केरल के पूर्व मुख्यमंत्री, उनकी बेटी वीणा टी और दामाद पीए मोहम्मद रियास से जुड़ा मामला; सुप्रीम कोर्ट ने केरल हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच में अपील की अनुमति दी
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने कथित सीएमआरएल रिश्वत मामले में केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पिनरई विजयन, उनकी बेटी वीणा टी और उनके पति पीए मोहम्मद रियास के खिलाफ चल रही जांच पर एक सप्ताह के लिए रोक लगा दी है। जस्टिस जॉयमाल्य बागची की अध्यक्षता वाली बेंच ने विजयन और अन्य आरोपियों को केरल हाईकोर्ट के सिंगल जज के आदेश के खिलाफ डिवीजन बेंच में अपील करने की अनुमति दे दी।
यह मामला सीएमआरएल और वीणा टी से जुड़ी कंपनी ‘एक्सलॉजिक सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड’ के बीच हुए वित्तीय लेन-देन में कथित अनियमितताओं से संबंधित है। मामले में जांच और एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया को लेकर कानूनी विवाद चल रहा है।
केरल हाईकोर्ट के आदेश को दी गई थी चुनौती
15 अक्टूबर को केरल हाईकोर्ट ने पिनरई विजयन, वीणा टी और पीए मोहम्मद रियास की उन अर्जियों को खारिज कर दिया था, जिनमें उन्होंने सिंगल जज के 9 अक्टूबर के आदेश के खिलाफ अपील दायर करने की अनुमति मांगी थी।
हाईकोर्ट ने कहा था कि भ्रष्टाचार के मामले में आरोपी को एफआईआर दर्ज होने से पहले अपनी बात रखने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है। इसके बाद आरोपियों ने मामले में आगे कानूनी राहत के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।
सुप्रीम कोर्ट ने अब उन्हें केरल हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच में अपील करने की अनुमति दे दी है। साथ ही, जांच पर एक सप्ताह के लिए रोक लगा दी है।
ईडी के दावे और एसआईटी के गठन का मामला
मामले की पृष्ठभूमि सीएमआरएल और एक्सलॉजिक सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड के बीच हुए वित्तीय लेन-देन में कथित अनियमितताओं से जुड़ी है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) का दावा है कि उसे कुछ ऐसे सबूत मिले हैं, जो अपराध की ओर संकेत करते हैं। ईडी ने ये सबूत केरल पुलिस के साथ साझा किए थे।
इसके बाद राज्य सरकार ने तत्काल एफआईआर दर्ज करने के बजाय मामले की प्रारंभिक जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने का फैसला किया।
केएम शाजहां ने हाईकोर्ट में दायर की थी याचिका
वकील केएम शाजहां ने केरल हाईकोर्ट में राज्य सरकार के इस कदम को चुनौती दी थी। उन्होंने मामले में एफआईआर दर्ज करने की मांग की थी। शाजहां पूर्व मुख्यमंत्री और सीपीएम नेता वीएस अच्युतानंदन के नेता विपक्ष रहने के दौरान उनके अतिरिक्त सचिव के रूप में काम कर चुके हैं।
इस याचिका पर सुनवाई के बाद केरल हाईकोर्ट ने एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था। इसी आदेश के बाद मामले में आगे की कानूनी कार्यवाही और अपील को लेकर विवाद सामने आया।
सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश के बाद अब आरोपियों को केरल हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच में अपनी अपील रखने का अवसर मिलेगा। जांच पर लगी एक सप्ताह की रोक के दौरान मामले की आगे की कानूनी प्रक्रिया पर नजर रहेगी।
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