PART 4 | 3 हजार 8 एकड़ का कोर एरिया का असली Land Use
Map 21 खोलता है 3 हजार 8 एकड़ का कोर एरिया का Land Use; लेकिन गांवों की पूरी पहचान के लिए Cadastral और Revenue Records से cross-check जरूरी
पटना। पाटलिपुत्र ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप के 81,730 एकड़ के स्पेशल एरिया में करीब 3 हजार 8 एकड़ का कोर एरिया सबसे पहले विकसित किए जाने वाले हिस्से के रूप में चिन्हित है। बिहार सरकार के प्रस्तावित डेवलपमेंट प्लान-2047 के मुताबिक यह कोर एरिया पुनपुन कम्यूनिटी डेवलपमेंट ब्लॉक में है और इसमें 19 रेवेन्यू विलेज शामिल हैं। अब सवाल सिर्फ यह नहीं है कि ये 19 गांव कौन-से हैं, बल्कि बड़ा सवाल यह है कि इन गांवों के भीतर जमीन का इस्तेमाल किस तरह प्रस्तावित किया गया है।
सबसे पहले Core Area का नक्शा समझिए
बिहार सरकार के प्रस्तावित डेवलपमेंट प्लान-2047 की मैप लिस्ट में 3 हजार 8 एकड़ का कोर एरिया के लिए अलग से “प्रस्तावित लैंड यूज मैप ऑफ कोर एरिया” दिया गया है। इसके साथ प्रस्तावित लैंड यूज मैप विद कैडस्ट्रल और प्रस्तावित लैंड यूज विद सेटलमेंट्स भी मौजूद हैं। यानी योजना में जमीन को केवल एक बड़े क्षेत्र के रूप में नहीं, बल्कि अलग-अलग लैंड यूज और कैडस्ट्रल संदर्भ में भी देखने की व्यवस्था की गई है।
नक्शे में Residential जमीन भी है, लेकिन पूरी जमीन Residential नहीं
3 हजार 8 एकड़ का कोर एरिया के प्रस्तावित लैंड यूज मैप को देखने पर एक बात साफ होती है कि 3 हजार 8 एकड़ का कोर एरिया का पूरा हिस्सा रेजिडेंशियल डेवलपमेंट के लिए नहीं रखा गया है। नक्शे में रेजिडेंशियल के लिए अलग हिस्से चिन्हित हैं, जबकि दूसरे हिस्सों में पब्लिक पर्पस, कमर्शियल, रिक्रिएशन, ग्रीन बेल्ट, रोड्स, ट्रांजिट और दूसरी सुविधाओं के लिए जमीन दिखाई गई है।
यानी किसी गांव का कोर एरिया में आ जाना यह नहीं बताता कि वहां की पूरी जमीन पर घर या अपार्टमेंट बनेंगे। एक ही क्षेत्र के भीतर अलग-अलग लैंड यूज प्रस्तावित हो सकते हैं। जहां ट्रांजिट हब है, वहां जमीन की कीमत का सवाल और बड़ा हो जाता है।
पाटलिपुत्र ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप की पूरी योजना पढ़िए FreelancerPost की Pillar Story PART 1
81,730 एकड़ की टाउनशिप के लिए जमीन कैसे जुटाएगी सरकार? जानिए Freelancerpost की Land Story PART 2

मैप 21 में कोर एरिया के बीच में बड़े सड़क कॉरिडोर और उनके आसपास ट्रांजिट हब यानी TH के चिन्ह दिखाई देते हैं। डेवलपमेंट प्लान के अनुसार नॉर्थ-साउथ और ईस्ट-वेस्ट एक्सियल रोड्स दोनों 90 मीटर चौड़े प्रस्तावित हैं। इन दोनों के इंटरसेक्शन पर सेंट्रल ट्रांजिट हब विकसित करने की योजना है। इसके अलावा प्रस्तावित जट डूमरी रेलवे जंक्शन के पास मल्टी-मॉडल ट्रांजिट हब यानी MMTH का प्रावधान है। प्लान के मुताबिक यहां MRTS, RRTS, Regional Rail, Bus Services और दूसरे पब्लिक ट्रांसपोर्ट मोड्स को जोड़ा जाना है। इसका सीधा मतलब है कि कोर एरिया की कुछ जमीन पर सिर्फ सड़क नहीं, बल्कि भविष्य की पूरी मोबिलिटी नेटवर्क का असर पड़ सकता है।
