पटना। विष्णुपद कॉरिडोर को लेकर गया में बड़े विकास की तैयारी शुरू हो गई है। बिहार सरकार ने विष्णुपद मंदिर परिसर के समग्र विकास और सोन-फल्गु नदी जोड़ योजना समेत दो महत्वपूर्ण परियोजनाओं के लिए कुल ₹3,516.05 करोड़ की प्रशासनिक मंजूरी दी है। इसमें ₹2,520 करोड़ विष्णुपद मंदिर क्षेत्र के विकास पर खर्च किए जाएंगे, जबकि ₹996.05 करोड़ की राशि सोन-फल्गु नदी जोड़ योजना के लिए निर्धारित है। प्रस्तावित विकास में मंदिर परिसर के साथ पार्किंग, elevated path, पुल, घाट और श्रद्धालुओं के लिए कई सुविधाएं शामिल हैं।
इसमें विष्णुपद मंदिर परिसर के विकास के लिए ₹2,520 करोड़ और सोन-फल्गु नदी जोड़ योजना के लिए ₹996.05 करोड़ शामिल हैं। यह फैसला 15 सितंबर 2026 को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में लिया गया।
इस फैसले को सिर्फ मंदिर के सौंदर्यीकरण की योजना के तौर पर देखना तस्वीर का एक हिस्सा होगा। प्रस्तावित परियोजनाओं में श्रद्धालुओं की सुविधाओं, यातायात और घाटों के विकास के साथ जल संसाधन से जुड़ा बड़ा काम भी शामिल है।
₹2,520 करोड़ से बदलेगा विष्णुपद क्षेत्र का स्वरूप
विष्णुपद मंदिर परिसर के विकास पर ₹2,520 करोड़ खर्च किए जाने की योजना है। प्रस्तावित कामों में मंदिर परिसर का विकास, मल्टीलेवल कार पार्किंग, एलिवेटेड पथ, मनसरवा-मानपुर ब्रिज, रैंप, घाटों का विकास, डॉर्मिटरी और कैंटीन, पैदल यात्री पुल, प्रतिमा निर्माण, सीता कुंड क्षेत्र तथा सार्वजनिक और आंतरिक सुविधाओं का विकास शामिल है।
योजना का क्रियान्वयन बिहार राज्य पथ विकास निगम लिमिटेड (BSRDCL) के माध्यम से किया जाना है।
इसका सीधा असर गया आने वाले श्रद्धालुओं की आवाजाही, पार्किंग और मंदिर क्षेत्र में उपलब्ध सुविधाओं पर पड़ने की उम्मीद है। खासकर पितृपक्ष के दौरान गया में बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं, इसलिए यातायात और सार्वजनिक सुविधाओं का विस्तार इस परियोजना का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की तर्ज पर विकास, लेकिन गया का मॉडल अलग

सरकार ने विष्णुपद कॉरिडोर के विकास की तुलना काशी विश्वनाथ कॉरिडोर से की है। हालांकि प्रस्तावित सुविधाओं को देखें तो गया परियोजना का अपना अलग स्वरूप होगा। यहां मंदिर क्षेत्र के साथ घाट, सीता कुंड, पार्किंग, पुल और श्रद्धालुओं के लिए ठहरने जैसी सुविधाओं को एक बड़े क्षेत्रीय विकास मॉडल से जोड़ने की योजना है।
यानी फोकस केवल मंदिर परिसर के सौंदर्यीकरण पर नहीं, बल्कि मंदिर तक पहुंच, श्रद्धालुओं की आवाजाही और आसपास के क्षेत्र की सुविधाओं पर भी है।
दूसरी तरफ ₹996 करोड़ की सोन-फल्गु नदी जोड़ योजना
इसी पैकेज का दूसरा और कम चर्चित हिस्सा सोन-फल्गु नदी जोड़ योजना है। इस परियोजना के लिए ₹996.05 करोड़ की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई है। योजना के तहत इंद्रपुरी बैराज से लगभग 23 किलोमीटर अपस्ट्रीम में एक इनटेक वेल बनाने का प्रस्ताव है। वहां से सोन नदी का पानी उठाकर करीब 11 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन के जरिए उत्तर कोयल मुख्य नहर तक पहुंचाने की योजना है। प्रस्तावित पाइपलाइन उत्तर कोयल मुख्य नहर के करीब 32.77 किलोमीटर बिंदु तक जाएगी।
