पटियाला हाउस कोर्ट में महेश गुप्ता, पीजी संचालक सुधांशु और ठेकेदार सनोज की पेशी; सुधांशु के वकील ने कहा- जांच शुरुआती दौर में, मीडिया ट्रायल से प्रभावित हो सकती है जांच
नई दिल्ली। दक्षिणी दिल्ली के सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसा में पांच मंजिला पीजी बिल्डिंग गिरने के मामले में पटियाला हाउस कोर्ट ने बुधवार को बिल्डिंग मालिक के बेटे महेश गुप्ता, पीजी संचालक सुधांशु और ठेकेदार सनोज कुमार को दो दिनों की पुलिस हिरासत में भेज दिया। दिल्ली पुलिस ने तीनों की तीन दिन की हिरासत मांगी थी, लेकिन कोर्ट ने दो दिन की पुलिस कस्टडी मंजूर की।
महेश गुप्ता को पहले मिली दो दिन की पुलिस हिरासत पूरी होने के बाद कोर्ट में पेश किया गया था, जबकि सुधांशु और सनोज को गिरफ्तारी के बाद पहली बार पेश किया गया। पुलिस का कहना है कि पूछताछ के जरिए हादसे की परिस्थितियों और मामले से जुड़े लोगों की भूमिका की जांच की जानी है। पुलिस एक अन्य पीजी संचालक शुभम त्यागी की भी तलाश कर रही है।
‘मीडिया ट्रायल’ की दलील के बाद कोर्टरूम से बाहर गए पत्रकार
सुनवाई के दौरान पीजी संचालक सुधांशु के वकील ने अदालत में ‘मीडिया ट्रायल’ का मुद्दा उठाया। बचाव पक्ष ने कहा कि मामला अभी जांच के शुरुआती दौर में है और मीडिया कवरेज से जांच प्रभावित होने की आशंका है।
इसके बाद कोर्ट ने कार्यवाही को इन-कैमरा यानी बंद कमरे में करने का आदेश दिया और मीडिया को कोर्टरूम से बाहर जाने को कहा। इसके बाद कोर्ट ने पुलिस और बचाव पक्ष की दलीलें सुनने के बाद तीनों आरोपियों को दो दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया।
पहले महेश की पुलिस कस्टडी, माता-पिता न्यायिक हिरासत में भेजे गए थे
इस मामले में 7 सितंबर को भी पटियाला हाउस कोर्ट में आरोपियों को पेश किया गया था। उस समय ड्यूटी मजिस्ट्रेट ने महेश गुप्ता को दो दिन की पुलिस हिरासत, जबकि उसके माता-पिता हरिराम गुप्ता और ऊर्मिला गुप्ता को न्यायिक हिरासत में भेजा था।
पुलिस के मुताबिक, 81 वर्षीय हरिराम गुप्ता रिटायर्ड भारतीय वायुसेना सार्जेंट हैं, जबकि 75 वर्षीय ऊर्मिला गुप्ता के नाम पर संपत्ति दर्ज है। पुलिस के अनुसार बिल्डिंग का बिजली कनेक्शन हरिराम गुप्ता के नाम था और बिल्डिंग के प्रबंधन में उनके बेटे महेश की भूमिका थी। महेश की उम्र 52 वर्ष बताई गई है।
‘Hostel Daze’ पीजी में हुआ था हादसा
सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसा की यह पांच मंजिला बिल्डिंग ‘Hostel Daze’ नाम के बॉयज पीजी के तौर पर इस्तेमाल हो रही थी। यह इलाका दिल्ली यूनिवर्सिटी के साउथ कैंपस के नजदीक है और बड़ी संख्या में छात्र यहां पीजी में रहते हैं।
6 सितंबर को दोपहर करीब 1:30 बजे बिल्डिंग अचानक ढह गई। हादसे के बाद बड़े पैमाने पर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया। अब तक 7 लोगों की मौत हुई है, जबकि 12 लोगों को मलबे से सुरक्षित निकाला गया। रेस्क्यू ऑपरेशन पूरा हो चुका है।
पुलिस हादसे से जुड़े निर्माण कार्य, बिल्डिंग के इस्तेमाल, पीजी संचालन और ठेकेदार की भूमिका समेत कई पहलुओं की जांच कर रही है। पुलिस की जांच में कथित अतिरिक्त निर्माण को लेकर भी सवाल उठे हैं। हालांकि हादसे की अंतिम वजह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
दिल्ली हाईकोर्ट ने भी मांगी थी उच्चस्तरीय जांच
सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसा के बाद 7 सितंबर को दिल्ली हाईकोर्ट ने मामले में दिल्ली नगर निगम (MCD) को उच्चस्तरीय जांच के निर्देश दिए थे। चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की बेंच ने अधिकारियों से राहत और बचाव अभियान तेज करने को कहा था। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि MCD अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले पीजी आवासों का व्यापक निरीक्षण करे।
हाईकोर्ट ने यह भी कहा था कि जिम्मेदारी सिर्फ बिल्डिंग मालिक तक सीमित नहीं होनी चाहिए और अगर निर्माण या अनुमति से जुड़े स्तर पर कोई लापरवाही सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय की जानी चाहिए।
जांच के साथ अब सवाल जिम्मेदारी का भी
सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसा में सात लोगों की मौत के बाद जांच का दायरा अब सिर्फ बिल्डिंग गिरने की वजह तक सीमित नहीं है। पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर रही है, वहीं हाईकोर्ट के निर्देश के बाद प्रशासनिक और नियामकीय स्तर पर भी जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। फिलहाल पुलिस की जांच जारी है और आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।
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