मधुबनी। जन सुराज के सूत्रधार एवं बांकीपुर से विधायक प्रशांत किशोर शनिवार को रौशन यादव कस्टोडियल डेथ मामले में उसके परिजनों के साथ SSP से मुलाकात की। उन्होंने परिजनों से घटना की जानकारी ली। साथ ही, परिजनों के साथ जिले के एसएसपी योगेंद्र कुमार से मुलाकात की।
इस दौरान प्रशांत किशोर ने कहा कि घटना के दो पहलू हैं। पीड़ित परिवार का कहना है कि 27 मई को रहिका थाना क्षेत्र की पुलिस ने बच्चे को उठाया था, जबकि रहिका थाना उसका क्षेत्र भी नहीं है और तीन दिन तक उसे थाने में रखा गया। परिवार को इसकी कोई लिखित सूचना नहीं दी गई।
परिवार की भागदौड़ के बाद 30 मई को बच्चे से रहिका थाना में मुलाकात कराई गई। जब परिजन अपने बच्चे से रहिका थाना में मिले तो उसने बताया कि थाने में उसके साथ बहुत मारपीट की गई और उसके शरीर पर करंट लगाया गया। उसे टॉर्चर किया गया।
इसके बाद 31 मई की सुबह पुलिस ने बच्चे को छोड़ दिया, लेकिन आधे घंटे बाद ही उसे फिर से गिरफ्तार कर लिया गया। इसके बाद उसे कोर्ट में पेश किया गया और उस पर आर्म्स एक्ट लगाकर मंडल कारा जेल में रखा गया। परिजनों का यह कहना है कि पहले रहिका थाना में और बाद में मंडल कारा जेल में भी उसके साथ मारपीट की गई, जिसकी वजह से बच्चे की जान चली गई।
पुलिस-प्रशासन का कहना है आत्महत्या हुई, परिजन बोले- मारपीट से गई जान: PK
पीके ने कहा कि पुलिस का कहना है कि कहीं गोली चली थी और इसी आर्म्स एक्ट में रौशन यादव को गिरफ्तार किया गया। बाद में दो महीने 10 दिन के बाद उसकी कस्टोडियल डेथ हो गई।
एसएसपी ने इस पर दो बातें कही हैं। पहली बात, बच्चे की जो डेथ हुई है, उसकी NHRC की गाइडलाइन के हिसाब से जांच डीएम के मातहत होनी है। NHRC को इसकी रिपोर्ट जानी है। पोस्टमार्टम की रिपोर्ट भी दो-तीन दिन में आ जाएगी।

पीके ने कहा कि पुलिस और प्रशासन का कहना है कि बच्चे ने आत्महत्या की है, लेकिन परिवार का कहना है कि मारपीट की वजह से बच्चे की जान गई है। एक जांच जिला प्रशासन को करनी है, जिसमें NHRC इन्वॉल्व है। पोस्टमार्टम की रिपोर्ट आने के बाद पता चलेगा कि बच्चे ने आत्महत्या की है या मारपीट की वजह से उसकी जान गई है।
10 दिन में जिम्मेदार अधिकारियों पर होगी कार्रवाई: PK
पीके ने कहा कि इससे बड़ा पहलू यह है कि 27 मई को रहिका थाना की पुलिस ने बच्चे को गिरफ्तार किया था। उसकी सारी जवाबदेही जिला पुलिस की है।
एसएसपी ने कहा है कि 10 दिन में यह जांच की जाएगी कि 27 मई को बच्चे को क्यों गिरफ्तार किया गया था। अगर गिरफ्तार किया था तो परिवार को लिखित में सूचना क्यों नहीं दी गई? रहिका थाना में बिना कोर्ट में पेश किए उसे क्यों रखा गया? उसके साथ मारपीट की गई, उसे टॉर्चर किया गया। इन सभी बातों की जांच करके 10 दिनों में सख्त से सख्त कार्रवाई होगी।
पीके ने कहा कि अगर कार्रवाई नहीं होती है तो 10 दिन के बाद वह एसएसपी से मिलने फिर आएंगे। अभी एसएसपी ने सबके सामने आश्वस्त किया है कि 25 अगस्त तक जिन अधिकारियों की गलती होगी, उनकी जवाबदेही तय होगी और उन पर कार्रवाई होगी।
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