कनाडा में हुई खालिस्तानी चरमपंथी हरदीप सिंह निज्जर हत्याकांड को लेकर एक नया और सनसनीखेज खुलासा सामने आया है। गैंगस्टर गोल्डी बराड़ ने दावा किया है कि निज्जर की हत्या के पीछे उसी का हाथ था। इस दावे का समर्थन करता हुआ एक ऑडियो टेप भी सार्वजनिक हुआ है, जिसमें गोल्डी बराड़ और आतंकी परमजीत सिंह उर्फ पम्मा के बीच बातचीत सुनी जा सकती है।
वायरल ऑडियो में बराड़ कह रहा है कि निज्जर को निशाना बनाने की मुख्य वजह उसके गिरोह के विरोधियों को शरण देना थी। बराड़ का आरोप है कि उसके भाई की हत्या में शामिल सुक्खा दुनेके और अर्श डाला जैसे लोग निज्जर की कोठी में पनाह ले रहे थे। उसने बातचीत में कहा कि जिन जगहों से उसके भाई के खिलाफ साजिशें रची गईं, उन्हें बर्दाश्त करना उसके लिए नामुमकिन था और इसी बदले की आग में इस वारदात को अंजाम दिया गया। गोल्डी ने यह भी दावा किया कि धार्मिक स्थल की मर्यादा के कारण गुरुद्वारे परिसर के भीतर हमला नहीं किया गया, वर्ना अर्श डाला भी उनका निशाना बन सकता था।

निज्जर हत्याकांड : कैसे मारा गया था हरदीप सिंह निज्जर?
यह वारदात 18 जून 2023 की शाम करीब 8:30 बजे की है। हरदीप सिंह निज्जर, जो सरे के गुरु नानक सिख गुरुद्वारे का कमेटी अध्यक्ष था, उस समय गुरुद्वारा परिसर के भीतर ही मौजूद था। पूजा-अर्चना के बाद जब जैसे ही निज्जर का वाहन निकास द्वार की ओर बढ़ा, अचानक एक सफेद सेडान कार उसके पास आई और तेजी से आगे निकलकर उसके रास्ते को पूरी तरह से रोक लिया. इसके बाद दो नकाबपोश हमलावर झाड़ियों और ओट से निकलकर आए। उन्होंने ड्राइविंग सीट की खिड़की के पास पहुँचकर अत्याधुनिक स्वचालित हथियारों से गोलियों की बौछार कर दी। करीब पचास राउंड की ताबड़तोड़ फायरिंग में तीन दर्जन से अधिक गोलियाँ निज्जर को लगीं, जिससे उसकी घटना स्थल पर ही मौत हो गई। वारदात को अंजाम देने के तुरंत बाद दोनों शूटर फरार हो गए।
हरदीप सिंह निज्जर कौन था?
हरदीप सिंह निज्जर भारत से कनाडा जाकर बसा एक खालिस्तानी अलगाववादी नेता था, जो भारत में प्रतिबंधित चरमपंथी संगठन ‘खालिस्तान टाइगर फोर्स’ (KTF) का प्रमुख और ‘सिंक्स फॉर जस्टिस’ (SFJ) संस्था का सक्रिय सदस्य था। उसका जन्म पंजाब के जालंधर जिले के भारसिंहपुरा गांव में हुआ था। वह 1997 में फर्जी दस्तावेज के आधार पर कनाडा पहुंचा था, जहाँ बाद में उसने प्लंबर का काम शुरू किया और आगे चलकर कनाडाई नागरिकता हासिल कर ली। भारत की राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) और पंजाब पुलिस की हिट-लिस्ट में वह शीर्ष पर था। भारत सरकार ने उसे 2020 में गैर-कानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (UAPA) के तहत ‘डेजिग्नेटेड टेररिस्ट’ (आतंकी) घोषित किया था। उस पर टारगेट किलिंग्स, फंडिंग और युवाओं को चरमपंथ की ओर भड़काने के कई गंभीर मामले दर्ज थे। वह ब्रिटिश कोलंबिया (कनाडा) के सरे शहर में स्थित ‘गुरु नानक सिख गुरुद्वारा’ की प्रबंधकीय कमेटी का अध्यक्ष था। वहाँ वह भारत विरोधी अभियानों और ‘खालिस्तान रेफरेंडम’ के आयोजन में मुख्य भूमिका निभाता था।
कनाडा के तत्कालीन प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो का आरोप
सितंबर 2023 में कनाडाई संसद (हाउस ऑफ कॉमन्स) में बयान देते हुए तत्कालीन प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने सीधे तौर पर भारत सरकार पर आरोप लगाए थे। ट्रूडो ने कहा था कि कनाडा की सुरक्षा एजेंसियों के पास इस बात के “विश्वसनीय आरोप” हैं जो भारत सरकार के एजेंटों को हरदीप सिंह निज्जर की हत्या से जोड़ते हैं। उन्होंने कहा कि कनाडाई नागरिक की कनाडा की धरती पर किसी विदेशी सरकार द्वारा हत्या कराया जाना “कनाडा की संप्रभुता का गंभीर और अस्वीकार्य उल्लंघन” है। उन्होंने सार्वजनिक रूप से भारत सरकार से अपील की थी कि वह इस मामले को बेहद गंभीरता से ले और कनाडाई जांच एजेंसियों का पूरा सहयोग करे ताकि सच सामने आ सके। इसी बयान के तुरंत बाद कनाडा ने ओटावा में तैनात एक वरिष्ठ भारतीय राजनयिक (RAW के स्थानीय अधिकारी) को देश छोड़ने का आदेश जारी कर दिया था।

