PART 3 – CORE AREA STORY | 3,008 एकड़ में कैसे बनेगा नए शहर का ‘दिल’?
पटना। पटना के आसपास प्रस्तावित पाटलिपुत्र ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप का आकार भले ही करीब 81,730 एकड़ रखा गया हो, लेकिन पूरे प्रस्तावित शहर का विकास एक साथ नहीं होगा। बिहार सरकार के प्रस्तावित डेवलपमेंट प्लान-2047 के मुताबिक करीब 3,008 एकड़ के कोर एरिया को शुरुआती चरण में विकसित करने के लिए चिन्हित किया गया है। इस कोर एरिया में 19 राजस्व गांव शामिल हैं। यानी 81,730 एकड़ के विशाल प्रस्तावित शहर में पहले चरण का शहरी विकास इन्हीं 3,008 एकड़ से शुरू होगा।
कोर एरिया क्यों है सबसे महत्वपूर्ण?
प्रस्तावित डेवलपमेंट प्लान-2047 में साफ कहा गया है कि कोर एरिया वह शुरुआती विकसित क्षेत्र है जहां शहरी बुनियादी ढांचा और टाउन प्लानिंग स्कीम्स यानी कि टीपीएस सबसे पहले लागू की जाएंगी। इसके बाद विशेष क्षेत्र के बाकी हिस्सों में चरणबद्ध तरीके से अर्बन डेवलपमेंट का विस्तार किया जाएगा। यानी कोर एरिया इस पूरी टाउनशिप प्लानिंग का शुरुआती विकास क्षेत्र है।
Core Area कहां है और इसमें कितने गांव हैं?
डेवलपमेंट प्लान-2047 के मुताबिक पाटलिपुत्र ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप का स्पेशल एरिया करीब 81,730 एकड़ में फैला है। इसमें करीब 273 रेवेन्यू विलेज और 2 शहरी क्षेत्र शामिल हैं। इसी के भीतर पुनपुन कम्युनिटी डेवलपमेंट ब्लॉक में करीब 3,008 एकड़ का कोर एरिया है, जिसमें 19 रेवेन्यू विलेज शामिल हैं।

इस डेवलपमेंट प्लान-2047 की मैप लिस्ट में कोर एरिया के लिए अलग से Proposed Land Use Map of Core Area दिया गया है। इसके अलावा Proposed Land Use Map with Cadastral और Proposed Land Use Map with Settlements भी शामिल हैं। यानी कोर एरिया की जमीन को आगे प्लॉट और सेटलमेंट लेवल तक पढ़ने के लिए अलग-अलग मैप्स का इस्तेमाल किया जा सकता है।
कोर एरिया में बनेगा शहर का CBD
बिहार सरकार के डेवलपमेंट प्लान-2047 के मुताबिक पाटलिपुत्र ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप को कई अलग-अलग छोटे शहरों के रूप में नहीं, बल्कि एक सिंगल इंटीग्रेटेड सिटी यानी एकीकृत शहर के रूप में विकसित करने की योजना है। इसका सेंट्रल बिजनेस डिस्ट्रिक्ट यानी CBD कोर एरिया के भीतर और उसके आसपास विकसित करने का प्रस्ताव है। हम आपको बता दें कि Central Business District यानी CBD किसी शहर या महानगर का वह मुख्य क्षेत्र होता है जो आमतौर पर वाणिज्य, व्यापार, वित्तीय गतिविधियों और विभिन्न विभागों के ऑफिस का केंद्र होता है। यह भौगोलिक रूप से अक्सर शहर के बिल्कुल बीच में या मध्य भाग में स्थित होता है। इसे आप शहर या महानगर का दिल भी कह सकते हैं।
इस CBD में कमर्शियल ऑफिस कॉम्प्लेक्स, फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन, गवर्नमेंट ऑफिस, कन्वेंशन एंड एग्जिबिशन सेंटर, होटल और हॉस्पिटैलिटी, रिटेल और एंटरटेनमेंट सेंटर, बहुमंजिला रिहायशी इमारतें, कल्चरल और पब्लिक प्लाजा जैसी सुविधाएं एक ही जगह मौजूद होंगी।

यानी प्रस्तावित शहर का आर्थिक और प्रशासनिक केंद्र इसी कोर एरिया में प्रस्तावित है। प्लान के मुताबिक CBD टाउनशिप का आर्थिक दिल होगा और इसे वॉकएबल तथा ट्रांजिट-ओरिएंटेड अर्बन एनवायरनमेंट के रूप में विकसित किया जाएगा। इसे आसान भाषा में कहें तो सीबीडी मेट्रो स्टेशन, रेलवे स्टेशन या बस स्टैंड जैसे सार्वजनिक परिवहन केंद्रों के आसपास स्थित होगा, जहां लोग आसानी से पैदल ही पहुंच सकें।
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सिर्फ दफ्तर नहीं, पूरा शहर होगा
