एक समय था जब दादी की गोद और आंगन कहानियों की सबसे बड़ी पाठशाला हुआ करते थे। आज वही कहानियां मोबाइल स्क्रीन, पॉडकास्ट और डिजिटल प्लेटफॉर्म तक पहुंच गई हैं। माध्यम बदला है, लेकिन कहानी सुनने-सुनाने की इंसानी जरूरत आज भी कायम है।
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