तीनों रसोइयों को सेवा-मुक्त करने का निर्देश, 144 स्कूलों की भोजन आपूर्ति के विपत्र में कटौती; मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय टीम गठित
पटना/सहरसा। बिहार के सहरसा जिले में सरकारी स्कूल में मिड-डे मील को लेकर सामने आया मामला अब कई सवाल खड़े कर रहा है। कहरा प्रखंड के उत्क्रमित मध्य विद्यालय, बसदेवा में मिड-डे मील में कथित तौर पर छिपकली मिलने और इसके बाद 25 बच्चों के अस्पताल पहुंचने की घटना को शिक्षा विभाग ने गंभीरता से लिया है। मामले में शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी के निर्देश के बाद विद्यालय के प्रधानाध्यापक ब्रजेन्द्र कुमार को निलंबित कर दिया गया है। वहीं स्कूल के तीनों रसोइयों को सेवा-मुक्त करने का निर्देश दिया गया है।
मामला सिर्फ बच्चों के बीमार पड़ने और मिड-डे मील की गुणवत्ता तक सीमित नहीं रहा। घटना की रिपोर्टिंग के दौरान सहरसा सदर अस्पताल परिसर में एक पत्रकार के साथ कथित मारपीट का मामला भी सामने आया है। पत्रकार की ओर से इस घटना में न्याय और कार्रवाई की मांग की गई है। ऐसे में अब इस पूरे प्रकरण में बच्चों की सुरक्षा के साथ-साथ पत्रकारों की स्वतंत्र और सुरक्षित रिपोर्टिंग का सवाल भी उठ रहा है।
मिड-डे मील खाने के बाद बच्चों की तबीयत बिगड़ने की सूचना
बसदेवा स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय में मिड-डे मील खाने के बाद बच्चों की तबीयत बिगड़ने की सूचना मिली। इसके बाद 25 बच्चों को अस्पताल ले जाने की बात सामने आई। मामले की जानकारी मिलने के बाद प्रशासन और शिक्षा विभाग सक्रिय हुआ। भोजन में कथित तौर पर छिपकली मिलने की बात भी सामने आई, हालांकि इस दावे की अंतिम पुष्टि जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। भोजन के नमूनों और घटना से जुड़े तथ्यों की जांच की जा रही है।
ऐसे मामलों में भोजन की गुणवत्ता के साथ यह भी जांच का विषय होता है कि खाना तैयार करने से लेकर उसे बच्चों तक पहुंचाने और परोसने तक निर्धारित स्वच्छता एवं सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था या नहीं।
शिक्षा मंत्री ने लिया संज्ञान, प्रधानाध्यापक निलंबित
घटना की गंभीरता को देखते हुए शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने मामले में तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। उनके निर्देश के बाद विद्यालय के प्रधानाध्यापक ब्रजेन्द्र कुमार को निलंबित कर दिया गया। इसके अलावा विद्यालय में मिड-डे मील तैयार करने वाले तीनों रसोइयों को सेवा-मुक्त करने का निर्देश दिया गया है।
शिक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि बच्चों के स्वास्थ्य और सुरक्षा के साथ किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों से मामले में जिम्मेदारी तय करते हुए दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा है।
डीएम से फोन पर बात, दोषियों की पहचान के निर्देश
शिक्षा मंत्री ने सहरसा के जिलाधिकारी से दूरभाष पर बातचीत कर पूरे मामले की जानकारी ली और विस्तृत जांच के निर्देश दिए। जिलाधिकारी को कहा गया है कि मामले में दोषी व्यक्तियों की पहचान की जाए और जांच के आधार पर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

मामले की निष्पक्ष जांच के लिए तीन सदस्यीय जांच टीम गठित की गई है। जिला पदाधिकारी को जांच के बाद स्पष्ट प्रतिवेदन उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है।
144 स्कूलों में हुई थी केंद्रीयकृत रसोई से भोजन की आपूर्ति
जिला शिक्षा पदाधिकारी, सहरसा के प्रतिवेदन के अनुसार, 12 सितंबर को कहरा स्थित भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर दलित उत्थान एवं शिक्षा समिति के केंद्रीयकृत रसोईघर से 144 विद्यालयों में मिड-डे मील की आपूर्ति की गई थी।
घटना के बाद विभाग ने इस आपूर्ति को भी जांच के दायरे में लिया है। विभाग के अनुसार, उस दिन भोजन प्राप्त करने वाले सभी 144 विद्यालयों के विपत्र की राशि में कटौती की गई है।
इससे यह स्पष्ट है कि जांच का दायरा केवल बसदेवा विद्यालय तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि केंद्रीयकृत रसोईघर से भोजन की आपूर्ति और उससे जुड़े पूरे सिस्टम की भी समीक्षा की जा रही है।
भोजन की गुणवत्ता से लेकर सप्लाई सिस्टम तक होगी जांच
शिक्षा मंत्री ने अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं कि जांच में सिर्फ स्कूल स्तर की जिम्मेदारी तय न हो, बल्कि मिड-डे मील की पूरी व्यवस्था की पड़ताल की जाए।
जांच में यह देखा जाएगा कि:
- भोजन तैयार करने के दौरान स्वच्छता के मानकों का पालन हुआ या नहीं।
- भोजन की गुणवत्ता की जांच की गई थी या नहीं।
