पटना। बिहार में राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय यानी National School of Drama (NSD) का नया कैंपस स्थापित करने को केंद्र सरकार की सहमति मिल गई है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के अनुरोध पर मिली इस मंजूरी को बिहार के कला और रंगमंच जगत के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के प्रति आभार जताते हुए कहा है कि बिहार में NSD कैंपस राज्य की समृद्ध नाट्य और प्रदर्शन कला परंपरा को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान और नई संभावनाएं देगा।
लेकिन बिहार में NSD कैंपस खोले जाने के फैसले का मतलब सिर्फ बिहार में एक नया संस्थान खुलना नहीं है। अगर बिहार में NSD कैंपस अपनी पूरी क्षमता के साथ विकसित होता है तो इसका असर अभिनय सीखने वाले युवाओं से लेकर रंगमंच, स्टेज डिजाइन, तकनीकी काम, लोककला, थिएटर रिसर्च, बच्चों की थिएटर शिक्षा और आगे चलकर फिल्म-OTT के लिए तैयार होने वाली प्रतिभाओं तक पहुंच सकता है।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि बिहार में NSD कैंपस आने के बाद राज्य में आखिर क्या बदलेगा और इसका फायदा किसे मिलेगा?
NSD क्या है और बिहार के लिए इसकी जरूरत क्यों महत्वपूर्ण है?
राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय की स्थापना 1959 में हुई थी। यह सिर्फ अभिनय सिखाने वाला संस्थान नहीं है। NSD ने देश में थिएटर को कई दिशाओं में विकसित करने के साथ अभिनेता, निर्देशक, डिजाइनर और थिएटर शिक्षकों की पीढ़ियां तैयार की हैं। NSD का बेंगलुरु केंद्र भी दिल्ली से बाहर थिएटर शिक्षा की जरूरत को देखते हुए विकसित किया गया था।
यानी बिहार में NSD का कैंपस बनने का अर्थ केवल कुछ युवाओं को अभिनय की ट्रेनिंग मिलना नहीं है। इसका मतलब बिहार में पेशेवर थिएटर प्रशिक्षण का एक संस्थागत केंद्र तैयार होना है।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने क्या कहा?
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने केंद्र सरकार की मंजूरी के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के प्रति आभार जताया है।

मुख्यमंत्री के मुताबिक बिहार की सांस्कृतिक विरासत बेहद समृद्ध है। उन्होंने कालिदास, रामवृक्ष बेनीपुरी और भिखारी ठाकुर जैसी विभूतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य की लोक नाट्य और प्रदर्शन कलाओं की अपनी विशिष्ट परंपरा रही है।
उन्होंने कहा कि बिहार में NSD कैंपस बनने से बिहार के युवा कलाकारों को पेशेवर नाट्य प्रशिक्षण, स्टेजक्राफ्ट, प्रदर्शन कला और उन्नत शोध के अवसर राज्य में ही मिल सकेंगे। इससे प्रतिभाशाली कलाकारों को विशेष प्रशिक्षण के लिए राज्य से बाहर जाने की जरूरत कम होगी और बिहार की लोक नाट्य परंपराओं तथा आधुनिक रंगमंच के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हो सकेगा।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि बिहार सरकार बिहार में NSD कैंपस के लिए उपयुक्त जमीन उपलब्ध कराने की दिशा में काम कर रही है। इसके अलावा भवन निर्माण की स्वीकृत लागत का 50 प्रतिशत राज्यांश बिहार सरकार वहन करेगी। कैंपस की जल्द स्थापना के लिए राज्य सरकार प्रशासनिक सहयोग भी देगी।
मुख्यमंत्री ने इसे केवल एक संस्थान की स्थापना नहीं, बल्कि बिहार की सांस्कृतिक विरासत, युवा प्रतिभाओं और आधुनिक रंगमंच के भविष्य में निवेश बताया है।
कला एवं संस्कृति मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार ने क्या कहा?
