आधुनिक हृदय चिकित्सा में सटीकता, अत्याधुनिक तकनीक और वैश्विक विशेषज्ञता का उत्कृष्ट संगम बुधवार को एम्स पटना में देखने को मिला। संस्थान में आयोजित दो दिवसीय ‘एडवांस्ड टेक्नीक्स इन कोरोनरी बाइफरकेशन पीसीआई वर्कशॉप’ का शुभारंभ लाइव इमेज-गाइडेड एंजियोप्लास्टी, अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों के मार्गदर्शन और उच्चस्तरीय वैज्ञानिक चर्चाओं के साथ हुआ।
कार्यशाला का सबसे बड़ा आकर्षण एम्स पटना की कार्डियक कैथेटराइजेशन लैब से इमेज-गाइडेड परक्यूटेनियस कोरोनरी इंटरवेंशन (पीसीआई) का लाइव प्रदर्शन रहा। इस जटिल प्रक्रिया का सफल संचालन जापान के साइसेकाई उत्सुनोमिया हॉस्पिटल के कार्डियोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. केनिचिरो शिमोजी और एम्स पटना के कार्डियोलॉजी विभागाध्यक्ष एवं राष्ट्रीय कोर्स निदेशक डॉ. अनुपम भंभानी ने संयुक्त रूप से किया।
लाइव प्रक्रिया के दौरान विशेषज्ञों ने इंट्रावैस्कुलर अल्ट्रासाउंड (आईवीयूएस) की सहायता से स्टेंट प्रत्यारोपण की वैज्ञानिक योजना, उसकी सटीक स्थापना और उपचार के परिणामों के मूल्यांकन की आधुनिक तकनीकों का प्रदर्शन किया। उन्होंने बताया कि इंट्राकोरोनरी इमेजिंग जटिल कोरोनरी रोगों के उपचार को अधिक सुरक्षित, प्रभावी और सटीक बनाती है तथा प्रिसिजन पीसीआई की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
इसके बाद आयोजित इंटरैक्टिव पैनल चर्चा में वरिष्ठ इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. शमशाद, डॉ. आशीष झा और डॉ. विपिन कुमार ने कोरोनरी बाइफरकेशन घावों के उपचार की नवीनतम रणनीतियों, तकनीकी चुनौतियों और अपने व्यावहारिक अनुभव प्रतिभागियों के साथ साझा किए। वहीं, वरिष्ठ कार्डियोवैस्कुलर सर्जन डॉ. संजीव कुमार एवं डॉ. प्रगति कपूर ने वैज्ञानिक सत्रों की अध्यक्षता करते हुए अकादमिक विमर्श को नई ऊंचाई प्रदान की।
कार्यशाला का उद्घाटन एम्स पटना के कार्यकारी निदेशक ब्रिगेडियर प्रो. (डॉ.) राजू अग्रवाल ने किया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि डॉ. भानु दुग्गल, प्रोफेसर (कार्डियोलॉजी) एवं कुलपति, हेमवती नंदन बहुगुणा उत्तराखंड चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय, जापान से आए विशेषज्ञ डॉ. केनिचिरो शिमोजी, चिकित्सा अधीक्षक, डीनगण, कार्डियोलॉजिकल सोसायटी ऑफ इंडिया (सीएसआई) बिहार चैप्टर के अध्यक्ष डॉ. संजीव कुमार, संकाय सदस्य एवं बड़ी संख्या में चिकित्सक उपस्थित रहे।
प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए डॉ. अनुपम भंभानी ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित आधुनिक सिमुलेशन तकनीकें अब चिकित्सकों को वास्तविक मरीजों पर प्रक्रिया करने से पहले जटिल परिस्थितियों का सुरक्षित अभ्यास करने का अवसर प्रदान कर रही हैं। इससे चिकित्सकों की तकनीकी दक्षता बढ़ती है और मरीजों की सुरक्षा भी सुनिश्चित होती है।
अपने संबोधन में ब्रिगेडियर प्रो. (डॉ.) राजू अग्रवाल ने कहा कि आधुनिक हृदय चिकित्सा का भविष्य सटीक तकनीक, वैज्ञानिक सोच और निरंतर कौशल विकास पर आधारित है। उन्होंने युवा हृदय रोग विशेषज्ञों से नवीनतम इंटरवेंशनल तकनीकों में दक्षता हासिल कर मरीजों को विश्वस्तरीय, सुरक्षित और साक्ष्य-आधारित उपचार उपलब्ध कराने का आह्वान किया।
मुख्य अतिथि डॉ. भानु दुग्गल ने युवा कार्डियोलॉजिस्टों से चिकित्सा नैतिकता, मानवीय संवेदनशीलता और तकनीकी उत्कृष्टता के बीच संतुलन बनाए रखने की अपील की। उन्होंने एम्स पटना के कार्डियोलॉजी विभाग की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएं देश में हृदय रोग उपचार की गुणवत्ता को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
कार्यशाला के दूसरे दिन कोरोनरी बाइफरकेशन पीसीआई की उन्नत तकनीकों पर विशेषज्ञ व्याख्यानों के साथ व्यापक हैंड्स-ऑन सिमुलेशन प्रशिक्षण आयोजित किया जाएगा। इसमें युवा कार्डियोलॉजिस्ट अत्याधुनिक सिमुलेटरों पर विभिन्न जटिल क्लिनिकल परिस्थितियों में बाइफरकेशन स्टेंटिंग की आधुनिक तकनीकों का व्यावहारिक अभ्यास करेंगे, जिससे उनकी प्रक्रियात्मक दक्षता और चिकित्सकीय निर्णय क्षमता को और अधिक सुदृढ़ बनाया जा सकेगा।