इसके बाद पानी उत्तर कोयल दायां मुख्य नहर के जरिए आगे प्रवाहित किया जाना प्रस्तावित है। यानी विष्णुपद कॉरिडोर जहां गया के धार्मिक पर्यटन और शहरी सुविधाओं से जुड़ा है, वहीं सोन-फल्गु परियोजना जल संसाधन के बुनियादी ढांचे से जुड़ी है।
पितृपक्ष से आगे पूरे साल के पर्यटन पर नजर
गया की धार्मिक पहचान सिर्फ विष्णुपद मंदिर तक सीमित नहीं है। पिंडदान, तर्पण और पितृपक्ष जैसे अनुष्ठानों के लिए यहां देश-विदेश से श्रद्धालु आते हैं।
ऐसे में मंदिर क्षेत्र की पार्किंग, पैदल मार्ग, घाट, पुल, ठहरने और दूसरी सार्वजनिक सुविधाओं का विस्तार केवल किसी एक आयोजन के लिए नहीं, बल्कि पूरे साल आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के अनुभव को प्रभावित कर सकता है।
सरकार का लक्ष्य गया को बड़े धार्मिक और आध्यात्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने का है। कैबिनेट के फैसले में भी परियोजना को गया की धार्मिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं से जोड़कर देखा गया है।
असली चुनौती अब मंजूरी से जमीन पर काम शुरू करने की

₹3,516.05 करोड़ की प्रशासनिक स्वीकृति परियोजनाओं की दिशा में बड़ा कदम है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि पूरा विकास कार्य हो चुका है। अब आगे डिजाइन, विस्तृत परियोजना प्रक्रिया, निविदा, निर्माण और समयबद्ध क्रियान्वयन जैसे चरण महत्वपूर्ण होंगे।
विशेष रूप से विष्णुपद जैसे ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल पर निर्माण के दौरान श्रद्धालुओं की आवाजाही, स्थानीय कारोबार, यातायात और विरासत से जुड़े पहलुओं का संतुलन भी महत्वपूर्ण रहेगा। इसी तरह सोन-फल्गु नदी जोड़ योजना की वास्तविक उपयोगिता उसके निर्माण, जल उपलब्धता और संचालन की प्रभावशीलता पर निर्भर करेगी।
गया के लिए एक साथ पर्यटन और जल संसाधन का बड़ा निवेश
इस पूरे फैसले की खास बात यही है कि ₹3,516.05 करोड़ का पैकेज गया के दो अलग-अलग लेकिन महत्वपूर्ण पक्षों को छूता है।
एक तरफ विष्णुपद मंदिर क्षेत्र को आधुनिक सुविधाओं से जोड़ने की योजना है। दूसरी तरफ सोन नदी के पानी को प्रस्तावित प्रणाली के जरिए आगे ले जाने की योजना है।
यानी एक परियोजना गया की धार्मिक-पर्यटन अर्थव्यवस्था और शहरी सुविधाओं पर असर डाल सकती है, जबकि दूसरी जल संसाधन के बुनियादी ढांचे से जुड़ी है।
अब नजर इस बात पर रहेगी कि प्रशासनिक मंजूरी के बाद दोनों परियोजनाएं जमीन पर किस गति से आगे बढ़ती हैं और इनका वास्तविक लाभ गया के श्रद्धालुओं, पर्यटकों और स्थानीय आबादी तक कितनी जल्दी पहुंचता है।
ये भी पढ़ें:-
“2027 चुनाव से पहले योगी का बड़ा दांव? चुनावी साल में सौगातों की बरसात”