जस्टिन ट्रूडो के आरोप पर भारत की सफाई
हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद कनाडा ने भारतीय एजेंसियों पर सीधे तौर पर आरोप लगाकर कूटनीतिक तनाव पैदा कर दिया था। हालांकि, भारत सरकार ने इन दावों को पूरी तरह से खारिज करते हुए इन्हें बेबुनियाद और राजनीतिक स्वार्थ से प्रेरित करार दिया था। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है जहाँ कानून का शासन चलता है। किसी अन्य देश की धरती पर इस तरह की टार्गेट किलिंग में शामिल होना भारत की नीति नहीं है। कनाडा द्वारा भारतीय राजनयिक को निष्कासित किए जाने के जवाब में भारत ने भी नई दिल्ली में तैनात एक वरिष्ठ कनाडाई राजनयिक को समन कर 5 दिनों के भीतर देश छोड़ने का फरमान जारी कर दिया था। भारत ने कनाडा से बार-बार कहा कि वह अपने आरोपों के समर्थन में कोई ठोस सबूत या प्रासंगिक जानकारी साझा करे। भारत का कहना था कि कनाडा बिना किसी तथ्य के केवल राजनीतिक लाभ उठाने के लिए अनर्गल बयानबाजी कर रहा है।
गोल्डी बराड़ के कबूलनामे का क्या होगा असर?
गैंगस्टर गोल्डी बराड़ का यह कबूलनामा कूटनीतिक और सुरक्षा के लिहाज से भारत के पक्ष को बेहद मजबूत करता है और खालिस्तानी प्रोपेगैंडा को करारा झटका देता है। कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने बिना ठोस सबूतों के भारत सरकार की एजेंसियों पर निज्जर की हत्या का आरोप लगाया था, लेकिन गोल्डी बराड़ द्वारा इस वारदात को आपसी रंजिश, गैंगवार और अपने भाई की हत्या का बदला बताना भारत के उस स्टैंड को सही साबित करता है कि यह मामला पूरी तरह आपराधिक गिरोहों की आपसी लड़ाई का था। इसके अलावा, ऑडियो में निज्जर के ठिकाने पर अन्य कुख्यात गैंगस्टरों (जैसे अर्श डाला और सुक्खा दुनेके) को पनाह मिलने का खुलासा भारत के उस पुराने दावे पर मुहर लगाता है कि कनाडा में बैठे खालिस्तानी अलगाववादी संगठित अपराध और भारत-विरोधी गैंगस्टरों का अखाड़ा चला रहे हैं; इससे अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर कनाडा के बेबुनियाद आरोपों की हवा निकलती है और उस पर अपने देश में पल रहे गैंगस्टर-आतंकी गठजोड़ के खिलाफ कार्रवाई करने का दबाव बढ़ता है।
कौन है गैंगस्टर गोल्डी बराड़?

गोल्डी बराड़ (सतिंदरजीत सिंह) पंजाब के श्री मुक्तसर साहिब का मूल निवासी और कुख्यात लॉरेंस बिश्नोई गैंग का कनाडा स्थित मुख्य मास्टरमाइंड है, जो वर्ष 2017 में स्टूडेंट वीजा पर कनाडा भाग गया था। मई 2022 में मशहूर पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला की दिनदहाड़े हुई हत्या की मुख्य साजिश रचने और उसकी जिम्मेदारी लेने के बाद वह सुर्खियों में आया। भारत में लक्षित हत्याओं, जबरन वसूली, सीमा पार से अवैध हथियारों की तस्करी और देश विरोधी गतिविधियों को अंजाम देने के गंभीर आरोपों के चलते भारत सरकार के गृह मंत्रालय (MHA) ने उसे गैर-कानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (UAPA) के तहत ‘आतंकवादी’ घोषित किया हुआ है, वहीं इंटरपोल और कनाडाई प्रशासन भी उसे अपने टॉप भगौड़ों की सूची में शामिल कर चुके हैं।
मूसेवाला की हत्या क्यों करवाई?
पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला की हत्या के बाद गैंगस्टर गोल्डी बराड़ ने सोशल मीडिया पर इस वारदात की पूरी जिम्मेदारी लेते हुए दावा किया था कि यह हमला अकाली दल के युवा नेता विक्की मिड्डूखेड़ा और उसके भाई गुरलाल बराड़ की हत्याओं का सीधा बदला था। बराड़ का आरोप था कि मूसेवाला अपने रसूख, पैसों और राजनीतिक पहुँच के दम पर उनके विरोधियों व हत्यारों को पुलिसिया कार्रवाई से बचाकर पनाह दे रहा था। उसने यह भी स्पष्ट किया कि उसकी मूसेवाला से कोई निजी या गानों की प्रतिद्वंद्विता नहीं थी, बल्कि जब उन्हें कानून व प्रशासन से अपने साथियों की हत्या का न्याय नहीं मिला, तब उन्होंने इस गैंगवार की रंजिश में खुद हथियार उठाकर इस वारदात को अंजाम दिया।
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