राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के 30वें स्थापना दिवस के मौके पर जनता दल (यूनाइटेड) ने विपक्षी दल पर तीखा राजनीतिक हमला बोला है। जेडीयू के प्रदेश प्रवक्ता डॉ. निहोरा प्रसाद यादव ने कहा कि इस बार आरजेडी का स्थापना दिवस कार्यकर्ताओं के लिए उत्सव नहीं, बल्कि निराशा का प्रतीक बनकर रह गया।
उन्होंने कहा कि जिस दिन पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव, पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव को कार्यकर्ताओं के बीच मौजूद रहकर संगठन को मजबूत करने का संदेश देना चाहिए था, उसी दिन पार्टी का पूरा शीर्ष नेतृत्व कार्यकर्ताओं से दूर रहा। उनके अनुसार, इससे बड़ा दुर्भाग्य और क्या हो सकता है कि स्थापना दिवस जैसे महत्वपूर्ण अवसर पर भी नेतृत्व मैदान में उतरने के बजाय दूर से राजनीतिक संदेश देने तक सीमित रहा।
‘दिल्ली से वर्चुअल संदेश देकर आकाश से लालटेन जला रहे थे तेजस्वी’
तेजस्वी यादव पर तंज कसते हुए डॉ. निहोरा ने कहा कि दिल्ली से वर्चुअल संदेश देकर वह “आकाश से लालटेन जलाने” का प्रयास कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जो नेता अपनी ही पार्टी के सबसे अहम दिन कार्यकर्ताओं के बीच मौजूद नहीं हो सकता, वह बिहार की जनता के संघर्ष में कितना साथ देगा, इसका अंदाजा सहज लगाया जा सकता है।
‘आरजेडी को विपक्ष ने नहीं, दरबार की राजनीति ने कमजोर किया’
जेडीयू प्रवक्ता ने कहा कि तेजस्वी यादव ने स्वयं स्वीकार किया है कि आरजेडी को अंदर और बाहर के लोगों ने कमजोर किया है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर वे “अंदर के लोग” कौन हैं? उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार की जनता जानती है कि आरजेडी को सबसे ज्यादा नुकसान विपक्ष ने नहीं, बल्कि पार्टी के भीतर की दरबारी राजनीति ने पहुंचाया। उनके अनुसार, चहेतों को वरिष्ठ नेताओं से ऊपर रखा गया, अनुभवी नेताओं की लगातार उपेक्षा हुई और व्यक्तिगत स्वार्थ संगठन से बड़ा बन गया।

‘नेतृत्व संकट और गुटबाजी से जूझ रही है RJD’
डॉ. निहोरा प्रसाद यादव ने कहा कि यही राजनीतिक संस्कृति कभी जनता दल के विभाजन का कारण बनी थी और आज वही मानसिकता आरजेडी को भी अंतर्कलह की ओर ले जा रही है। उन्होंने दावा किया कि वर्षों तक संगठन चलाने वाले करीबी लोग ही आज पार्टी की कमजोरी का सबसे बड़ा कारण बन गए हैं।
उन्होंने कहा कि आरजेडी इस समय वैचारिक संकट से अधिक नेतृत्व संकट का सामना कर रही है। संगठन कमजोर पड़ रहा है, कार्यकर्ताओं का मनोबल टूट रहा है और शीर्ष नेतृत्व जिम्मेदारी लेने के बजाय बहाने तलाश रहा है। उनका कहना था कि केवल भाषणों और आरोपों से राजनीतिक लड़ाई नहीं जीती जाती, बल्कि उसके लिए मजबूत संगठन, निरंतर संवाद और समर्पण की आवश्यकता होती है।
’25 से 5 सीटों पर आने में देर नहीं लगेगी’
अपने बयान के अंत में जेडीयू प्रवक्ता ने तेजस्वी यादव को नसीहत देते हुए कहा कि यदि उन्होंने पार्टी के भीतर बढ़ रही गुटबाजी, चहेतावाद और वरिष्ठ नेताओं की उपेक्षा पर समय रहते नियंत्रण नहीं किया, तो आरजेडी की राजनीतिक स्थिति और कमजोर होगी। उन्होंने दावा किया कि ऐसी स्थिति में पार्टी की विधानसभा सीटें मौजूदा 25 से घटकर 5 तक पहुंचने में देर नहीं लगेगी।
