दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने प्रतिबंधित संगठन पोपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया और उसके 20 सदस्यों के खिलाफ औपचारिक रुप से आरोप तय करने का आदेश दिया है। आज सभी आरोपी कोर्ट में पेश हुए और आरोपों से इनकार करते हुए ट्रायल का सामना करने की बात की। एडिशनल सेशंस जज प्रशांत शर्मा ने 29 जुलाई से इस मामले में ट्रायल शुरु करने का आदेश दिया।
इसके पहले 5 जून को कोर्ट ने इन आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता और यूएपीए के तहत आरोप तय किया था। कोर्ट ने सभी आरोपियों के आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए धन एकत्र करने, आपराधिक साजिश, देश के खिलाफ जंग छेड़ने, आतंकी गतिविधियों के लिए साजिश रचने इत्यादि आरोपों के तहत आरोप तय करने का आदेश दिया। कोर्ट ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 120बी, 153ए, यूएपीए की धारा 17, 18,19 20, 22बी, 38 और 39 के तहत आरोप तय करने का आदेश दिया।
कोर्ट ने पीएफआई के अलावा जिन आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया उनमें ओएम अब्दुल सलाम, ईएम अब्दुल रहमान, अनीस अहमद, अफसर पाशा, वीपीएन एलामाराम, ई अबुबकर, प्रोफेसर पी कोया, एम मोहम्मद अली जिन्ना, अब्दुल वाहिद सैत, एएस इस्माइल, मो. युनूस, मोहम्मद बशीर, शफीर केपी, जसीर केपी, शाहिद नासीर, वसीम अहमद, मो. शाकिफ, मो. फारुख रहमान और यासिर हसन शामिल हैं।
बता दें 28 सितंबर 2022 को केंद्र सरकार ने पीएफआई और उसके सहयोगी संगठनों को पांच सालों के लिए प्रतिबंधित कर दिया था। केंद्र सरकार ने यूएपीए की धारा 3(1) के अधिकारों के तहत ये प्रतिबंध लगाया था। केंद्र सरकार ने पीएफआई के सहयोगी संगठनों, रिहैब इंडिया फाउंडेशन (आरआईएफ), कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया (सीएफआई), ऑल इंडिया इमाम्स काउंसिल (एआईसीसी), नेशनल कंफेडरेशन ऑफ ह्यूमन राईट्स आर्गनाइजेशन (एनसीएचआरओ) नेशनल वुमंस फ्रंट, जूनियर फ्रंट, एम्पावर इंडिया फाउंडेशन और रिहैब फाउंडेशन, केरल को भी प्रतिबंधित किया है। एनआईए ने कई राज्यों में छापा मारकर पीएफआई के काफी सदस्यों को गिरफ्तार किया था।
