RJD नेता और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव राजभवन मार्च के जरिए पेपर लीक, बेरोजगारी, शिक्षा-व्यवस्था और सीवान में छात्र आंदोलन के दौरान AK-47 से फायरिंग की घटना के विरोध में बुधवार को सड़क पर उतरे। पटना के गांधी मैदान स्थित जेपी गोलंबर से आरजेडी नेताओं और कार्यकर्ताओं का विशाल जनसैलाब राजभवन मार्च के लिए निकला। आरजेडी ने इस मार्च को छात्रों और युवाओं के मुद्दों पर सरकार के खिलाफ बड़े राजनीतिक संघर्ष की शुरुआत के तौर पर पेश किया।
पुलिस ने मार्च को डाकबंगला चौराहे पर रोकने के लिए पहले से बैरिकेडिंग कर रखी थी। हालांकि नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव बड़ी संख्या में आरजेडी कार्यकर्ताओं और समर्थकों के साथ बैरिकेडिंग पार कर आगे बढ़ गए। इसके बाद पुलिस ने उन्हें और उनके समर्थकों को रोकने के लिए इनकम टैक्स चौराहे पर भारी नाकेबंदी कर दी।
तेजस्वी यादव यहां भी अपने कार्यकर्ताओं के साथ आगे बढ़ने की जिद पर अड़े रहे। इसके बाद पुलिस ने आरजेडी नेताओं और कार्यकर्ताओं को रोकने के लिए वाटर कैनन का इस्तेमाल किया और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव को हिरासत में ले लिया।
तेजस्वी यादव के साथ सांसद मीसा भारती समेत आरजेडी के कई बड़े नेताओं को भी पुलिस ने हिरासत में लिया।

पुलिस बस को आरजेडी कार्यकर्ताओं ने घेरा
हिरासत में लिए गए नेताओं और कार्यकर्ताओं को थाना ले जाने के लिए पुलिस ने उन्हें बस में बैठाया। लेकिन आरजेडी कार्यकर्ताओं ने बस को घेर लिया। काफी देर तक मौके पर हंगामे की स्थिति बनी रही। बाद में पुलिस ने आरजेडी के कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव समेत अन्य नेताओं और कार्यकर्ताओं को छोड़ दिया।
पुलिस ने इसके बाद सभी से पार्टी कार्यालय जाने की अपील की। तेजस्वी यादव अपने कुछ नेताओं के साथ पार्टी कार्यालय चले गए। हालांकि इसके बावजूद बड़ी संख्या में आरजेडी कार्यकर्ता घंटों इनकम टैक्स चौराहे पर डटे रहे। राजभवन मार्च में शामिल आरजेडी समर्थक केंद्र और राज्य सरकार के खिलाफ लगातार नारेबाजी करते रहे।
खास बात यह रही कि आरजेडी का यह राजभवन मार्च पार्टी के झंडे के बजाय तिरंगे के साथ निकाला गया।
तेजस्वी यादव राजभवन मार्च रोके जाने पर बोली पुलिस
प्रशासन की ओर से मार्च को निर्धारित मार्ग और अनुमति की शर्तों के मुताबिक नियंत्रित करने की कोशिश की गई। पुलिस ने डाकबंगला और इनकम टैक्स चौराहे पर बैरिकेडिंग कर भीड़ को आगे बढ़ने से रोकने की कोशिश की। जब प्रदर्शनकारी आगे बढ़ने पर अड़े रहे तो पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया।

पुलिस की कार्रवाई का उद्देश्य कानून-व्यवस्था बनाए रखना और भीड़ को निर्धारित सीमा से आगे जाने से रोकना बताया गया है। दूसरी तरफ आरजेडी ने इसे सरकार की दमनकारी कार्रवाई बताते हुए विरोध किया।
यानी एक तरफ सरकार और पुलिस इसे कानून-व्यवस्था से जोड़कर देख रही है, तो दूसरी तरफ आरजेडी इसे छात्रों और युवाओं की आवाज दबाने की कोशिश बता रही है।
बीजेपी जुमलेबाजों की पार्टी है: दीनानाथ प्रसाद यादव
तेजस्वी यादव राजभवन मार्च में शामिल आरजेडी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने केंद्र और राज्य सरकार पर कई गंभीर आरोप लगाए।
हमने दानापुर से आरजेडी नेता दीनानाथ प्रसाद यादव से जब इस राजभवन मार्च का औचित्य पूछा तो उन्होंने तपाक से कहा, “बीजेपी जुमलेबाजों की पार्टी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हों या बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी या फिर बीजेपी का कोई आम कार्यकर्ता, इन सबका एक ही काम है—झूठ बेचना और लोगों को बड़े-बड़े सपने दिखाना।”
उन्होंने कहा कि कभी हर साल दो करोड़ युवाओं को नौकरी देने का दावा करने वाले प्रधानमंत्री अब एक करोड़ युवाओं को एआई की ट्रेनिंग देने की बात कर रहे हैं। लेकिन यह सब छलावा है।
दीनानाथ प्रसाद यादव ने आरोप लगाया कि सरकार की सच्चाई उजागर करने वाले यूथ ब्रिगेड को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ‘दिमागी नक्सल’ करार दे रहे हैं।

