PART 1 | PILLAR STORY
Patliputra Greenfield Satellite Township: 3,008 एकड़ के Core Area से शुरू होगा विकास, 9 प्रखंडों में फैला होगा प्रस्तावित शहरी क्षेत्र
पटना। बिहार की राजधानी पटना आने वाले वर्षों में काफी बदल सकती है। शहर के आसपास के कई ग्रामीण इलाकों को एक बड़ी शहरी योजना के तहत विकसित करने की तैयारी है। बिहार सरकार के Patliputra Greenfield Satellite Township Development Plan-2047 में पटना जिले के दक्षिणी और दक्षिण-पश्चिमी हिस्से में करीब 81,730 एकड़ क्षेत्र को एक नए ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप के रूप में विकसित करने की योजना है।
Patliputra Greenfield Satellite Township के प्रस्तावित Special Area में 9 Community Development Blocks शामिल किए गए हैं।
योजना के मुताबिक इस पूरे क्षेत्र में करीब 3,008 एकड़ का Core Area चिन्हित किया गया है। इसमें 19 राजस्व गांव शामिल हैं। शुरुआत में इसी Core Area से विकास शुरू करने की योजना है। यहां सड़क, पानी, बिजली, सीवरेज जैसी बुनियादी सुविधाओं के साथ अलग-अलग इलाकों के विकास के लिए Town Planning Schemes (TPS) लागू करने का प्रस्ताव है।
सिर्फ मकानों की कॉलोनी नहीं होगी
यह योजना केवल लोगों के रहने के लिए मकान बनाने तक सीमित नहीं है। सरकार इसे एक ऐसे आत्मनिर्भर शहर (Self-Sustaining Urban Centre) के रूप में विकसित करना चाहती है, जहां रहने के साथ-साथ रोजगार, व्यापार, शिक्षा, स्वास्थ्य और दूसरी जरूरी सुविधाएं भी उपलब्ध हों।

योजना में आवासीय इलाकों के अलावा Central Business District (CBD), बाजार और व्यापारिक क्षेत्र, संस्थागत क्षेत्र, ज्ञान और तकनीक से जुड़े केंद्र, अस्पताल, स्कूल-कॉलेज, मनोरंजन क्षेत्र, लॉजिस्टिक्स और सर्विस सेक्टर विकसित करने का प्रस्ताव है।
सरल शब्दों में कहें तो मकान के साथ-साथ इस नए शहर में रोजगार, कारोबार, पढ़ाई, इलाज और दूसरी जरूरी सुविधाओं का पूरा ढांचा तैयार करने की योजना है।
2047 तक 66.10 लाख लोगों की क्षमता
इस प्रस्तावित शहर की सबसे बड़ी खासियत इसकी आबादी से जुड़ी योजना है।
बिहार सरकार के Patliputra Greenfield Satellite Township Development Plan-2047 में नगर विकास एवं आवास विभाग के Development Plan में 2047 तक 66.10 लाख लोगों की Design Population Capacity रखी गई है। यानी भविष्य में इस पूरे शहरी क्षेत्र में करीब 66.10 लाख लोगों के रहने लायक सुविधाएं और ढांचा तैयार करने की योजना है।
इसके लिए पूरे नियोजित क्षेत्र की औसत सकल आबादी घनत्व 200 व्यक्ति प्रति हेक्टेयर रखा गया है।
हालांकि शुरुआती चरण में करीब 25 लाख लोगों की Optimum Operational Population के हिसाब से योजना बनाने की बात कही गई है। इस चरण में औसत घनत्व करीब 75 व्यक्ति प्रति हेक्टेयर रखा गया है।
इसका मतलब यह है कि सरकार एक साथ पूरे 81,730 एकड़ क्षेत्र में शहर नहीं बसाएगी। विकास को जरूरत और आबादी बढ़ने के हिसाब से कई चरणों में आगे बढ़ाने की योजना है।

