हंगर स्ट्राइक पर बैठे सोनम वांगचुक को पुलिस द्वारा जबरन अस्पताल ले जाए जाने के बाद दिल्ली का सियासी पारा एक बार फिर गर्मा गया है. पेपर लीक मामले की जांच और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर पिछले 21 दिन से दिल्ली के जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल पर बैठे थे. वांगचुक को ले जाए जाने के बाद कॉकरोच जनता पार्टी के फाउंडर अभिजीत दीपके भूख हड़ताल पर बैठ गए. आइए समझने की कोशिश करते हैं कि सोनम वांगचुक के आमरण अनशन से देश में क्या बदल जाएगा और सरकार क्यों उन्हें तवज्जो देने के मूड में नजर नहीं आ रही है.
दरअसल तमाम जानकार मानते हैं कि सोनम वांगचुक अरविंद केजरीवाल की तरह बुलबुले साबित हो सकते हैं. आलोचकों के एक वर्ग का ऐसा भी मानना है कि संभव है उनके पीछे देश विरोधी ताकतें काम कर रही हों. जो नेपाल की तरह भारत में भी जेन जी को आंदोलन और सत्ता परिवर्तन के लिए भड़काया जा रहा हो. सोनम वांगचुक के आलोचक तो यहां तक कहते हैं कि उन्हें अगर कुछ करना ही है तो लद्दाख की बेहतरी के लिए और काम करें. शिक्षा मंत्री का इस्तीफा मांगने का काम तो विपक्ष का है. जबकि सोनम वांगचुक का कहना है कि यह लड़ाई किसी सत्ता परिवर्तन की नहीं है. यह देश के करोड़ों युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने और एजुकेशन सिस्टम में जवाबदेही तय करने की है.
बहुत से जानकारों का ये भी मानना है कि सोनम वांगचुक एक अच्छे इनोवेटर है, वो इस रूप में देश की बहुत सेवा कर सकते हैं. उन्हें बेवजह सरकार से टकराव मोल लेने की बजाए अपने हुनर से नए नए इनोवेशन कर के आम लोगों की जिंदगी की बेहतरी का काम करना चाहिए. और इस्तीफा मांगने का काम छोड़ देना चाहिए. क्योंकि इससे मैसेज ये जा रहा है कि सोनम वांगचुक अरविंद केजरीवाल की तरह अपनी सियासी जमीन तैयार कर रहे हैं या फिर वो किसी के मोहरे की तरह काम कर रहे हैं.

सरकार क्यों है अलर्ट?
पर्यावरण कार्यकर्ता और शिक्षाविद सोनम वांगचुक के अनशन सबकि नजर इसलिए भी है क्योंकि वो हाल ही में रिहा हुए थे. उन्हें लेह में हिंसक प्रदर्शनों के बाद गिरफ्तार किया गया था. इस हिंसक आंदोलन में 4 लोगों की मौत हो गई थी और 50 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे. ऐसे केंद्र सरकार दिल्ली में ऐसी कोई हिंसा नहीं चाहेगी. इसके अलावा सोनम वांगचुक जिस कॉकरोच जनता पार्टी के मंच से आमरण अनशन कर रहे थे, उस पार्टी पर तो सरकार की तिरछी नजर पहले से ही है. ऐसे में सोनम वांगचुक का इस मंच से आमरण अनशन करना निश्चित रूप सरकार को स्वीकार्य नहीं होगा.
किसने किया वांगचुक का समर्थन?
सोनम वांगचुक के आमरण अनशन का तमाम दिग्गजों ने समर्थन भी किया है. चर्चित अभिनेता प्रकाश राज, कांग्रेस नेता पवन खेड़ा, आम आदमी पार्टी नेता अरविंद केजरीवाल, अन्ना हजारे, डिंपल यादव, पंजाबी सिंगर काका, स्वरा भास्कर, अभिनेत्री जीनत अमान, सोनाक्षी सिन्हा समेत तमाम हस्तियों ने उनका समर्थन किया है. राहुल गांधी ने एक्स पर लिखा कि वांगचुक को जंतर-मंतर से हटाया जाना गलत है. हम लोगों को इन मुद्दों को उठाने से कोई ताकत नहीं रोक सकती.

कैसे चर्चा में आए थे वांगचुक?
सोनम वांगचुक सबसे पहले साल 2009 में बनी आमिर खान की फिल्म थ्री इडीयट्स से चर्चा में आए थे. उस वक्त ऐसा कहा गया कि फिल्म में फुनसुख वांगड़ू का किरदार उनसे प्रेरित था. इसके बाद वो लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग को लेकर भी आंदोलन कर चुके हैं. उन्हें शिक्षा में लाने वाला सुधारक कहा जाता है. साल 2018 में उन्हें रैमन मैग्सेसे अवॉर्ड भी मिल चुका है. उन्होंने लद्दाख में स्टूडेंट्स एजुकेशनल एंड कल्चरल मूवमेंट ऑफ लद्दाख की शुरुआत की. उन्होंने नई तकनीक विकसित करने का काम किया. इसमें आइस स्तूप सबसे अहम रहा. उन्होंने गणित जैसा विषय लद्दाखी भाषा में पढ़ाने की मुहिम शुरू की थी. उन्होंने सर्दियों में बेकार बह जाने वाले पानी एक जुटाकर कृत्रिम ग्लेशियर बनाए. टाइम मैगजीन ने 2025 की सूची में शामिल किया था.
वांगचुक पर आमिर खान की सफाई
इस बीच सोनम वांगचुक पर आमिर खान की दी गई सफाई पर खूब चर्चा हो रही है. दरअसल आमिर खान ने सोनम वांगचुक की सेहत पर चिंता जताते हुए कहा कि उनकी फिल्म थ्री इडीयट्स सोनम वांगचुक पर नहीं बनी है, ये एक गलत धारणा है. फिल्म बनाते वक्त वो उन्हें जानते तक नहीं थे. वहीं सोनम वांगचुक का एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें उन्होंने ये दावा किया कि साल 2008 में आमिर से मिले थे.
