दिल्ली के राऊज एवेन्यू कोर्ट ने गुरुग्राम के शिकोहपुर में जमीन सौदा से जुड़े मनी लाउंड्रिंग के मामले में रॉबर्ट वाड्रा समेत 11 आरोपियों के खिलाफ दर्ज मामले की सुनवाई के दौरान ईडी ने डीएलएफ की भूमिका को लेकर सीलबंद स्टेटस रिपोर्ट दाखिल किया। स्पेशल जज सुशांत चंगोट्रा ने जांच की आगे की स्टेटस रिपोर्ट सुनवाई की अगली तिथि तक दाखिल करने का निर्देश दिया। मामले की अगली सुनवाई 21 अगस्त को होगी।
आज ईडी ने कोर्ट में जांच से संबंधित सीलबंद स्टेटस रिपोर्ट दाखिल किया। कोर्ट ने पाया कि ये स्टेटस रिपोर्ट डीएलएफ की भूमिका की जांच से जुड़ी हुई है। कोर्ट ने जांच से संबंधित ताजा स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया। बता दें कि कोर्ट ने 15 अप्रैल वाड्रा को बतौर आरोपी समन जारी करने का आदेश दिया था। समन जारी करने के आदेश को वाड्रा ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, लेकिन हाईकोर्ट ने समन पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने रॉबर्ड वाड्रा के अलावा जिन आरोपियों को समन जारी करने का आदेश दिया उनमें सत्यानंद याजी, केवल सिंह विर्क, मेसर्स स्काई लाईट हॉस्पिटैलिटी प्राईवेट लिमिटेड, मेसर्स स्काई लाईट रियल्टी प्राईवेट लिमिटेड, मेसर्स स्काई लाईट रियल अर्थ इस्टेट्स प्राईवेट लिमिटेड, मेसर्स ब्लू ब्रीज ट्रेडिंग प्राईवेट लिमिटेड, मेसर्स आर्टेक्स, मेसर्स नॉर्थ इंडिया आईटी पार्क्स प्राईवेट लिमिटेड, मेसर्स लंबोदर आर्ड एंटरप्राइजेज इंडिया प्राईवेट लिमिटेड और मेसर्स एसजीवाई प्रोपर्टीज प्राईवेट लिमिटेड शामिल हैं।
कोर्ट ने सभी आरोपियों के खिलाफ मनी लाऊंड्रिंग कानून की धारा 3 और 4 के तहत आरोपों पर संज्ञान लिया। कोर्ट ने 4 अप्रैल को फैसला सुरक्षित रख लिया था। सुनवाई के दौरान रॉबर्ट वाड्रा ने कहा था कि उसके खिलाफ मनी लाऊंड्रिंग का कोई मामला नहीं बनता है। रॉबर्ट वाड्रा की ओर से पेश वकील ने कहा था कि ईडी की ओर से दाखिल चार्जशीट पर कोर्ट को संज्ञान नहीं लेना चाहिए।
इस मामले की शुरुआत 2008 में हुई थी। गुरुग्राम के शिकोहपुर में जमीन का सौदा हुआ था। स्काई लाइट हॉस्पिटैलिटी ने साढ़े तीन एकड़ जमीन मात्र साढ़े सात करोड़ रुपये में खरीदी थी। वाड्रा इस कंपनी में डायरेक्टर थे। यह जमीन ओंकारेश्वर प्रोपर्टीज से खरीदी गई थी। इस जमीन का मालिकाना हक सिर्फ 24 घंटे में ही वाड्रा की कंपनी के नाम पर हो गया। स्काई लाइट हॉस्पिटैलिटी ने 2012 में वही जमीन डीएलएफ को 58 करोड़ रुपये में बेच दी। इससे कंपनी को बहुत ज्यादा मुनाफा हुआ। इस मामले में 2018 में एक एफआईआर दर्ज की गई थी।
