14 दिवसीय मेले में देशभर के शिल्पकारों के हस्तनिर्मित उत्पाद आकर्षण का केंद्र; लोकगीतों, भजनों और ब्रज की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से गूंजा परिसर
प्रयागराज। लोकगीतों की मिठास, भक्ति संगीत की गूंज और ब्रज के मयूर नृत्य की मनमोहक छटा…। दीपावली के उल्लास और भारतीय लोक संस्कृति के विविध रंगों से सजी शाम में दर्शक परंपराओं के सुरों से रूबरू हुए। उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र (संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार) की ओर से सांस्कृतिक केंद्र परिसर स्थित शिल्प हाट 14 दिवसीय दीपावली शिल्प मेले का भव्य शुभारंभ हुआ। सांस्कृतिक संध्या की शुरुआत सौदामिनी संस्कृत महाविद्यालय के बटुकों के स्वस्तिवाचन से हुई। इसके बाद गौरी एवं यथार्थ ने ‘वक्रतुंड महाकाय, सूर्यकोटि समप्रभ’ मंत्र का सस्वर पाठ कर वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
बिरहा के सुरों में झलकी लोकजीवन की संवेदना
लोकगायिका प्रियंका माधुरी ने बिरहा गायन के माध्यम से लोकजीवन की भावनाओं और पौराणिक प्रसंगों को जीवंत किया। ‘बनवा में राम गइले, सिया के हरण भइले’ जैसे गीत के जरिए उन्होंने राम के वनगमन और सीता हरण की पीड़ा को सुरों में पिरोया। वहीं, ‘बहिनिया मनमोहन की बावरी’, ‘निर्भय वीर धनुर्धर पार्थ की दुल्हनिया’ और दुर्वासा प्रसंग पर आधारित बिरहा ने श्रोताओं को लोकगायन की समृद्ध परंपरा से परिचित कराया।
इसके बाद युवा कलाकार हर्षिता सुदर्शन ने गाइए गणपति जगवंदन, जिसका रखवाला है राम, ऐसी लागी लगन पिया तोसे लगा जो ये मन ‘धरती पर आया स्वर्ग उतरकर, ऐसा त्योहार दिवाली रोशनी वाली’ और ‘नई झुलनी के छइया बलम, दोपहरिया दिलाय दा हो’ जैसे गीतों से दीपावली की उमंग और लोकसंगीत की मिठास बिखेरी।

भजनों ने बांधा समां, उपशास्त्रीय गायन ने मोहा मन
युवा कलाकार हर्षिता सुदर्शन ने ‘गाइए गणपति जगवंदन’, ‘जिसका रखवाला है राम’, ‘ऐसी लागी लगन’, ‘राम भजन कर मन’ और ‘पिया तोसे लगा जो ये मन’ की प्रस्तुति से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। भक्ति और सुरों के इस संगम के बाद डॉ. सुरेंद्र कुमार ने उपशास्त्रीय गायन प्रस्तुत कर संगीत संध्या को नई ऊंचाई दी।
ब्रज की भक्ति में रमा मयूर नृत्य
संध्या का प्रमुख आकर्षण मथुरा के गिरधर गोपाल शर्मा एवं दल की प्रस्तुति रही। कलाकारों ने ‘ब्रज वंदना—चारों धामों से निकला ब्रजधाम’ से प्रस्तुति का आगाज किया। इसके बाद ‘आज अपने कान्हा कूं मुखड़ौ दिखाय दै, घुंघटा हटाय दै राधे’ गीत पर ब्रज की लोकपरंपरा और राधा-कृष्ण की भक्ति को मंच पर साकार किया।
‘आयौ रसिया, मोर बन आयौ रसिया’ गीत पर प्रस्तुत मयूर नृत्य ने दर्शकों की खूब वाहवाही बटोरी। मोरपंख से सजे कलाकारों की लयबद्ध मुद्राओं और आकर्षक नृत्य भंगिमाओं ने ब्रज की सांस्कृतिक विरासत को जीवंत कर दिया। पूरा परिसर भक्ति और लोककला के रंगों से सराबोर नजर आया। मुख्य अतिथि के.पी. सिंह ने दीपावली शिल्प मेले का भ्रमण कर विभिन्न राज्यों से आए शिल्पकारों के हस्तनिर्मित उत्पादों का अवलोकन किया। उन्होंने शिल्पकारों से संवाद कर उनके हुनर की सराहना की और उनका उत्साहवर्धन किया।

मुख्य अतिथि विश्व हिंदू परिषद के प्रांत अध्यक्ष एवं सेवानिवृत्त आईजी के.पी. सिंह ने केंद्र निदेशक सुदेश शर्मा, श्रीमती मंजू शर्मा, उपनिदेशक डॉ. मुकेश उपाध्यायऔर सलाहकार कल्पना सहाय के साथ दीप प्रज्ज्वलित कर सांस्कृतिक संध्या का उद्घाटन किया। इस अवसर पर केंद्र निदेशक ने मुख्य अतिथि को अंग वस्त्र पौधा भेंट कर सम्मानित किया। कार्यक्रम का संचालन सुधांशु शुक्ला ने किया।
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