CBD के आसपास High-Density Mixed-Use Development
बिहार सरकार के प्रस्तावित डेवलपमेंट प्लान-2047 में सेंट्रल बिजनेस डिस्ट्रिक्ट यानी CBD को 3 हजार 8 एकड़ का कोर एरिया के भीतर और उसके आसपास विकसित करने का प्रस्ताव है। प्लान के मुताबिक सीबीडी टाउनशिप का प्रिंसिपल कमर्शियल, फाइनेंशियल, एडमिनिस्ट्रेटिव और कल्चरल सेंटर होगा। इस क्षेत्र में कमर्शियल ऑफिसेज, फाइनेंशियल इंस्टिट्यूशन, गवर्नमेंट ऑफिसेज, कन्वेंशन एंड एग्जिबिशन सेंटर, होटल एंड हॉस्पिटैलिटी, रिटेल एंड एंटरटेनमेंट और हाई-डेंसिटी मिक्स्ड-यूज डेवलपमेंट जैसी गतिविधियों की योजना है। यानी CBD के आसपास की जमीन का लैंड यूज सामान्य रेजिडेंशियल एरिया से अलग हो सकता है।
नक्शे में Public Purpose के लिए भी जमीन रखी गई है
प्रस्तावित डेवलपमेंट प्लान-2047 के प्रस्तावित लैंड यूज फ्रेमवर्क में पब्लिक पर्पस एरिया को शिक्षा, अस्पताल, गवर्नमेंट ऑफिसेज, इमरजेंसी सर्विस, पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन और सिविक इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए रखा गया है। प्लान में 3 हजार 8 एकड़ का कोर एरिया के पश्चिम की ओर एक मेजर गवर्नमेंट एडमिनिस्ट्रेटिव कॉम्प्लेक्स का भी प्रस्ताव है। इसलिए जिस किसान की जमीन ऐसे लैंड यूज में आती है, उसके लिए जमीन का असर रेजिडेंशियल या कमर्शियल लैंड यूज से बिल्कुल अलग हो सकता है।

ग्रीन बेल्ट और पानी के लिए भी जमीन छोड़ी गई है
कोर एरिया के नक्शे में ग्रीन बेल्ट, स्ट्रीम एंड कैनाल और वाटरबॉडी जैसे पर्यावरणीय हिस्सों को भी दिखाया गया है। पूरे टाउनशिप की ब्लू-ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर स्ट्रैटेजी में पुनपुन, दरधा और फल्गु रिवर, आहर-पाइन सिस्टम, पॉन्ड्स, वेटलैंड और ड्रेनेज चैनल को प्लानिंग फ्रेमवर्क में शामिल किया गया है। इसका मतलब यह है कि जमीन का हर हिस्सा यानी 3 हजार 8 एकड़ का कोर एरिया को कंस्ट्रक्शन के लिए उपलब्ध मान लेना सही नहीं होगा। कुछ हिस्से पर्यावरणीय और ड्रेनेज फंक्शंस के लिए भी सुरक्षित रखे जा सकते हैं।
नक्शे में Fintech और IT Park जैसे संकेत भी
3 हजार 8 एकड़ का कोर एरिया के मैप में फिनटेक और आईटी पार्क जैसे लेबल भी दिखाई देते हैं। डेवलपमेंट प्लान में फिनटेक सिटी को जैतिया मौजा, फतुहा ब्लॉक में करीब 242 एकड़ में प्रस्तावित किया गया है। प्लान इसे फाइनेंशियल सर्विस, इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, डिजिटल इनोवेशन और नॉलेज-बेस्ड इंडस्ट्रीज के हब के रूप में देखता है। इससे यह समझ आता है कि टाउनशिप की प्लानिंग सिर्फ हाउसिंग प्रोजेक्ट नहीं है। रेजिडेंशियल के साथ इकोनॉमी और एंप्लॉयमेंट-जनरेटिंग एक्टिविटीज के लिए भी अलग-अलग लैंड यूज तैयार किए गए हैं।
19 गांवों के नाम: यहां एक जरूरी सावधानी