बिहार सरकार के डेवलपमेंट प्लान-2047 में कोर एरिया के आसपास का विकास सिर्फ आर्थिक गतिविधियों तक सीमित नहीं रहेगा। स्पेशल स्ट्रैटेजी के तहत सीबीडी के आसपास रेजिडेंशियल एरिया + कमर्शियल एरिया + इंस्टिट्यूशनल एरिया + इंडस्ट्रियल एरिया + पब्लिक फैसिलिटीज + रिक्रिएशन एरिया + इंटीग्रेटेड ट्रांसपोर्टेशन नेटवर्क + ट्रांजिट इंफ्रास्ट्रक्चर + ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर को जोड़कर एक इंटीग्रेटेड अर्बन स्ट्रक्चर बनाने की बात कही गई है।
बिहार सरकार के प्रस्तावित डेवलपमेंट प्लान-2047 में पाटलिपुत्र ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप को एक सेल्फ-सस्टेनिंग अर्बन सेंटर के रूप में विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। यानी एक ऐसा आधुनिक शहर, जिसमें रेजिडेंशियल, कमर्शियल, इंस्टीट्यूशनल, इंडस्ट्रियल, रिक्रिएशनल और इकोलॉजिकल इस्तेमाल को एक साथ जोड़ा जाना है।
Core Area के आसपास सबसे ज्यादा घनत्व
प्रस्तावित land-use framework में Core Area के आसपास comparatively छोटे sectors रखे गए हैं, ताकि यहां ज्यादा development intensity और बेहतर street connectivity विकसित की जा सके। इसके मुकाबले township के peripheral हिस्सों में बड़े sectors प्रस्तावित हैं। यानी शहर का मॉडल मोटे तौर पर ऐसा होगा- बीच में ज्यादा घनत्व → बाहर की ओर धीरे-धीरे कम घनत्व। इसका उद्देश्य compact urban development और urban sprawl को नियंत्रित करना है।
कोर एरिया बनेगा सबसे बड़ा ट्रांजिट हब
इस योजना का एक बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा ट्रांसपोर्टेशन का है। डेवलपमेंट प्लान-2047 में दो बड़े एक्सियल रोड्स प्रस्तावित हैं। नार्थ-साउथ एक्सियल रोड – 90 मीटर और ईस्ट-वेस्ट एक्सियल रोड – 90 मीटर। इन दोनों के इंटरसेक्शन को township का महत्वपूर्ण ट्रांजिट नोड बनाया जाना है। यहीं MRTS, RRTS, बस और दूसरे पब्लिक ट्रांसपोर्ट मोड्स को जोड़ने की योजना है। इसके अलावा प्रस्तावित जट डूमरी रेलवे स्टेशन के आसपास एक अलग मल्टी-मॉडल ट्रांजिट हब का प्रस्ताव है। यानी कोर एरिया के आसपास भविष्य के शहर के लिए रोड + रेल + MRTS + RRTS को जोड़कर मल्टी-मॉडल मोबिलिटी स्ट्रक्चर खड़ा करने की योजना है।

मोबिलिटी प्लान में नार्थ-साउथ एक्सियल रोड और ईस्ट-वेस्ट एक्सियल रोड दोनों का राइट-ऑफ-वे 90 मीटर प्रस्तावित है। Development Plan के मुताबिक नार्थ-साउथ और ईस्ट-वेस्ट एक्सियल रोड्स, रिंग रोड और SH-01 पर MRTS कॉरिडोर विकसित किए जाने हैं। इसके साथ ही नार्थ-साउथ एक्सियल रोड पर प्रस्तावित पटना-गया-बोधगया रिजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम यानी RRTS को भी शामिल करने की योजना है। कोर एरिया के आसपास दो अतिरिक्त 45-मीटर रोड्स पर MRTS कॉरिडोर्स का प्रस्ताव है, ताकि हाई-डेनसिटी अर्बन जोन में पब्लिक ट्रांसपोर्ट एक्सेसिबिलिटी मजबूत हो सके।
500 मीटर का TOD Zone भी महत्वपूर्ण
बिहार सरकार के प्रस्तावित डेवलपमेंट प्लान-2047 के मुताबिक प्रिंसिपल MRTS कॉरिडोर्स के साथ, सीबीडी और नार्थ-साउथ तथा ईस्ट-वेस्ट एक्सियल ट्रांजिट कॉरिडोर्स के आसपास लगभग 500 मीटर का ट्रांजिट-ओरिएंटेड डेवलपमेंट यानी टीओडी इन्फ्लुएंस जोन प्रस्तावित है। इस क्षेत्र में हाई-डेनसिटी मिक्स्ड-यूज डेवलपमेंट को बढ़ावा देने की योजना है। इसका उद्देश्य ट्रांजिट स्टेशन के आसपास रेसिडेंशियल, कमर्शियल, ऑफिस और दूसरी गतिविधियों को विकसित करना है, ताकि पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल बढ़े और प्राइवेट व्हीकल्स पर निर्भरता कम हो।
फेज-1 में कोर एरिया की क्या भूमिका है?