उन्होंने सवाल उठाया, “ये कैसी सरकार है, जो अपने ही बच्चों को नक्सलवादी करार दे रही है? ऐसी सरकार को जाना ही होगा।”
उन्होंने कहा कि इसी वजह से वे लोग नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के नेतृत्व में सरकार को उखाड़ फेंकने के लिए सड़क पर उतरे हैं।
अब्दुलबारी सिद्दीकी बोले- हम जेपी आंदोलन के सिपाही
आरजेडी के वरिष्ठ नेता अब्दुलबारी सिद्दीकी ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार और बिहार की सम्राट चौधरी सरकार पर जोरदार हमला बोला।
उन्होंने कहा, “हम जेपी आंदोलन के सिपाही हैं। उस दौर में भी देश में कुछ ऐसा ही माहौल था। उस वक्त भी सरकार के खिलाफ लोगों का गुस्सा सुलग रहा था। हम आज उसी दौर को देख रहे हैं।”
सिद्दीकी ने दावा किया कि देश में एक बड़ा जनआंदोलन तय है, क्योंकि मौजूदा सरकार ने हर मोर्चे पर अपना विश्वास खो दिया है। जब सरकार की साख में बट्टा लग जाता है तो जनता उसे उखाड़ फेंकने के लिए बेचैन हो जाती है। आज छात्रों और युवाओं में वही बेचैनी दिखाई दे रही है।
सीवान में छात्र आंदोलन के दौरान AK-47 से हुई फायरिंग की घटना को लेकर उन्होंने कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि सरकार एक तरफ युवाओं पर बल प्रयोग कर रही है और दूसरी तरफ उन्हें ‘दिमागी नक्सल’ बता रही है।

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार का अंत अब नजदीक है और लोगों को इसे उखाड़ फेंकने के लिए आगे आना होगा।
हालांकि सीवान की घटना को लेकर पुलिस का पक्ष अलग है। पुलिस ने संबंधित जवान को निलंबित कर विभागीय कार्रवाई शुरू की थी और बताया था कि जवान ने भीड़ से घिरने के बाद अपनी और सरकारी संपत्ति की सुरक्षा के लिए हवा में फायरिंग की थी। आरजेडी और प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि छात्रों के आंदोलन के दौरान AK-47 का इस्तेमाल कर फायरिंग की गई। इस पूरे मामले में हथियार के इस्तेमाल, फायरिंग की परिस्थितियों और कमांड-चेन को लेकर विपक्ष सरकार से जवाब मांग रहा है।
जय प्रकाश यादव ने पूछा- बच्चों पर AK-47 से गोली क्यों चली?
आरजेडी नेता जय प्रकाश यादव ने भी बीजेपी सरकार की जमकर आलोचना की।
उन्होंने सवाल उठाया, “कोई लोकतांत्रिक सरकार अपने बच्चों पर AK-47 से गोलियां चलाती है? ये सरकार सत्ता में क्यों है? इसे तो उखाड़ फेंकना चाहिए।”
उन्होंने पूछा कि जिन बच्चों पर AK-47 से गोली चलने की घटना सामने आई, उन्होंने ऐसा क्या किया था कि उनके खिलाफ इतनी ताकत का इस्तेमाल करना पड़ा? सरकार को इसका जवाब देना चाहिए।

