नई दिल्ली। NALSAR छात्र BCI विवाद को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के सर्कुलर पर कड़ी नाराजगी जताई है। हैदराबाद स्थित नेशनल एकेडमी ऑफ लीगल स्टडीज एंड रिसर्च (NALSAR) के अंतिम वर्ष के लॉ छात्रों के नामांकन को लेकर जारी सर्कुलर पर CJI ने BCI के रुख को गलत बताया। हैदराबाद स्थित नेशनल एकेडमी ऑफ लीगल स्टडीज एंड रिसर्च (NALSAR) के अंतिम वर्ष के लॉ छात्रों के नामांकन को लेकर बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के सर्कुलर पर सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने कड़ी नाराजगी जताई है। CJI ने कहा कि यह मामला उनके और छात्रों के बीच का है और BCI को इसमें हस्तक्षेप करने की जरूरत नहीं थी।
सुप्रीम कोर्ट ने BCI को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि NALSAR या किसी अन्य नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के छात्रों और फैकल्टी के खिलाफ इस मामले में कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाए।
CJI सूर्यकांत बोले- छात्रों को विरोध करने का अधिकार
सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने कहा कि वह अपने छात्र जीवन में भी छात्र गतिविधियों में सक्रिय रूप से शामिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि भले ही छात्रों का रुख गलत हो, फिर भी उन्हें अपनी बात रखने और विरोध करने का अधिकार है।
CJI ने BCI के हस्तक्षेप पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस मामले का BCI से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने इसे अपने और छात्रों के बीच का संवाद बताया।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि NALSAR सहित किसी भी नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी या लॉ यूनिवर्सिटी के छात्रों अथवा फैकल्टी के खिलाफ इस मामले के आधार पर कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी। BCI को मामले में अपना जवाब दाखिल करने के लिए नोटिस दिया गया है।
NALSAR छात्र BCI विवाद क्या है?
13 अगस्त को BCI के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा के हस्ताक्षर से एक सर्कुलर जारी किया गया था। इसमें NALSAR के 2026 बैच के छात्रों के नामांकन को लेकर निर्देश दिए गए थे। यह कार्रवाई उन छात्रों के विरोध से जुड़ी थी, जिन्होंने विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में CJI सूर्यकांत को मुख्य अतिथि बनाए जाने पर आपत्ति जताई थी।
BCI के शुरुआती निर्देश के बाद राज्य बार काउंसिलों को NALSAR के 2026 बैच के स्नातकों का बतौर अधिवक्ता नामांकन रोकने को कहा गया था। इस फैसले का कानूनी समुदाय और अन्य लोगों की ओर से विरोध हुआ।
विरोध के बाद BCI ने वापस लिया फैसला
BCI के फैसले के बाद इसका विरोध तेज हो गया। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन समेत कई लोगों और संगठनों की ओर से इस कार्रवाई पर सवाल उठाए गए।
इसके बाद BCI ने अपने शुरुआती निर्देश को वापस ले लिया। बाद में BCI चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा ने कहा कि NALSAR के 2026 बैच के छात्रों की भूमिका की समीक्षा के बाद कार्यवाही बंद करने का फैसला लिया गया है। BCI के अनुसार, बैच के छात्रों की किसी तरह की अशांति या आंदोलन में भूमिका नहीं पाई गई और अब NALSAR के खिलाफ आगे किसी कार्रवाई की जरूरत नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा मामला
BCI की कार्रवाई के खिलाफ मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने BCI के कदम पर गंभीर सवाल उठाए।
कोर्ट ने कहा कि छात्रों के विरोध या असहमति को लेकर इस तरह की कार्रवाई उचित नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने BCI से जवाब मांगा है और मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद रखी गई है।
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