नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) की पूर्व सीईओ चित्रा रामकृष्णन की भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत लोक सेवक और लोक सेवा की परिभाषा को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दिया है। जस्टिस नवीन चावला की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि एनएसई लोकसेवा का कार्य करती है और चित्रा रामकृष्णन एनएसई का सीईओ और एमडी होने के नाते एनएसई की ओर से किए गए कार्य से खुद को अलग नहीं कर सकती हैं।
हाईकोर्ट ने चित्रा रामकृष्णन के खिलाफ अभियोजन चलाने के लिए दी गई स्वीकृति के आदेश को चुनौती देने वाली दलील को भी खारिज कर दिया। बता दें कि चित्रा रामकृष्णन को सीबीआई ने 6 मार्च 2022 को गिरफ्तार किया था।चार्जशीट में सीबीआई ने कहा है कि चित्रा ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए महत्वपूर्ण फैसले किए। स्टॉक एक्सचेंज नियामक संस्था सेबी ने 11 फरवरी 2022 को चित्रा रामकृष्णा और दूसरे आरोपियों के साथ आनंद सुब्रमण्यम की नियुक्ति में गड़बड़ी करने का आरोप लगाया था। चित्रा ने पूछताछ में कहा था कि एक रहस्यमयी योगी ई-मेल के जरिये उन्हें फैसले लेने में मदद करते थे। सेबी के आरोपों के बाद सीबीआई ने चित्रा को गिरफ्तार किया था।
इस मामले में ईडी ने मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर संजय पांडे और रवि नारायण के खिलाफ मनी लाउंड्रिंग के तहत मामला दर्ज किया था। इस मामले में सीबीआई ने अपनी जांच के दौरान संजय पांडे से जुड़ी एक फर्म आईसेक सर्विसेज प्राईवेट लिमिटेड के परिसर से कुछ बिल की रसीदें, रिकार्डिंग के नमूने , रिकार्डिंग के मूल टेप और सर्वर के साथ-साथ दो लैपटॉप बरामद किए थे। संजय पांडे पर आरोप है कि उन्होंने 4 करोड़ 54 लाख रुपए लेकर चित्रा की मदद करने के लिए एमटीएनएल के फोन लाइन टेप किए थे।
