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Home»Just In»बार-बार रुक कर फिर क्यों शुरू हो जाती है अमेरिका और ईरान की जंग?
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बार-बार रुक कर फिर क्यों शुरू हो जाती है अमेरिका और ईरान की जंग?

Yogesh ChakaravartiBy Yogesh ChakaravartiJuly 10, 2026No Comments4 Mins Read21 Views
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होर्मुज़ जलडमरूमध्य की पृष्ठभूमि में अमेरिका और ईरान के राष्ट्रीय ध्वज, सैन्य विमान, मिसाइलें और युद्ध का प्रतीकात्मक दृश्य।
अमेरिका-ईरान जंग बार-बार क्यों शुरू हो जाती है? होर्मुज़, ट्रंप और टकराव की पूरी कहानी
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अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर जंग शुरू हो गई है. गुरुवार को अमेरिका ने एक बार फिर ईरान पर ताबड़तोड़ हमले किए, इसके बाद ईरान ने कतर, कुवैत और बहरीन में अमेरिका के ठिकानों पर निशाना साधा। अमेरिकी सेना का कहना है कि उन्होंने लगातार दूसरी रात ईरान के 90 ठिकानों को निशाना बनाया यानी दो रात में 170 ठिकानों पर हमले किए गए. अमेरिका का कहना है कि हम लोगों का मकसद होमुर्ज स्ट्रेट में निर्दोष नाविकों पर ईरान के अटैक को कमजोर करना है. ताज़ा हमले के बाद एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं कि आखिर यह अमेरिका और ईरान की जंग थम क्यों नहीं रही है? बार-बार सुलह की कोशिश नाकाम क्यों हो रही हैं? और बार-बार सुलह होती दिखने के बाद भी जंग दोबारा शुरू क्यों हो जाती है?

ट्रंप का रुख क्यों बदल जाता है?

जानकार मानते हैं कि अमेरिका और ईरान के बीच सुलह ना हो पाने के पीछे अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के रुख में लगातार होता बदलाव एक प्रमुख वजह रहा है. कुछ दिनों पहले तक ऐसी उम्मीद बंधी की बातचीत आगे बढ़ रही है और अगर वह सफल होती है तो जंग रुक जाएगी. कई बार ऐसा लगा कि अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध रोकने को लेकर सहमति बन जाएगी और युद्ध विराम लंबे समय तक टिकेगा. लेकिन ऐसा नहीं हुआ. ऐसी खबरें हैं कि युद्ध विराम बढ़ाने को लेकर जो 14 सूत्री समझौता हुआ था उसे लेकर रिपब्लिक पार्टी के कुछ नेताओं ने सवाल उठाया. उनका कहना था कि इस समझौते से अमेरिका को क्या मिला औक साथ ही साथ ईरान पर क्या विश्वास किया जा सकता है? ट्रंप के रूख में बदलाव की एक प्रमुख वजह ये सवाल हो सकते हैं.अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का कहना है कि मैं ईरान के वार्ताकारों से कोई बातचीत नहीं चाहता वह घटिया लोग हैं, मानसिक रूप से बीमार हैं. उनके साथ बात करना वक्त की बर्बादी है. वो सच नहीं बोलते हैं

क्या था समझौता?

पिछले महीने जून में अमेरिका और ईरान के बीच एक समझौता हुआ था. इस समझौते में प्रमुख रूप से युद्ध विराम और होमुर्ज पर ईरान द्वारा लगाया गया प्रतिबंधों को हटाना और अमेरिकी नौ सैनिक की नाकेबंदी का अंत करना था. इसके तहत 22 जून को अमेरिका ने ईरान को 60 दिनों की छूट दी थी. लेकिन 7 जुलाई को उसने फिर ईरान पर प्रतिबंध लगा दिए हैं. अब ताज़ा हमले के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा है कि ईरान के साथ हुए इस सीजफायर समझौते का कोई मतलब नहीं रह गया है.

होर्मुज़ जलडमरूमध्य की पृष्ठभूमि में अमेरिका और ईरान के राष्ट्रीय ध्वज, सैन्य विमान, मिसाइलें और युद्ध का प्रतीकात्मक दृश्य।

कब खत्म होगी होमुर्ज पर वर्चास्व की जंग?

जानकार मानते हैं कि होमुर्ज जलडमरूमध्य पर वर्चस्व की जंग इतनी जल्दी इतनी आसानी से खत्म होने वाली नहीं है. क्योंकि ईरान चाहता है कि इस रणनीतिक समुद्री रास्ते से आने-जाने वाले सभी जहाज उसके बनाए नियमों और रूट का पालन करें. ईरान यहां पर एकाधिकार चाहता है जबकि अमेरिका इसे वैश्विक व्यापार के लिए खतरनाक मानता है. हाल ही में जब ईरान ने हो होमुर्ज में तीन जहाजों पर हमले किए तो अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने युद्ध विराम को समाप्त घोषित कर दिया.

जून 2026 में दोनों पक्षों के बीच जो शांति समझौता हुआ, उसे अमेरिका और ईरान ने अपने-अपने हिसाब से देखना शुरू कर दिया. इस वजह से बात बिगड़ गई. जानकार मानते हैं कि दोनों देशों की मांगे इतनी विरोधी हैं कि किसी एक बिंदु पर सहमति बनना एकदम से असंभव नजर आ रहा है. जैसे- अमेरिका ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर कठोर है वह चाहता है कि ईरान जीरो एनरिचमेंट की पॉलिसी का पालन करें और अपने बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम को सीमित करे. वहीं ईरान का कहना है कि अमेरिका इजरायली हमले के खिलाफ पक्की सुरक्षा गारंटी दे साथ ही आर्थिक प्रतिबंध हटाए और युद्ध में हुए नुकसान का हर्जाना दे यही वजह है कि किसी एक बिंदु पर सहमति दोनों देशों में नहीं बन पा रही है.

इसके अलावा जानकार मानते हैं कि क्षेत्रीय गुटबाजी और इजराइल लेबनान का मोर्चा भी दोनों के बीच सहमति न बन पाने की एक बड़ी वजह है. ईरान किसी भी स्थाई शांति समझौते के लिए लेबनान से इजरायली सेवा की पूर्ण वापसी की मांग कर रहा है. जबकि ईरान और अमेरिका मिलकर लेबनान पर हमले जारी रखे हुए हैं. यही वजह है की सुलह नहीं हो पा रही है. इस तरह से जब तक इन पहलुओं पर दोनों देशों के बीच सहमति नहीं बनेगी तब तक जंग होती रहेगी.

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Freelancerpost editor yogesh chakarvarti
Yogesh Chakaravarti
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मैं पढ़ाई के दौरान ही अखबारों में लिखने लगा था। मास कम्युनिकेशन का कोर्स करने के दौरान हमारी दिलचस्पी पढ़ाई से ज्यादा रिपोर्टिंग करने में होती थी। पिछले 22 सालों में प्रतिष्ठित अखबार जनसत्ता समेत देश के कई राष्ट्रीय न्यूज चैनलों में जिम्मेदार पदों पर काम किया। डेस्क के साथ-साथ रिपोर्टिंग और चैनल के ऑपरेशन का गुर बारीकी से सिखा। पिछले कुछ सालों से डिजिटल और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सक्रिय रहा हूं। फिलहाल Freelancerpost.com की जिम्मेदारी संभाल रहा हूं।

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