बिहार में NSD कैंपस खोलने की मंजूरी पर कला एवं संस्कृति मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार ने भी प्रसन्नता जताई है।

मंत्री ने कहा कि बिहार में NSD सेंटर खोलने की केंद्र सरकार की मंजूरी राज्य की गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत को नई ऊंचाई देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के प्रति आभार व्यक्त किया।
डॉ. प्रमोद कुमार के मुताबिक बिहार में NSD कैंपस के माध्यम से बिहार के युवा कलाकारों को अभिनय, रंगमंच, स्टेजक्राफ्ट, प्रदर्शन कला और इससे जुड़े दूसरे क्षेत्रों में बेहतर एवं संस्थागत प्रशिक्षण के अवसर मिलेंगे।
उन्होंने कहा कि इससे राज्य के प्रतिभाशाली युवाओं को अपनी कला को निखारने और राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने के लिए बेहतर मंच मिलेगा।
मंत्री ने बिहार की कला और सांस्कृतिक परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य ने कला, साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र में अनेक प्रतिभाओं को जन्म दिया है। बिहार में NSD कैंपस जैसे प्रतिष्ठित संस्थान की मौजूदगी से बिहार की समृद्ध नाट्य परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने और उसे राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक पहचान दिलाने में मदद मिलेगी।
सबसे बड़ा बदलाव: अब प्रतिभा को प्रशिक्षण के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा?
बिहार में रंगमंच की प्रतिभाओं की कमी नहीं है। चुनौती अक्सर सुविधाओं, संस्थागत प्रशिक्षण और राष्ट्रीय स्तर के मंच की रही है। बिहार में NSD कैंपस इस स्थिति को बदल सकता है।
अभी बिहार का कोई युवा यदि उच्चस्तरीय थिएटर प्रशिक्षण चाहता है तो उसे दिल्ली या दूसरे शहरों की ओर देखना पड़ सकता है। बिहार में NSD कैंपस आने पर कम से कम एक बड़ा प्रशिक्षण केंद्र बिहार में उपलब्ध होगा।
इससे यात्रा, रहने और बाहर जाकर प्रशिक्षण लेने से जुड़ी लागत कम होने की संभावना है।
हालांकि यह भी साफ है कि बिहार में NSD कैंपस खुलने का मतलब यह नहीं होगा कि हर इच्छुक व्यक्ति को सीधे प्रवेश मिल जाएगा। प्रवेश, सीटों की संख्या, पाठ्यक्रम और चयन प्रक्रिया की आधिकारिक जानकारी NSD की ओर से सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगी।
फायदा सिर्फ अभिनेता को नहीं, पूरी थिएटर इंडस्ट्री को
NSD को सिर्फ Acting School समझना इस फैसले के प्रभाव को छोटा करके देखना होगा।
थिएटर की एक पूरी दुनिया होती है।
किसी नाटक को मंच तक पहुंचाने में अभिनेता के अलावा जरूरत होती है-
- निर्देशक
- नाटककार
- स्टेज डिजाइनर
- लाइट डिजाइनर
- साउंड डिजाइनर
- कॉस्ट्यूम डिजाइनर
- मेकअप आर्टिस्ट
- स्टेज मैनेजर
- प्रोडक्शन मैनेजर
- थिएटर शिक्षक
- रिसर्चर
NSD जैसी संस्थागत मौजूदगी इन सभी क्षेत्रों में प्रशिक्षण और विशेषज्ञता के अवसर बढ़ा सकती है।
यानी इसका असर मंच पर दिखाई देने वाले कलाकारों से लेकर मंच के पीछे काम करने वाले तकनीकी लोगों तक जा सकता है।
बिहार की लोककला को मिल सकता है आधुनिक मंच