विकास कहां से शुरू होगा?
योजना में सबसे पहले Core Area को विकसित करने की बात है।
इसके आसपास Central Business District यानी CBD विकसित करने का प्रस्ताव है। इसके बाद जरूरत के हिसाब से आवासीय, व्यापारिक, संस्थागत, औद्योगिक, लॉजिस्टिक्स और मनोरंजन से जुड़े क्षेत्रों का विस्तार किया जाएगा।
Development Plan के मुताबिक आगे का विकास उपलब्ध बुनियादी ढांचे, जमीन की जरूरत और आबादी बढ़ने के आधार पर चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा।
273 गांव और 9 प्रखंड दायरे में
प्रस्तावित Special Area में ये 9 Community Development Blocks शामिल हैं:
- पुनपुन
- फतुहा
- संपतचक
- धनरुआ
- नौबतपुर
- दनियावां
- मसौढ़ी
- पटना ग्रामीण
- फुलवारी
इसके अलावा पुनपुन नगर पंचायत और नौबतपुर नगर पंचायत के हिस्से भी इस योजना के दायरे में रखे गए हैं।

इसका मतलब है कि योजना का असर सिर्फ पटना शहर तक सीमित नहीं रहेगा। इसके दायरे में आने वाले ग्रामीण और शहरी इलाकों को एक ही बड़े प्लान के तहत विकसित करने की योजना है।
नई टाउनशिप में कितनी जमीन किस काम के लिए?
Development Plan में अलग-अलग कामों के लिए जमीन का इस्तेमाल तय करने का प्रस्ताव है।
आवासीय क्षेत्र के लिए करीब 28,723.95 एकड़, यानी कुल क्षेत्र का 35.18 प्रतिशत हिस्सा रखा गया है।
इसके अलावा प्रस्तावित भूमि उपयोग इस तरह है:
| उपयोग | प्रस्तावित क्षेत्र |
|---|---|
| कमर्शियल | 3,246.03 एकड़ |
| इंडस्ट्रीयल | 4,651.67 एकड़ |
| रिक्रिएशन | 4,774.86 एकड़ |
| ट्रांसपोर्ट और कम्युनिकेशन | 6,237.60 एकड़ |
| पब्लिक पर्पस | 3,319.56 एकड़ |
| TOD Zone | 5,406 एकड़ |
| ग्रीन बेल्ट | 3,606 एकड़ |
| अर्बन एग्रीकल्चर | 17,616.13 एकड़ |
इन आंकड़ों से साफ है कि प्रस्तावित शहर सिर्फ रहने के लिए नहीं होगा। यहां व्यापार, उद्योग, रोजगार, परिवहन, हरियाली और खेती से जुड़े क्षेत्रों के लिए भी जमीन रखने की योजना है।
फिनटेक सिटी, लॉजिस्टिक्स और इंडस्ट्रीयल हब भी प्रस्तावित
इस बड़े शहरी क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए कई विशेष परियोजनाओं का प्रस्ताव है।
Development Plan के मुताबिक जैतिया मौजा में Fintech City और Multi-Modal Logistics Park जैसे प्रोजेक्ट प्रस्तावित हैं।
इसके अलावा Sports City, बिहार Judicial Academy और दूसरे संस्थागत विकास को भी इस बड़े विकास क्षेत्र से जोड़ने की योजना है।
यानी सरकार इस नए शहर को केवल रहने की जगह नहीं, बल्कि रोजगार और कारोबार के बड़े केंद्र के रूप में विकसित करने की सोच रही है।