- केंद्रीयकृत रसोईघर से स्कूल तक भोजन पहुंचाने की व्यवस्था में कोई लापरवाही हुई या नहीं।
- विद्यालय स्तर पर भोजन की निगरानी किस तरह की गई।
- घटना के बाद अधिकारियों की ओर से समय पर कार्रवाई हुई या नहीं।
यदि जांच में किसी पदाधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
जिला कार्यक्रम पदाधिकारी से भी स्पष्टीकरण
मामले में जिला कार्यक्रम पदाधिकारी, मिड-डे मील योजना के स्तर पर भी स्पष्टीकरण की कार्रवाई की गई है।शिक्षा मंत्री ने मिड-डे मील योजना के निदेशक को पूरे मामले की गंभीरता से निगरानी करने का निर्देश दिया है। विभाग की कोशिश है कि जांच के जरिए घटना की वास्तविक वजह सामने आए और भविष्य में ऐसी घटना की पुनरावृत्ति न हो।
रिपोर्टिंग कर रहे पत्रकार से भी मारपीट का आरोप
इस पूरे मामले में एक और गंभीर पहलू सामने आया है। बच्चों के अस्पताल पहुंचने के बाद घटना की रिपोर्टिंग करने पहुंचे एक पत्रकार के साथ सहरसा सदर अस्पताल परिसर में कथित मारपीट की घटना सामने आई है।
उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक, पत्रकार अस्पताल में घटना से जुड़ी जानकारी जुटाकर रिपोर्टिंग कर रहे थे। इसी दौरान उनके साथ कथित तौर पर मारपीट की गई। पत्रकार ने मामले में न्याय और कार्रवाई की मांग की है।
यह घटना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि मामला पहले से ही बच्चों के स्वास्थ्य और स्कूल में भोजन की गुणवत्ता से जुड़ा हुआ है। ऐसे में घटना की स्वतंत्र रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकार के साथ कथित मारपीट का आरोप मीडिया की सुरक्षा और स्वतंत्र पत्रकारिता को लेकर भी सवाल खड़े करता है। हालांकि पत्रकार से मारपीट के मामले में भी अंतिम निष्कर्ष जांच और आधिकारिक कार्रवाई के बाद ही स्पष्ट होगा।
‘बच्चों के स्वास्थ्य और सुरक्षा से समझौता नहीं’
शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने कहा कि बच्चों के स्वास्थ्य और सुरक्षा के साथ किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि मिड-डे मील योजना के तहत बच्चों को स्वच्छ, सुरक्षित, पौष्टिक और गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराना विभाग की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
मंत्री ने भोजन की गुणवत्ता, रसोईघर की स्वच्छता और पूरी आपूर्ति व्यवस्था में किसी भी स्तर पर लापरवाही पाए जाने पर जिम्मेदारी तय करने की बात कही है। उन्होंने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि स्कूलों में बच्चों के लिए सुरक्षित और स्वस्थ वातावरण सुनिश्चित किया जाए तथा मिड-डे मील योजना के सभी निर्धारित मानकों का कड़ाई से पालन कराया जाए।
सवाल सिर्फ एक स्कूल का नहीं, पूरी व्यवस्था का
सहरसा की यह घटना अब सिर्फ एक विद्यालय में भोजन की गुणवत्ता का मामला नहीं रह गई है। 144 विद्यालयों को एक ही केंद्रीयकृत रसोईघर से भोजन की आपूर्ति किए जाने की जानकारी के बाद यह सवाल भी महत्वपूर्ण हो गया है कि भोजन की गुणवत्ता और स्वच्छता की निगरानी किस स्तर पर और कितनी नियमितता से की जाती है।
अगर जांच में भोजन की तैयारी या सप्लाई सिस्टम में लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदारी तय करना जरूरी होगा। वहीं, अगर किसी स्तर पर निगरानी में कमी पाई जाती है तो उस व्यवस्था को भी दुरुस्त करने की जरूरत होगी।
दूसरी ओर, घटना की रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकार के साथ कथित मारपीट का मामला यह सवाल भी उठाता है कि संवेदनशील घटनाओं की रिपोर्टिंग के दौरान पत्रकारों को पर्याप्त सुरक्षा और स्वतंत्र माहौल कैसे उपलब्ध कराया जाए।
अब जांच रिपोर्ट का इंतजार
फिलहाल इस पूरे मामले में तीन सदस्यीय जांच टीम की रिपोर्ट महत्वपूर्ण होगी। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि बच्चों की तबीयत बिगड़ने की वास्तविक वजह क्या थी, भोजन में कथित तौर पर छिपकली मिलने की बात कितनी सही है और इस पूरे मामले में किस स्तर पर लापरवाही हुई।
शिक्षा विभाग ने कार्रवाई के साथ यह संकेत दिया है कि जांच में जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी। बच्चों की सुरक्षा, मिड-डे मील की गुणवत्ता और पत्रकार की सुरक्षा- सहरसा की इस घटना में अब इन तीनों सवालों के जवाब जांच रिपोर्ट से सामने आने का इंतजार है।
ये भी पढ़ें:-
10 साल में इंसानों को लील लेगा AI, ख़तरे में इंसानियत? जानिए टेक जगत के इस सबसे बड़े विवाद का सच
जिसे वक़्त भुला नहीं सका: रशीद जहाँ के बहाने एक इंक़लाबी विरासत की याद
खेसारी लाल यादव और अपर्णा मल्लिक की जोड़ी ने मचाया धमाल, ‘जिला छपरा से’ हुआ वायरल