बिहार सरकार के प्रस्तावित डेवलपमेंट प्लान-2047 में चरणबद्ध तरीके से योजना लागू करने की रणनीति के तहत फेज-1 को फाउंडेशन फेज यानी 0-5 साल रखा गया है। इस चरण में कोर एरिया डेवलपमेंट, सेंट्रल बिजनेस डिस्ट्रिक्ट का शुरुआती फेज, नार्थ-साउथ और ईस्ट-वेस्ट एक्सियल रोड्स, रिंग रोड का इनिशियल सेक्शन, SH-01 अपग्रेडेशन, वाटर सप्लाई, सीवेज ट्रंक इंफ्रास्ट्रक्चर, पावर सप्लाई, जट डूमरी ट्रांजिट हब और इनिशियल मास रैपिड ट्रांजिट सिस्टम कॉरिडोर जैसे कामों को प्राथमिकता में रखा गया है।
यानी कोर एरिया केवल नक्शे पर चिन्हित छोटा हिस्सा नहीं है। प्रस्तावित प्लान के मुताबिक टाउनशिप के शुरुआती अर्बन फ्रेमवर्क का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र के आसपास विकसित किया जाना है।
लेकिन 3,008 एकड़ के बाहर क्या होगा?
कोर एरिया के बाद स्पेशल एरिया के बाकी हिस्सों को चरणबद्ध तरीके से विकसित करने की योजना है। डेवलपमेंट प्लान में इसकी गति इंफ्रास्ट्रक्चर अवेलेबिलिटी, डेवलपमेंट डिमांड, इनवेस्टमेंट और पॉपुलेशन ग्रोथ जैसे फैक्टर्स से जोड़कर देखी गई है। इसका मतलब यह है कि 81,730 acres का अर्बनाइजेशन एक साथ नहीं होगा। पहले कोर एरिया और उससे जुड़े ट्रंक इंफ्रास्ट्रक्चर और प्रमुख अर्बन फैसिलिटीज पर जोर होगा और इसके बाद टाउनशिप के दूसरे हिस्सों में विस्तार किया जाएगा।
19 गांव इसलिए बनेंगे सबसे अहम
कोर एरिया में शामिल 19 रेवेन्यू विलेज इस परियोजना के शुरुआती चरण के सबसे महत्वपूर्ण ग्राउंड लोकेशंस हैं। लेकिन यहां एक बात साफ रखना जरूरी है। कोर एरिया में किसी गांव का शामिल होना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि उस गांव की हर जमीन का तत्काल अधिग्रहण होगा। जमीन पर वास्तविक असर समझने के लिए कोर एरिया के Proposed Land Use Map, Proposed Land Use Map with Cadastral, Proposed Land Use Map with Settlements, Cadastral Map और आगे बनने वाली Town Planning Schemes को साथ में पढ़ना होगा।

यही वह बिंदु है जहां टाउनशिप की मास्टर प्लानिंग सीधे जमीन मालिक की जमीन से जुड़ती है। एक ही गांव में किसी जमीन का प्रस्तावित Land Use Residential हो सकता है, किसी हिस्से में Public Purpose, कहीं Road या Transit Corridor और किसी हिस्से में Green या अन्य Land Use हो सकता है। इसका सही जवाब मैप और कैडस्ट्रल रिकॉर्ड की तुलना से ही मिलेगा।
कोर एरिया की असली कहानी केवल 3,008 एकड़ नहीं है
असली सवाल है- इन 3,008 एकड़ में कौन-सी जमीन रेसिडेंशियल होगी? कहां सीबीडी बनेगा? कहां रोड और एमआरटीएस आएगा? किस जमीन पर Public Purpose होगा? कहां ग्रीन बेल्ट और वाटर इंफ्रास्ट्रक्चर आएगा? और सबसे महत्वपूर्ण- किस किसान की जमीन किस प्रपोज्ड लैंड यूज में जा रही है? यही वह सवाल है जो सरकारी मास्टर प्लानिंग को सीधे जमीन मालिक की जिंदगी से जोड़ता है।
Freelancer Post का अगला सवाल
81,730 एकड़ का शहर एक दिन में नहीं बनेगा। प्रस्तावित डेवलपमेंट प्लान-2047 के मुताबिक पहले 3,008 एकड़ के कोर एरिया को initial implementation zone के रूप में विकसित करने की योजना है। अब सबसे महत्वपूर्ण जांच यह है कि इन 3,008 एकड़ का जमीन के नक्शे पर असली चेहरा क्या है। कौन-से 19 गांव? किस गांव में कितनी जमीन? किस जमीन का proposed Land Use क्या है? कहां road, MRTS, CBD और public infrastructure आएगा?
यही हमारी अगली पड़ताल का विषय होगा।
Part 4 में हम इसी का नक्शा खोलेंगे:
“3,008 एकड़ में किसकी जमीन पर क्या बनेगा? Proposed Land Use Map खोलेगा Patliputra Township का पूरा खेल”
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