सरकारी डेवलपमेंट प्लान स्पष्ट रूप से कहता है कि 3 हजार 8 एकड़ का कोर एरिया में 19 रेवेन्यू विलेज हैं। लेकिन 3 हजार 8 एकड़ का कोर एरिया का प्रपोज्ड लैंड यूज मैप यानी मैप-21 इन 19 गांवों के नाम अलग-अलग लिखकर नहीं दिखाता। इसलिए केवल इस मैप के आधार पर 19 गांवों की सूची तैयार करना सुरक्षित नहीं होगा।

सही सूची के लिए रेवेन्यू विलेज नोटिफिकेशन, कैडस्ट्रल मैप, सेटलमेंट मैप और जमीन के रेवेन्यू रिकॉर्ड्स को एक-दूसरे से मिलाना जरूरी होगा। यही वह क्रॉस-चेक है जिससे यह पता चलेगा कि कौन-सा गांव कोर एरिया की सीमा में किस हिस्से से जुड़ा है और किस जमीन का प्रस्तावित लैंड यूज क्या है।
सबसे अहम सवाल: किसकी जमीन पर क्या?
अब इस पूरी योजना की असल तस्वीर सामने आता है। 3 हजार 8 एकड़ का कोर एरिया में एक तरफ रेजिडेंशियल लैंड यूज है, दूसरी तरफ पब्लिक पर्पस, कमर्शियल, रिक्रिएशन, ग्रीन बेल्ट, रोड्स और ट्रांजिट से जुड़ी जमीन। इसका मतलब है कि 3 हजार 8 एकड़ का कोर एरिया के भीतर जमीन के भविष्य का एक ही जवाब नहीं है। किसी किसान की जमीन रेजिडेंशियल एरिया में जा सकती है, किसी की रोड रिजर्वेशन में, किसी की पब्लिक पर्पस में और किसी की ग्रीन बेल्ट या दूसरे लैंड यूज में। इन सभी का जमीन के इस्तेमाल और भविष्य की कीमत पर अलग-अलग असर पड़ सकता है।
Freelancer Post की पड़ताल अब जमीन तक पहुंचेगी
पार्ट-3 में हमने जाना कि 3 हजार 8 एकड़ का कोर एरिया इस नए शहर के शुरुआती विकास का केंद्र है। पार्ट-4 का नक्शा यह दिखाता है कि इस कोर एरिया के भीतर जमीन एक जैसी नहीं है। यहां Residential से लेकर Public Purpose, Commercial, Recreation, Green Belt और Transit से जुड़ी अलग-अलग प्लानिंग दिखाई गई है।
लेकिन सबसे बड़ा सवाल अभी बाकी है- इन Land Use के नीचे कौन-सी जमीन और किस गांव के कौन-से हिस्से आ रहे हैं?

किस किसान की जमीन Residential होगी? किसकी जमीन Road में जाएगी? किसकी जमीन Public Purpose के लिए चिन्हित है? किस हिस्से में Transit Hub या दूसरी बड़ी Infrastructure Facility आएगी?
यही सवाल हमें अगले स्तर की पड़ताल तक ले जाता है।
Part 5 में हम खोलेंगे जमीन का अगला नक्शा
अब Cadastral Map और Settlement Map को Proposed Land Use Map के साथ मिलाकर देखा जाएगा। वहां से यह पता लगाने की कोशिश होगी कि 19 Revenue Villages में किस गांव की कौन-सी जमीन किस Proposed Land Use में आती है।
यानी अगली कड़ी में सवाल सिर्फ “क्या बनेगा?” का नहीं होगा- सवाल होगा, “किसकी जमीन पर क्या बनेगा?”
पाटलिपुत्र ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप: पूरी पड़ताल
Part 1: 81,730 एकड़ की टाउनशिप का पूरा प्लान
Part 2: जमीन कैसे जुटाएगी सरकार?
Part 3: 3,008 एकड़ का Core Area
Part 4: 3,008 एकड़ का असली Land Use
Part 5: किसकी जमीन पर क्या बनेगा? Coming Soon
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