यह NSD कैंपस का शायद सबसे महत्वपूर्ण सांस्कृतिक फायदा हो सकता है। बिहार की पहचान सिर्फ हिंदी रंगमंच तक सीमित नहीं है। यहां भोजपुरी, मैथिली, मगही और दूसरी क्षेत्रीय भाषाओं की समृद्ध लोक परंपराएं हैं।
भिखारी ठाकुर की बिदेसिया परंपरा इसका बड़ा उदाहरण है।
अगर NSD के प्रशिक्षण, शोध और मंचीय गतिविधियों का जुड़ाव बिहार की स्थानीय रंग परंपराओं से होता है तो लोकनाट्य को आधुनिक मंचीय तकनीक, डिजाइन और शोध के साथ जोड़ा जा सकता है।
मुख्यमंत्री ने भी NSD कैंपस को बिहार की लोक नाट्य परंपराओं और आधुनिक रंगमंच के बीच बेहतर समन्वय से जोड़ा है।

लोककलाओं के दस्तावेजीकरण का रास्ता भी खुल सकता है
बिहार की कई लोककलाएं कलाकारों और मौखिक परंपराओं के जरिए पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ी हैं।
ऐसी कलाओं का व्यवस्थित दस्तावेजीकरण, शोध और मंचीय प्रस्तुति जरूरी है।
NSD की मौजूदगी से भविष्य में बिहार की लोकनाट्य परंपराओं पर-
Research → Documentation → Training → Production → Festival
का एक पूरा मॉडल विकसित किया जा सकता है।
यह अभी कोई घोषित सरकारी योजना नहीं है, लेकिन NSD के प्रशिक्षण और शोध की प्रकृति को देखते हुए यह बिहार के लिए एक महत्वपूर्ण संभावित अवसर हो सकता है।
बच्चों और स्कूल-कॉलेज के छात्रों तक भी पहुंच सकता है असर
NSD की गतिविधियां केवल पेशेवर कलाकारों तक सीमित नहीं रही हैं। NSD की Theatre-in-Education Company बच्चों के साथ थिएटर, प्रशिक्षण और कार्यशालाओं के क्षेत्र में काम करती है। 2026 के NSD कार्यक्रमों में भी बच्चों और थिएटर शिक्षा से जुड़े कार्यक्रम दिखाई देते हैं।
अगर बिहार में भी इस तरह के कार्यक्रमों का विस्तार होता है तो स्कूल और कॉलेज के विद्यार्थियों को थिएटर के जरिए—
- आत्मविश्वास
- संवाद कौशल
- अभिव्यक्ति
- रचनात्मकता
- टीमवर्क
जैसे कौशल विकसित करने का अवसर मिल सकता है। इसलिए NSD का फायदा सिर्फ उन युवाओं तक सीमित नहीं होगा जो अभिनेता बनना चाहते हैं।
बिहार के मौजूदा कलाकारों को भी मिलेगा फायदा
बिहार में NSD कैंपस आने का फायदा सिर्फ नए छात्रों को ही मिले, ऐसा जरूरी नहीं है। बिहार में पहले से काम कर रहे थिएटर समूहों, निर्देशकों और कलाकारों के लिए भी workshops, masterclasses, festivals, collaborations और राष्ट्रीय स्तर के थिएटर नेटवर्क से जुड़ने के अवसर पैदा हो सकते हैं।
NSD के आधिकारिक कार्यक्रमों में बिहार से जुड़े कलाकारों की मौजूदगी पहले से दिखाई देती है।
उदाहरण के लिए 2026 के भारत रंग महोत्सव के कार्यक्रम में बिहार के नवादा से जुड़े NSD-trained थिएटर प्रोफेशनल राजनिश कुमार का उल्लेख है। वहीं बेगूसराय के अमरेश कुमार ने भी NSD से तीन वर्षीय अभिनय प्रशिक्षण पूरा किया और बाद में NSD की Theatre-in-Education Company से जुड़े।
यह बताता है कि बिहार की प्रतिभाएं NSD तक पहले भी पहुंचती रही हैं। नया कैंपस इस दूरी को कम कर सकता है।
रोजगार का एक नया सांस्कृतिक इकोसिस्टम बन सकता है
बिहार में NSD कैंपस अपने आप में कितनी नौकरियां देगा, इसकी संख्या अभी सामने नहीं आई है। इसलिए इसे हजारों रोजगार देने वाली परियोजना कहना जल्दबाजी होगी।
लेकिन इसका अप्रत्यक्ष आर्थिक असर बड़ा हो सकता है। एक सक्रिय थिएटर संस्थान के आसपास गतिविधियां बढ़ने पर-
