पटना में स्थापित होगी Agricultural Machinery Testing Laboratory; कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा बोले—खेती होगी आधुनिक, किसान होंगे समृद्ध
पटना, 27 अक्टूबर 2026। बिहार में कृषि यांत्रिकीकरण को बढ़ावा देने और किसानों को गुणवत्तापूर्ण कृषि यंत्र उपलब्ध कराने के उद्देश्य से पटना में अत्याधुनिक कृषि यंत्र परीक्षण प्रयोगशाला स्थापित की जाएगी। कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने इसकी जानकारी देते हुए कहा कि इस पहल से कृषि उपकरणों की गुणवत्ता, कार्यक्षमता और सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। इससे किसानों को मानक अनुरूप कृषि यंत्र उपलब्ध कराने और खेती की लागत कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया जाएगा।
कृषि मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में किसानों की समृद्धि और खुशहाली की अहम भूमिका है। इसी दृष्टिकोण के अनुरूप बिहार सरकार आधुनिक कृषि तकनीक और गुणवत्तापूर्ण कृषि उपकरणों को बढ़ावा दे रही है। उनका कहना है कि बेहतर कृषि यंत्रों से खेती की उत्पादकता बढ़ाने, किसानों की आय में वृद्धि करने और कृषि व्यवस्था को अधिक आत्मनिर्भर बनाने में मदद मिलेगी।
कृषि यंत्रों की गुणवत्ता और सुरक्षा की होगी जांच
प्रस्तावित कृषि यंत्र परीक्षण प्रयोगशाला में उपकरणों की गुणवत्ता, कार्यक्षमता, क्षमता और सुरक्षा का निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुसार परीक्षण किया जाएगा। इसका उद्देश्य किसानों तक टिकाऊ, सुरक्षित और मानक अनुरूप कृषि यंत्र पहुंचाना है, ताकि उन्हें उपकरणों की गुणवत्ता को लेकर अधिक भरोसा मिल सके।
कृषि मंत्री ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता ऐसी आधुनिक कृषि व्यवस्था तैयार करना है, जिसमें तकनीक का लाभ किसानों तक पहुंचे और खेती अधिक किफायती तथा उत्पादक बने।

SMAM योजना के तहत ऑनलाइन आवेदन की सुविधा
कृषि मंत्री के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2026-27 में सब मिशन ऑन एग्रीकल्चरल मैकेनाइजेशन (SMAM) योजना लागू की जा रही है। इसके तहत इच्छुक किसान और किसान समूह राज्य में कहीं से भी ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
योजना में कृषि यंत्रों की खरीद पर अनुदान देने के साथ कस्टम हायरिंग सेंटर, फार्म मशीनरी बैंक, फसल अवशेष प्रबंधन के लिए स्पेशल कस्टम हायरिंग सेंटर और किसान ड्रोन कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित करने के लिए आवेदन आमंत्रित किए जा रहे हैं।
विभाग की ओर से उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार, योजना के संबंधित घटकों के तहत अब तक क्रमशः 88,787 और 4,377 ऑनलाइन आवेदन प्राप्त हुए हैं। पात्र आवेदकों का चयन ऑनलाइन लॉटरी के माध्यम से किया जा रहा है, ताकि चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे।
कस्टम हायरिंग सेंटर पर 4 लाख रुपये तक अनुदान
कृषि मंत्री ने बताया कि योजना के तहत राज्य के सभी जिलों में 267 कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित किए जा रहे हैं। प्रत्येक केंद्र की परियोजना लागत 10 लाख रुपये निर्धारित है। इस पर 40 प्रतिशत अनुदान दिया जा रहा है, जिसकी अधिकतम सीमा 4 लाख रुपये है।
इन केंद्रों के माध्यम से किसान आवश्यकतानुसार कृषि यंत्र किराये पर लेकर इस्तेमाल कर सकेंगे। इससे उन किसानों को भी आधुनिक उपकरणों का लाभ मिल सकेगा, जो व्यक्तिगत रूप से महंगे कृषि यंत्र खरीदने में सक्षम नहीं हैं।
ग्राम स्तर पर कृषि यंत्र बैंक की स्थापना
योजना के तहत ग्राम स्तर पर 38 कृषि यंत्र बैंक स्थापित किए जा रहे हैं। प्रत्येक इकाई की परियोजना लागत 10 लाख रुपये है और इस पर 80 प्रतिशत अनुदान, अधिकतम 8 लाख रुपये तक की सहायता का प्रावधान बताया गया है।
कृषि यंत्र बैंक के माध्यम से गांवों में किसानों की कृषि उपकरणों तक पहुंच बढ़ाने और खेती के काम को आसान बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
फसल अवशेष प्रबंधन के लिए 200 विशेष केंद्र
फसल अवशेष जलाने की समस्या से प्रभावित जिलों में अवशेष प्रबंधन को बढ़ावा देने के लिए 200 स्पेशल कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित किए जा रहे हैं। इनके लिए परियोजना लागत का 80 प्रतिशत, अधिकतम 12 लाख रुपये तक अनुदान दिया जा रहा है।
इन केंद्रों के माध्यम से फसल अवशेषों के प्रबंधन में उपयोगी कृषि यंत्रों की उपलब्धता बढ़ाने और किसानों को वैकल्पिक उपाय अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने का प्रयास किया जा रहा है।
आधुनिक तकनीक से मजबूत होगी कृषि व्यवस्था
कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि कृषि यंत्र परीक्षण प्रयोगशाला की स्थापना और SMAM योजना के तहत संचालित गतिविधियां राज्य में कृषि यांत्रिकीकरण को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल हैं। गुणवत्तापूर्ण उपकरण, अनुदान और कृषि यंत्रों की बेहतर उपलब्धता से किसानों को खेती के काम में सुविधा मिल सकती है।
उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य आधुनिक कृषि तकनीक को किसानों की आर्थिक मजबूती, आत्मनिर्भरता और समृद्धि का आधार बनाना है। प्रस्तावित प्रयोगशाला इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगी।
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