में हाफिज सईद, सैयद सलाहुद्दीन, यासिन मलिक, शब्बीर शाह, मसरत आलम, जहूर अहमद वताली, बिट्टा कराटे और अन्य आरोपी भी शामिल हैं।
NIA का आरोप है कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के सहयोग से लश्कर-ए-तैयबा, हिजबुल मुजाहिद्दीन, JKLF और जैश-ए-मोहम्मद जैसे संगठनों से जुड़े नेटवर्क के जरिए जम्मू-कश्मीर में हिंसा और अशांति के लिए धन का इस्तेमाल किया गया।
एजेंसी के मुताबिक हवाला और अन्य चैनलों के जरिए धन पहुंचाया गया और इसका इस्तेमाल घाटी में अशांति फैलाने, सुरक्षा बलों पर हमले, स्कूलों को नुकसान पहुंचाने और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसी गतिविधियों में किया गया। ये NIA के आरोप हैं, जिनका अंतिम न्यायिक निर्धारण अभी होना बाकी है।
अब 3 नवंबर को होगी अगली सुनवाई
दिल्ली हाईकोर्ट ने फिलहाल इंजीनियर रशीद की नियमित जमानत पर कोई अंतिम फैसला नहीं दिया है। कोर्ट ने NIA से कड़ी शर्तों के साथ संभावित जमानत पर निर्देश लेने को कहा है और मामले की अगली सुनवाई 3 नवंबर 2026 को तय की है।
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