कलाकार → थिएटर ग्रुप → प्रोडक्शन → फेस्टिवल → तकनीकी सेवाएं → परिवहन → होटल → खान-पान → स्थानीय कारोबार
जैसी पूरी श्रृंखला विकसित हो सकती है। इससे बिहार में Cultural Economy को बढ़ावा मिलने की संभावना है।
फिल्म और OTT के लिए भी तैयार हो सकता है प्रतिभाओं का नया पूल
NSD फिल्म स्कूल नहीं है और इसे फिल्म प्रशिक्षण संस्थान के रूप में पेश करना सही नहीं होगा। लेकिन थिएटर में प्रशिक्षित अभिनेता, निर्देशक, डिजाइनर और दूसरे तकनीकी पेशेवर आगे चलकर फिल्म, वेब सीरीज, विज्ञापन और दूसरे प्रदर्शन कला क्षेत्रों में भी काम कर सकते हैं।
ऐसे समय में जब बिहार में फिल्म निर्माण को लेकर भी गतिविधियां बढ़ रही हैं, NSD कैंपस राज्य के लिए प्रशिक्षित प्रतिभाओं का एक नया आधार तैयार कर सकता है।
बिहार में हाल के वर्षों में फिल्म शूटिंग को लेकर भी सरकारी स्तर पर गतिविधियां बढ़ी हैं।
बिहार के बाहर जाने वाले कलाकारों की दिशा बदल सकती है
मुख्यमंत्री ने जिस बात पर सबसे ज्यादा जोर दिया है, वह यही है कि प्रतिभाशाली कलाकारों को विशेष प्रशिक्षण के लिए राज्य से बाहर जाने की जरूरत कम होगी। इसका मतलब यह नहीं कि कलाकारों का बाहर जाना बंद हो जाएगा।
बल्कि फर्क यह हो सकता है कि बिहार का युवा बाहर जाने से पहले अपने राज्य में मजबूत प्रशिक्षण और नेटवर्क हासिल कर सके। और भविष्य में दूसरे राज्यों के कलाकार भी बिहार आकर प्रशिक्षण ले सकते हैं।
तब बिहार सिर्फ कलाकार भेजने वाला राज्य नहीं रहेगा, बल्कि कलाकारों को आकर्षित करने वाला सांस्कृतिक केंद्र भी बन सकता है।
पटना से बाहर भी पहुंचा तो असली फायदा पूरे बिहार को
बिहार में NSD कैंपस जहां भी स्थापित होगा, उसका पहला फायदा स्वाभाविक रूप से आसपास के इलाके को मिलेगा। लेकिन इसका असर पूरे बिहार तक पहुंचाने के लिए outreach जरूरी होगा।
अगर आगे चलकर NSD से जुड़े workshops, theatre camps और cultural programmes बिहार के अलग-अलग हिस्सों में पहुंचते हैं तो गया, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, भागलपुर, आरा, बेगूसराय, पूर्णिया, चंपारण जैसे इलाकों के कलाकारों को भी इससे फायदा हो सकता है।
इसलिए आने वाले समय में एक बड़ा सवाल यह भी होगा कि क्या NSD का बिहार कैंपस सिर्फ एक शहर तक सीमित रहेगा या पूरे राज्य के लिए resource centre की तरह काम करेगा?
बिहार संगीत नाटक अकादमी के साथ भी बनेगा बड़ा नेटवर्क
मुख्यमंत्री ने बताया है कि बिहार सरकार ने नाट्य कलाओं के संरक्षण, संवर्धन और समन्वय के लिए बिहार संगीत नाटक अकादमी की स्थापना की है। उनके अनुसार NSD कैंपस राज्य के इन प्रयासों को और मजबूती देगा।
अगर दोनों संस्थानों के बीच प्रभावी सहयोग विकसित होता है तो बिहार में- स्थानीय कलाकार + राज्य अकादमी + NSD + राष्ट्रीय रंगमंच नेटवर्क का मजबूत ढांचा तैयार हो सकता है।
NSD कैंपस आने के बाद सबसे बड़ा सवाल क्या होगा?
मंजूरी मिल गई है, लेकिन असली काम अब शुरू होगा। बिहार के कलाकारों और युवाओं की नजर अब इन सवालों पर होगी-
कैंपस कहां बनेगा?
सरकार ने उपयुक्त जमीन उपलब्ध कराने की बात कही है, लेकिन स्थान को लेकर विस्तृत जानकारी अभी सामने आनी बाकी है।
कब तक बनेगा?
