पटना। बिहार में किसानों से जुड़ी सरकारी योजनाओं को अब सिर्फ अलग-अलग विभागों की जिम्मेदारी के तौर पर नहीं, बल्कि एक-दूसरे से जुड़ी व्यवस्था के रूप में आगे बढ़ाने की तैयारी है। किसान की पहचान, उसकी जमीन का रिकॉर्ड, सरकारी योजनाओं का लाभ और उसकी उपज की खरीद- इन सभी को आपस में जोड़ने की दिशा में Farmer Registry को अहम आधार बनाया जा रहा है।
राज्य में अब तक 53 लाख से अधिक किसानों की Farmer Registry तैयार होने की जानकारी दी गई है। अब शेष किसानों की Registry बनाने की प्रक्रिया तेज करने के साथ जमीन के Mutation और Farmer Registry को भी जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है।
15 सितंबर को कृषि, राजस्व एवं भूमि सुधार और सहकारिता विभाग की संयुक्त समन्वय बैठक में Farmer Registry, Farmer ID, न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी MSP आधारित खरीद, किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की प्रगति की समीक्षा की गई।
बैठक में कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा, राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री दिलीप कुमार जायसवाल और सहकारिता मंत्री राम कृपाल यादव के साथ विभागीय अधिकारी मौजूद रहे।
Farmer Registry को सिर्फ पहचान पत्र नहीं, योजनाओं की कड़ी बनाने की तैयारी
Farmer Registry का उद्देश्य किसान की पहचान, उसकी जमीन और कृषि से जुड़ी जानकारी को एक व्यवस्थित डिजिटल रिकॉर्ड से जोड़ना है।
इससे Farmer ID के माध्यम से किसान की पहचान करने और विभिन्न योजनाओं के लिए लाभार्थियों का लक्ष्य तय करने में सुविधा मिलने की उम्मीद है।
सरकार के मुताबिक, भविष्य में बीज, उर्वरक, कृषि यंत्र, फसल बीमा, आपदा सहायता और विभिन्न अनुदान योजनाओं के क्रियान्वयन में भी यह डिजिटल रिकॉर्ड उपयोगी हो सकता है।
कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा है कि उद्देश्य तकनीक को किसान की ताकत बनाना है, ताकि सही किसान तक सही योजना और सही समय पर सहायता पहुंचाने की व्यवस्था मजबूत हो।
53 लाख किसानों की Registry तैयार, अब बाकी पर जोर

बिहार में Farmer Registry बनाने का काम जारी है और अब तक 53 लाख से अधिक किसानों की Registry तैयार होने की जानकारी दी गई है।
अब चुनौती उन किसानों को इस व्यवस्था से जोड़ने की है, जिनकी Registry अभी तैयार नहीं हुई है। बैठक में शेष किसानों की Registry बनाने की प्रक्रिया में तेजी लाने पर जोर दिया गया।
यानी आने वाले समय में Farmer Registry का दायरा और बढ़ाने की कोशिश होगी, ताकि अधिक से अधिक किसान डिजिटल कृषि रिकॉर्ड से जुड़ सकें।
जमीन का Mutation होते ही Farmer Registry भी होगी अपडेट
इस पूरी व्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा भूमि रिकॉर्ड और Farmer Registry को आपस में जोड़ना है। राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री दिलीप कुमार जायसवाल ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि जिला और अंचल स्तर पर कृषि विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर Farmer Registry से जुड़े काम को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाए।
नई व्यवस्था के तहत जिस किसान के नाम जमीन का Mutation होगा, उसी प्रक्रिया के साथ उसकी Farmer Registry तैयार करने की व्यवस्था को प्रभावी बनाने पर जोर है।
अगर किसी किसान की पहले से Farmer ID या Farmer Registry बनी हुई है और बाद में उसके नाम नई जमीन का Mutation होता है, तो उस जमीन की जानकारी उसकी मौजूदा Registry में जोड़ने की व्यवस्था की जाएगी।
इसका मतलब यह है कि किसान की जमीन में बदलाव होने पर उसके डिजिटल कृषि रिकॉर्ड को भी अपडेट करने की कोशिश होगी।
अब किसान की उपज और MSP खरीद को जोड़ने की तैयारी
Farmer Registry का अगला महत्वपूर्ण इस्तेमाल फसल खरीद और MSP व्यवस्था में करने की तैयारी है।सहकारिता मंत्री राम कृपाल यादव ने कहा है कि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी MSP पर खरीद व्यवस्था को और प्रभावी और पारदर्शी बनाया जाएगा।