जय प्रकाश यादव ने दावा किया कि लोगों पर जिस तरह का दमन बरपाया जा रहा है, उससे साफ है कि यह सरकार ज्यादा दिनों तक चलने वाली नहीं है। जनता इस सरकार को उखाड़ फेंकेगी और इसकी शुरुआत हो चुकी है।
इस दौरान उन्होंने नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की जमकर तारीफ भी की।
युवाओं को इंसाफ मिलने तक सड़क से सदन तक लड़ेंगे: तेजस्वी
नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने कहा कि युवाओं के हक में यह लड़ाई जारी रहेगी। युवाओं को इंसाफ मिलने तक आरजेडी इस लड़ाई को सड़क से सदन तक लड़ेगी।
तेजस्वी यादव ने कहा कि मोदी और सम्राट सरकार डरी हुई है। इसलिए उन्हें हिरासत में लिया गया। उन्होंने कहा कि वे डरने वालों में से नहीं हैं और न ही झुकने वालों में से हैं।
तेजस्वी ने कहा कि वे जल्द ही फिर सड़क पर उतरेंगे।
आरजेडी ने सरकार से पूछे 15 सवाल
हम आपको बता दें कि राजभवन मार्च से पहले आरजेडी ने सोशल मीडिया पर ‘छात्र-छात्राओं के सवाल, सरकार दे जवाब!’ शीर्षक के साथ सवालों की एक लंबी फेहरिस्त जारी की थी और सरकार से इन सवालों के जवाब मांगे थे।
आरजेडी के प्रमुख सवाल इस प्रकार हैं-
- छात्रों पर गोलीबारी करने वाले सिपाही के पास AK-47 कैसे पहुंची? निलंबित सिपाही को AK-47 किस यूनिट या शस्त्रागार से जारी की गई?
- हथियार जारी करने का आदेश किसने दिया? AK-47 जैसे आधुनिक हथियार के आवंटन की पूरी कमांड-चेन की भूमिका सामने आनी चाहिए।
- आरोपित सिपाही किस यूनिट में तैनात था? क्या वह नियमित जिला पुलिस का हिस्सा था? क्या वह एसपी की सुरक्षा में तैनात था या STF/SIT जैसी विशेष इकाई से संबद्ध था?
- क्या वह आतंकवाद-विरोधी ऑपरेशन से जुड़ा था? यदि वह विशेष बल का जवान था तो उसकी वास्तविक तैनाती और जिम्मेदारी क्या थी?
- क्या इससे पहले कभी छात्र प्रदर्शन में AK-47 का इस्तेमाल हुआ था? सामान्य कानून-व्यवस्था या छात्र प्रदर्शन की ड्यूटी में इतनी मारक क्षमता वाले हथियार की जरूरत क्यों पड़ी?
- क्या AK-47 लेकर भीड़ नियंत्रण की अनुमति थी? Crowd Management के SOP का पालन क्यों नहीं किया गया?
- फायरिंग का आदेश किसने दिया? जिले के पुलिस अधीक्षक पर अभी तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
- कितनी गोलियां चलीं और कितने राउंड जारी किए गए थे? हथियार के साथ जारी किए गए और इस्तेमाल हुए कारतूसों का हिसाब सार्वजनिक होना चाहिए।
- इस्तेमाल किए गए हथियार का बैलिस्टिक और फॉरेंसिक परीक्षण हुआ या नहीं?
- क्या बॉडी कैमरा या वीडियो रिकॉर्डिंग उपलब्ध है? फायरिंग से ठीक पहले और बाद की पूरी गतिविधि सामने आनी चाहिए।
- यदि AK-47 गलत ड्यूटी पर पहुंची तो केवल सिपाही को निलंबित करना पर्याप्त है या हथियार जारी करने वाले अधिकारी की भी जवाबदेही तय होगी?
- कमांड-चेन की जांच होगी या नहीं? जांच केवल गोली चलाने वाले जवान तक सीमित न रहकर ऊपर के अधिकारियों तक क्यों नहीं पहुंचनी चाहिए?
- AK-47 जैसे विशेष आधुनिक हथियार के इस्तेमाल में प्रशिक्षण, आदेश और जवाबदेही तीनों महत्वपूर्ण हैं। लेकिन इस घटना में वरीय अधिकारियों की जवाबदेही तय क्यों नहीं हुई?
- गृह विभाग की भूमिका और जिम्मेदारी क्या है? गृह विभाग को स्पष्ट करना चाहिए कि हथियारों की तैनाती और कानून-व्यवस्था की इस पूरी व्यवस्था की निगरानी कैसे होती है।
- क्या इस मामले की विभागीय जांच पर्याप्त होगी? क्या मामला केवल अनुशासनात्मक कार्रवाई तक सीमित रहेगा या स्वतंत्र जांच में हथियार आवंटन और कमांड-चेन की भी पड़ताल होगी?
अब तेजस्वी के सामने सिर्फ आंदोलन नहीं, खुद को साबित करने की चुनौती
राज्य की जनता और खासकर युवा यह सवाल पूछ रहे हैं कि इस पूरे मामले में मुख्यमंत्री की ओर से क्या जवाब आता है। अब देखना होगा कि इस राजभवन मार्च के बाद आरजेडी का अगला कदम क्या होता है।
क्योंकि आरजेडी नेता तेजस्वी यादव के सामने छात्रों और युवाओं की लड़ाई को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी तो है ही, इसके साथ ही उनके सामने खुद को साबित करके दिखाने की चुनौती भी है।
उनके राजनीतिक विरोधी उन पर ‘भगोड़ा’ होने का ठप्पा लगाने की कोशिश करते रहे हैं। ऐसे में तेजस्वी यादव के लिए यह लड़ाई सिर्फ सरकार के खिलाफ आंदोलन तक सीमित नहीं है। उन्हें अपने ऊपर लगाए जा रहे इस राजनीतिक आरोप का भी जवाब देना होगा।
राजभवन मार्च से तेजस्वी यादव ने यह संदेश जरूर दिया है कि वह युवाओं के मुद्दे पर सड़क छोड़ने के मूड में नहीं हैं। अब असली परीक्षा यह होगी कि इस आंदोलन को वह कितनी दूर तक ले जा पाते हैं और सरकार को जवाब देने के लिए कितनी राजनीतिक जमीन तैयार कर पाते हैं।
यही उनके राजनीतिक नेतृत्व की अगली बड़ी परीक्षा भी होगी।
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