नई दिल्ली। अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में श्रद्धालुओं से प्राप्त राम मंदिर दान की कथित हेराफेरी/चोरी के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को जांच में तेजी लाने का निर्देश दिया। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने विशेष जांच दल (SIT) को जांच जल्द पूरी कर उसे तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाने को कहा है। कोर्ट ने SIT से अब तक की जांच की प्रगति रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में दाखिल करने का निर्देश भी दिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने जांच की गुणवत्ता और पारदर्शिता पर दिया जोर
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जांच की गुणवत्ता और पारदर्शिता बेहतर बनाने के लिए याचिकाकर्ताओं और अन्य जनहित से जुड़े लोगों की ओर से दिए गए सुझावों पर निष्पक्ष रूप से विचार किया जाए। कोर्ट का जोर इस बात पर रहा कि जांच प्रभावी तरीके से हो और किसी तरह की कमी न रह जाए।
कोर्ट द्वारा SIT की रिपोर्ट देखने के बाद दान के प्रबंधन और उससे जुड़े सिस्टम में पारदर्शिता एवं जवाबदेही बढ़ाने के लिए आगे आवश्यक निर्देश दिए जाने की संभावना है।
जुलाई में नई SIT के गठन का निर्देश
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने जुलाई में जांच को अधिक प्रभावी और निष्पक्ष बनाने की दिशा में कदम उठाए थे। 27 जुलाई की सुनवाई में उत्तर प्रदेश सरकार ने कोर्ट को बताया था कि कथित दान हेराफेरी की जांच के लिए चार सदस्यीय SIT गठित की गई है, जिसकी अध्यक्षता IG स्तर के अधिकारी किरण एस कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने जांच में फोरेंसिक ऑडिटर को भी शामिल करने का निर्देश दिया था।
कोर्ट ने उस समय भी जांच को तेज, गुणवत्तापूर्ण और निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ाने पर जोर दिया था तथा SIT से स्टेटस रिपोर्ट मांगी थी।
दान में पारदर्शिता की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं
इस मामले में दाखिल याचिकाओं में मंदिर को प्राप्त दान और ट्रस्ट की वित्तीय व्यवस्था में अधिक पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की गई है। याचिकाकर्ताओं की ओर से दान का ऑडिट कराने और प्राप्त राशि के उपयोग एवं वितरण से जुड़ी जानकारी को अधिक पारदर्शी बनाने की मांग भी उठाई गई है।

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि श्रीराम जन्मभूमि मंदिर से करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था जुड़ी हुई है, इसलिए दान के प्रबंधन में पारदर्शिता और जवाबदेही बेहद महत्वपूर्ण है।
मामले की जांच में अब तक क्या हुआ?
दान की कथित चोरी और हेराफेरी के आरोप सामने आने के बाद मामले में FIR दर्ज की गई थी और पुलिस ने कई लोगों को गिरफ्तार किया था। इसके बाद जांच की निष्पक्षता और प्रभावशीलता को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दाखिल हुईं। अदालत ने जांच को तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाने और इसकी गुणवत्ता सुनिश्चित करने पर लगातार जोर दिया है।
जुलाई में सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया था कि मामले को राजनीतिक रूप न दिया जाए और जांच को निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ने दिया जाए।
अब SIT की रिपोर्ट पर टिकी नजर
अब सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद SIT को जांच की प्रगति की रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में दाखिल करनी है। इसके बाद अदालत जांच की स्थिति और सामने आए तथ्यों के आधार पर आगे के निर्देश दे सकती है।
यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें केवल कथित दान हेराफेरी की जांच ही नहीं, बल्कि देश के एक प्रमुख धार्मिक स्थल पर श्रद्धालुओं के दान के प्रबंधन में पारदर्शिता और जवाबदेही का सवाल भी जुड़ा हुआ है।
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