Farmer Registry में किसान की पहचान और कृषि संबंधी जानकारी व्यवस्थित होने से खरीद और भुगतान प्रक्रिया को सही लाभार्थी से जोड़ने में मदद मिल सकती है।
हालांकि यह ध्यान रखना जरूरी है कि Farmer Registry तैयार हो जाना अपने आप MSP पर हर किसान की उपज की खरीद की गारंटी नहीं है। इसके लिए खरीद केंद्र, फसल की पात्रता, खरीद व्यवस्था और भुगतान की अलग-अलग प्रक्रियाएं भी जरूरी होंगी।
PACS के जरिए खेत से बाजार तक जोड़ने की कोशिश
सहकारिता विभाग की भूमिका यहां महत्वपूर्ण हो जाती है। सरकार के अनुसार PACS और सहकारी संस्थाओं के माध्यम से किसानों की उपज के संग्रहण, खरीद और बाजार से जोड़ने की व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा।
अगर Farmer Registry में किसान की पहचान और भूमि संबंधी जानकारी व्यवस्थित रहती है, तो सहकारी संस्थाओं के जरिए होने वाली खरीद व्यवस्था को लाभार्थी से जोड़ने में सुविधा हो सकती है।
सहकारिता विभाग कृषि और अन्य संबंधित विभागों के साथ मिलकर इस व्यवस्था को मजबूत करने की बात कह रहा है।
KCC और फसल बीमा में भी काम आएगी Farmer Registry
Farmer Registry का इस्तेमाल सिर्फ फसल खरीद तक सीमित रखने की योजना नहीं है। बैठक में किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की भी समीक्षा की गई।
सरकार के अनुसार किसान की पहचान और भूमि संबंधी जानकारी व्यवस्थित होने से पात्र किसानों की पहचान में सुविधा मिल सकती है। फसल बीमा में कवरेज, फसल नुकसान के आकलन और मुआवजा प्रक्रिया को भी अधिक व्यवस्थित बनाने में डिजिटल रिकॉर्ड मददगार हो सकता है।
असली चुनौती अब Registry को जमीन पर लागू करने की
Farmer Registry तैयार करना पहला चरण है। इसका असली असर इस बात पर निर्भर करेगा कि इस डिजिटल रिकॉर्ड का इस्तेमाल जमीन पर किस तरह होता है।
किसान को बीज, खाद, कृषि यंत्र या अनुदान का लाभ समय पर मिले, MSP पर खरीद के दौरान उसकी पहचान और भुगतान सही तरीके से जुड़े, फसल बीमा में नुकसान का आकलन समय पर हो और जमीन के रिकॉर्ड में बदलाव Registry में भी दर्ज हो—इन व्यवस्थाओं के बीच समन्वय कितना प्रभावी रहता है, यही इसकी सफलता तय करेगा।
इसी वजह से कृषि, राजस्व एवं भूमि सुधार और सहकारिता विभाग के बीच समन्वय को इस पूरी व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।
किसान के लिए क्या बदलेगा?

अगर व्यवस्था अपेक्षित तरीके से लागू होती है, तो किसान के नजरिए से इसके कुछ संभावित फायदे हो सकते हैं-
- किसान की पहचान और जमीन का रिकॉर्ड एक डिजिटल व्यवस्था में जुड़ सकेगा।
- जमीन के Mutation के बाद Registry अपडेट करने में सुविधा हो सकती है।
- सरकारी कृषि योजनाओं के लाभार्थियों की पहचान आसान हो सकती है।
- MSP आधारित खरीद में किसान और भुगतान को जोड़ने में मदद मिल सकती है।
- KCC और अन्य किसान योजनाओं तक पहुंच आसान बनाने में मदद मिल सकती है।
- फसल बीमा और आपदा सहायता से जुड़े काम में डिजिटल रिकॉर्ड उपयोगी हो सकता है।
हालांकि इन लाभों का वास्तविक असर Registry की शुद्धता, जमीन के रिकॉर्ड के अपडेट और विभागों के बीच डेटा एवं कार्य-समन्वय पर निर्भर करेगा।
तीन विभाग, एक किसान-केंद्रित व्यवस्था
कृषि विभाग किसान और कृषि योजनाओं से जुड़ा है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के पास जमीन और Mutation से संबंधित महत्वपूर्ण भूमिका है, जबकि सहकारिता विभाग PACS, सहकारी संस्थाओं और कृषि उपज की खरीद व बाजार से जुड़ी व्यवस्था में भूमिका निभाता है।
इन तीनों व्यवस्थाओं को Farmer Registry और Farmer ID के माध्यम से बेहतर तरीके से जोड़ने की कोशिश हो रही है।
53 लाख से अधिक Registry तैयार होना इस प्रक्रिया का बड़ा चरण है, लेकिन असली परीक्षा अब बाकी किसानों को जोड़ने और तैयार Registry को MSP, भूमि रिकॉर्ड, KCC, फसल बीमा तथा अन्य योजनाओं से प्रभावी रूप से जोड़ने की होगी।
ये भी पढ़ें:-
“2027 चुनाव से पहले योगी का बड़ा दांव? चुनावी साल में सौगातों की बरसात”