निर्माण की विस्तृत समयसीमा अभी स्पष्ट नहीं है।
कितनी सीटें होंगी?
कितने छात्रों को नियमित प्रशिक्षण मिलेगा, इसकी जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
कौन-कौन से कोर्स होंगे?
अभिनय के अलावा निर्देशन, डिजाइन, स्टेजक्राफ्ट और अन्य क्षेत्रों में क्या-क्या पाठ्यक्रम होंगे, इसका विवरण NSD की ओर से आना बाकी है।
बिहार के कलाकारों के लिए क्या विशेष व्यवस्था होगी?
क्या स्थानीय कलाकारों के लिए अलग workshops, outreach programmes या लोककलाओं पर विशेष कार्यक्रम होंगे-यह भी आगे स्पष्ट होना है।
एक मंजूरी, लेकिन असर कई स्तरों पर
बिहार में NSD कैंपस की मंजूरी को अगर सिर्फ एक नए भवन के रूप में देखा जाए तो इसकी अहमियत सीमित नजर आएगी। लेकिन अगर इसे प्रशिक्षण + शोध + लोककला + थिएटर + युवा प्रतिभा + रोजगार + सांस्कृतिक अर्थव्यवस्था के नजरिए से देखा जाए तो यह बिहार के लिए बड़ा सांस्कृतिक निवेश बन सकता है।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी इसे केवल एक संस्थान की स्थापना के बजाय बिहार की सांस्कृतिक विरासत, युवा प्रतिभाओं और आधुनिक रंगमंच के भविष्य में निवेश बताया है।
अब चुनौती यही होगी कि मंजूरी से आगे बढ़कर कैंपस का निर्माण कितनी तेजी से होता है, यहां किस स्तर का प्रशिक्षण मिलता है और बिहार की अपनी लोक एवं रंगमंच परंपराओं को NSD की राष्ट्रीय पहचान के साथ किस तरह जोड़ा जाता है।
अगर यह संतुलन सफल रहा तो आने वाले वर्षों में बिहार के कलाकारों के लिए NSD सिर्फ दिल्ली जाने का नाम नहीं रहेगा, बल्कि बिहार में ही उपलब्ध एक राष्ट्रीय मंच बन सकता है।
एक नजर में: NSD कैंपस से किसे फायदा हो सकता है?
| वर्ग | संभावित फायदा |
|---|---|
| युवा कलाकार | पेशेवर थिएटर प्रशिक्षण |
| अभिनेता | अभिनय और प्रदर्शन कला की ट्रेनिंग |
| निर्देशक | निर्देशन और थिएटर प्रोडक्शन की समझ |
| तकनीकी कलाकार | स्टेजक्राफ्ट, डिजाइन, लाइट, साउंड आदि |
| नाटककार | लेखन और मंचीय प्रस्तुति का अवसर |
| लोक कलाकार | लोकनाट्य को राष्ट्रीय मंच से जोड़ने का मौका |
| स्कूल-कॉलेज छात्र | थिएटर वर्कशॉप और रचनात्मक प्रशिक्षण |
| थिएटर ग्रुप | राष्ट्रीय नेटवर्क और सहयोग |
| शोधार्थी | लोककला और थिएटर पर शोध |
| फिल्म/OTT से जुड़े लोग | प्रशिक्षित कलाकारों का संभावित नया pool |
| स्थानीय कारोबार | सांस्कृतिक कार्यक्रमों से अप्रत्यक्ष आर्थिक गतिविधि |
FreelancerPost का निष्कर्ष
NSD की मंजूरी बिहार के लिए सिर्फ एक सांस्कृतिक खबर नहीं है। यह इस बात की शुरुआत हो सकती है कि बिहार की प्रतिभा को प्रशिक्षण, बिहार की लोककला को राष्ट्रीय मंच और बिहार के युवा कलाकारों को अपने राज्य में आगे बढ़ने का संस्थागत अवसर मिले। लेकिन इस संभावना को वास्तविक बदलाव में बदलने के लिए जमीन, निर्माण, पाठ्यक्रम, प्रवेश प्रक्रिया, outreach और स्थानीय रंगकर्मियों की भागीदारी पर सरकार और NSD को आगे तेजी से काम करना होगा।
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