लेकिन सबसे बड़ा सवाल जमीन का है
Patliputra Greenfield Satellite Township की योजना में जमीन जुटाने के लिए अलग-अलग विकल्पों का उल्लेख किया गया है। इतने बड़े इलाके में शहर बसाने के लिए सबसे बड़ा सवाल जमीन का ही है।
किसान की जमीन कैसे ली जाएगी?
किस जमीन पर कौन-सा उपयोग होगा?
जमीन मालिक को बदले में क्या मिलेगा?
और क्या हर गांव में जमीन लेने का तरीका एक जैसा होगा?
Development Plan में जमीन जुटाने के लिए कई विकल्पों का उल्लेख किया गया है। इनमें सीधे जमीन खरीदना, Town Planning Scheme, Land Pooling और Land Readjustment जैसे तरीके शामिल हैं।
इसके अलावा Public Land Development, Joint Development और Public-Private Partnership (PPP) जैसे विकल्पों का भी उल्लेख किया गया है।
Land Pooling और Land Readjustment क्या है?
इसे आसान भाषा में समझें तो Land Pooling में कई जमीन मालिकों की जमीन को एक साथ लेकर वहां सड़क, पार्क, सार्वजनिक सुविधाएं और दूसरी जरूरी चीजें विकसित करने की योजना बनाई जा सकती है। इसके बाद योजना के नियमों के मुताबिक विकसित जमीन का कुछ हिस्सा वापस जमीन मालिकों को मिल सकता है।
Land Readjustment में भी जमीन के टुकड़ों को नए तरीके से व्यवस्थित करके सड़क और दूसरी सार्वजनिक सुविधाओं के लिए जगह बनाई जाती है।
लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि हर गांव और हर जमीन पर कौन-सा तरीका लागू होगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है।
यही इस पूरी योजना का सबसे संवेदनशील हिस्सा है।
क्योंकि सरकार के लिए यह एक बड़ा शहरी विकास प्रोजेक्ट है, लेकिन किसान और जमीन मालिक के लिए सबसे बड़ा सवाल उसकी अपनी जमीन है।
किस जमीन का इस्तेमाल आवासीय क्षेत्र के लिए होगा, किस जमीन पर सड़क बनेगी, कहां बाजार या उद्योग आएगा, जमीन किस तरीके से ली जाएगी और जमीन मालिक को क्या मिलेगा-इन सवालों के जवाब आगे की विस्तृत योजनाओं में महत्वपूर्ण होंगे।
Patna Master Plan से भी बदलेगा planning framework
इस योजना को समझने के लिए एक और महत्वपूर्ण बात है।
Development Plan के मुताबिक 2016 में अधिसूचित Patna Master Plan-2031 के बाद इस इलाके में कई बड़े infrastructure projects आए हैं। इसी वजह से Patliputra Greenfield Satellite Township के लिए अलग planning framework तैयार किया गया है।
Development Plan में यह भी कहा गया है कि Special Area में जहां Patna Master Plan-2031 और नए Township Development Plan के बीच अंतर होगा, वहां Patliputra Greenfield Satellite Township Development Plan-2047 को प्राथमिकता मिलेगी।
यानी इस क्षेत्र में भविष्य के विकास की योजना नए Development Plan के मुताबिक तय की जा सकती है।
तीन चरणों में विकसित होगा प्रस्तावित शहर
Patliputra Greenfield Satellite Township Development Plan में शहर के विकास को तीन चरणों में बांटा गया है।

Phase-I
पहले चरण में:
- Core Area
- Central Business District
- शुरुआती आवासीय क्षेत्र
- Fintech City
- Multi-Modal Logistics Park
- मुख्य सड़क नेटवर्क
- बुनियादी ढांचा
- शुरुआती सामाजिक सुविधाएं
विकसित करने का प्रस्ताव है।
Phase-II
दूसरे चरण में:
- आवासीय क्षेत्रों का विस्तार
- Institutional Area
- Sports City
- Industrial और Logistics Area
- Secondary Transportation Network
को विकसित करने की योजना है।
Phase-III
तीसरे चरण में:
- बाकी शहरी क्षेत्र
- Regional Parks
- Tourism Facilities
- अतिरिक्त आर्थिक गतिविधियों वाले क्षेत्र
विकसित करने का प्रस्ताव है।
FreelancerPost का बड़ा सवाल
81,730 एकड़ में फैला यह प्रस्तावित शहरी क्षेत्र 273 गांवों को अपने दायरे में लाने वाला है। 2047 तक यहां 66.10 लाख लोगों के रहने की क्षमता तैयार करने की योजना है।
सरकारी दस्तावेज में शहर का एक बड़ा नक्शा और भविष्य की तस्वीर दिखाई गई है।
लेकिन इस योजना की असली परीक्षा जमीन पर होगी।
जहां किसान हैं, उनकी जमीन है, खेती है, गांव हैं, बस्तियां हैं, जलस्रोत हैं और उनके बीच से गुजरने वाली प्रस्तावित सड़कें और दूसरी सुविधाएं हैं।
शहर का सपना बड़ा है।
लेकिन जमीन मालिक के लिए सबसे बड़ा सवाल बहुत सीधा है-
इस नक्शे में आपकी जमीन कहां है?
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