पहले 780 बोरी NFL यूरिया जब्त कर सरकारी सील किया गया था गोदाम; दोबारा जांच में सिर्फ 80 बोरी मिलीं, सील टूटी थी; ट्रक और गोदाम से मिली 750 बोरी IPL का भी नहीं मिला वैध रिकॉर्ड
पटना। पूर्वी चम्पारण के बंजरिया प्रखंड में उर्वरक को लेकर सामने आए एक मामले ने सरकारी निगरानी और जब्त खाद की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सरकारी सील लगे गोदाम से पहले जब्त 780 बोरी NFL यूरिया में से 700 बोरी NFL यूरिया गायब मिली हैं। जांच के दौरान गोदाम की सील टूटी हुई पाई गई। इसी जांच में गोदाम के अंदर और बाहर खड़े एक ट्रक से 750 बोरी IPL यूरिया भी मिली, जिसके संबंध में मौके पर कोई वैध कागजात प्रस्तुत नहीं किया गया।
मामले में प्रतिष्ठान से जुड़े अंबिका साह के अलावा ट्रक चालक और मालिक को भी आरोपी बनाया गया है। तीनों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि सरकारी सील टूटने और जब्त की गई 700 बोरी यूरिया के गायब होने के लिए आखिर कौन जिम्मेदार है?
पहले जब्त हुई थी 780 बोरी NFL यूरिया
कृषि विभाग के मुताबिक बंजरिया स्थित मनोकामना फर्टिलाइजर्स के गोदाम में पहले कार्रवाई के दौरान 780 बोरी NFL यूरिया, 25 बोरी कैल्शियम और 30 बोरी सल्फर जब्त किया गया था। जब्त सामग्री को सुरक्षित रखने के लिए गोदाम को विधिवत राजकीय सील कर दिया गया था।
यहीं से मामला गंभीर हो जाता है। सरकारी सील का मतलब था कि बिना अधिकृत प्रक्रिया के गोदाम को खोला नहीं जाना चाहिए। लेकिन अगली जांच में सील टूटी मिली और जब्त स्टॉक में बड़ा अंतर सामने आया।
780 में सिर्फ 80 बोरी मिलीं, 700 बोरी कहां गईं?
3 सितंबर 2026 को अनुमंडल कृषि पदाधिकारी, सदर मोतिहारी, थानाध्यक्ष और कृषि विभाग की टीम ने गोदाम का निरीक्षण किया।
जांच में पहले जब्त की गई 780 बोरी NFL यूरिया में से केवल 80 बोरी उपलब्ध मिलीं। इस तरह 700 बोरी NFL यूरिया गायब पाई गई।
यानी जिस स्टॉक को सरकारी कार्रवाई के बाद सुरक्षित रखने के लिए सील किया गया था, उसमें ही सबसे बड़ा अंतर सामने आया है।
सरकारी सील टूटी तो गोदाम तक पहुंच किसकी थी?
यही इस मामले का सबसे अहम सवाल है। अगर गोदाम सरकारी सील में था तो उसे खोलने, अंदर से स्टॉक निकालने या वहां नया माल रखने की अनुमति किसे थी? सील कब टूटी? इसकी जानकारी पहली बार किसे हुई? सील की निगरानी की जिम्मेदारी किसकी थी? और 700 बोरी खाद गोदाम से कब निकली?
इन सवालों का जवाब जांच में सामने आना बाकी है। अभी यह कहना उचित नहीं होगा कि इसके लिए कौन व्यक्ति या अधिकारी सीधे जिम्मेदार है। यह जांच का विषय है। लेकिन सरकारी सील टूटने और जब्त स्टॉक में 700 बोरी की कमी से निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल जरूर खड़े होते हैं।
उसी दौरान मिला 750 बोरी IPL यूरिया
जांच टीम को गोदाम के बाहर खड़े ट्रक संख्या BROS GC 9294 में करीब 500 बोरी IPL यूरिया मिली। इसके अलावा गोदाम के अंदर करीब 250 बोरी IPL यूरिया रखी हुई थी।
जांच के दौरान मौके पर इस यूरिया से संबंधित कोई वैध कागजात प्रस्तुत नहीं किया गया। इसके बाद टीम ने कुल 750 बोरी IPL यूरिया जब्त कर ली।
अब जांच का एक और अहम पहलू यह होगा कि यह 750 बोरी IPL यूरिया वहां कब लाई गई, किस स्रोत से आई, किसके निर्देश पर आई और इसका रिकॉर्ड कहां है।
एक ही मामले में दो बड़े सवाल
बंजरिया मामले में अब जांच के सामने मूल रूप से दो बड़े सवाल हैं। पहला-सरकारी सील लगे गोदाम से 700 बोरी जब्त NFL यूरिया कैसे गायब हुई?
दूसरा-उसी गोदाम और उससे जुड़े ट्रक से 750 बोरी IPL यूरिया बिना वैध कागजात के कैसे पहुंची?
दोनों घटनाएं एक-दूसरे से जुड़ी हैं या अलग-अलग, यह भी जांच से स्पष्ट होना है।
अंबिका साह समेत तीन पर FIR
मामले में अंबिका साह, पिता-रामयोध्या साह, निवासी लालबेगिया, पोस्ट-मिश्रावलिया, प्रखंड-चिरैया, प्रतिष्ठान-मनोकामना फर्टिलाइजर्स, बंजरिया को नामजद अभियुक्त बनाया गया है।
इसके अलावा ट्रक संख्या BROS GC 9294 के चालक और मालिक को भी आरोपी बनाया गया है। तीनों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है।
यहां भी यह ध्यान रखना जरूरी है कि FIR में नाम होना दोष सिद्ध होना नहीं है। आरोपों की पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।

कृषि मंत्री ने 24 घंटे में मांगी कार्रवाई की रिपोर्ट
मामले की गंभीरता को देखते हुए कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने जिला कृषि पदाधिकारी, पूर्वी चम्पारण को जिला पदाधिकारी को पूरे मामले से अवगत कराने तथा विधिसम्मत कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।
मंत्री ने 24 घंटे के भीतर की गई कार्रवाई का विस्तृत प्रतिवेदन भी मांगा है।
कृषि मंत्री ने कहा है कि उर्वरक की अनियमितता और किसानों के हितों से जुड़े मामलों में विभाग जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत कार्रवाई कर रहा है।
अब जांच में किन लोगों की भूमिका खंगालनी होगी?
इस मामले में जिम्मेदारी तय करने के लिए सिर्फ गोदाम संचालक या ट्रक से जुड़े लोगों की भूमिका देखना पर्याप्त नहीं होगा। जांच में यह भी देखना होगा कि—
गोदाम की सील किसने लगाई थी, उसकी निगरानी किसके जिम्मे थी, सील कब और किन परिस्थितियों में टूटी, स्टॉक का रिकॉर्ड किसके पास था, 700 बोरी के गायब होने की जानकारी कब मिली और 750 बोरी IPL यूरिया के गोदाम तक पहुंचने की पूरी सप्लाई चेन क्या थी।
इन सवालों के जवाब सामने आने पर ही यह तय हो सकेगा कि 700 बोरी NFL यूरिया के मामले में वास्तविक जिम्मेदारी किसकी थी और सरकारी निगरानी में कहां चूक हुई।
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