7 सितंबर के WFI सर्कुलर को चुनौती, विनेश ने 14 सितंबर के चयन ट्रायल में शामिल करने की मांग की; कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 10 सितंबर को तय की
नई दिल्ली। पहलवान विनेश फोगाट की 2026 सीनियर विश्व कुश्ती चैंपियनशिप के चयन ट्रायल में हिस्सा लेने की मांग पर दिल्ली हाईकोर्ट ने भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) से उसका पक्ष बताने को कहा है। जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने बुधवार को WFI के वकील को मामले में निर्देश लेने को कहा। मामले की अगली सुनवाई 10 सितंबर 2026 को होगी।
विनेश फोगाट ने यह नई अर्जी अपनी पहले से लंबित याचिका में दाखिल की है। मूल याचिका में उन्होंने गर्भावस्था और मातृत्व अवकाश के बाद खेल में वापसी करने वाली महिला खिलाड़ियों के लिए निष्पक्ष, पारदर्शी और व्यवस्थित नीति बनाने की मांग की है।
7 सितंबर के WFI सर्कुलर को चुनौती
नई अर्जी में विनेश फोगाट ने WFI के 7 सितंबर के सर्कुलर के उस हिस्से पर रोक लगाने की मांग की है, जिसके कारण वह आगामी चयन प्रक्रिया के लिए पात्र खिलाड़ियों की सूची में शामिल नहीं हो पा रही हैं।
विनेश ने हाईकोर्ट से मांग की है कि उन्हें फिलहाल पात्र खिलाड़ियों की सूची में शामिल किया जाए और 14 सितंबर को दिल्ली के इंदिरा गांधी स्टेडियम में होने वाले महिला चयन ट्रायल में हिस्सा लेने की अनुमति दी जाए।
ये ट्रायल 2026 सीनियर विश्व कुश्ती चैंपियनशिप के लिए भारतीय टीम के चयन के लिए होने हैं। विश्व चैंपियनशिप 24 अक्टूबर से 1 नवंबर तक कजाकिस्तान के अस्ताना में आयोजित होनी है। WFI के कार्यक्रम के अनुसार महिला पहलवानों के ट्रायल 14 सितंबर को दिल्ली में होंगे।
विनेश का तर्क- मातृत्व की वजह से छूटी प्रतियोगिताओं का नुकसान क्यों?
विनेश फोगाट की नई अर्जी में कहा गया है कि मौजूदा चयन व्यवस्था में उन खिलाड़ियों के लिए कोई पर्याप्त व्यवस्था नहीं है, जो गर्भावस्था और मातृत्व अवकाश के कारण निर्धारित प्रतियोगिताओं में हिस्सा नहीं ले सकीं।
उनका तर्क है कि जिन प्रतियोगिताओं में वह मातृत्व संबंधी कारणों से हिस्सा नहीं ले सकीं, उनकी अनुपस्थिति को उनकी पात्रता के खिलाफ इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।
याचिका में यह भी कहा गया है कि विनेश ने 30 मई को एशियन गेम्स चयन ट्रायल में 53 किलोग्राम वर्ग में हिस्सा लिया था। उन्होंने क्वार्टर फाइनल मुकाबला जीता और सेमीफाइनल तक पहुंचीं। हालांकि, वह इस प्रदर्शन के आधार पर स्वतः चयन का दावा नहीं कर रही हैं, बल्कि इसे चयन ट्रायल में हिस्सा लेने की अनुमति देने के लिए अपनी प्रतिस्पर्धी वापसी के प्रमाण के तौर पर देखे जाने की मांग कर रही हैं।
WFI की चयन प्रक्रिया पर फिर उठा सवाल
विनेश की याचिका में कहा गया है कि मौजूदा चयन व्यवस्था में पात्रता कुछ निर्धारित प्रतियोगिताओं में भागीदारी और प्रदर्शन से जुड़ी हुई है। ऐसे में मातृत्व अवकाश के कारण उन प्रतियोगिताओं से बाहर रहने वाली खिलाड़ी के लिए आगे चयन प्रक्रिया में लौटने का रास्ता स्पष्ट नहीं है।
यह मामला सिर्फ विनेश फोगाट की व्यक्तिगत पात्रता तक सीमित नहीं है। उनकी मूल याचिका में महिला खिलाड़ियों के लिए ऐसी व्यवस्था बनाने की मांग की गई है, जिससे गर्भावस्था, बच्चे के जन्म और उसके बाद स्वास्थ्य लाभ के दौरान खेल से दूर रहने पर उनके करियर और चयन के अवसर प्रभावित न हों।
1 सितंबर को भी हाईकोर्ट ने मांगा था जवाब
इससे पहले 1 सितंबर 2026 को दिल्ली हाईकोर्ट ने विनेश फोगाट की उस याचिका पर WFI, केंद्र सरकार और भारतीय ओलंपिक संघ से जवाब मांगा था, जिसमें उन्होंने मातृत्व के बाद खेल में लौटने वाली महिला खिलाड़ियों के लिए निष्पक्ष और व्यवस्थित नीति बनाने की मांग की थी। इस मामले की अगली सुनवाई 18 नवंबर को निर्धारित है।
विनेश ने अपनी याचिका में कहा है कि बच्चे के जन्म के बाद जब उन्होंने कुश्ती में वापसी की तो उन्हें सामान्य चयन प्रक्रिया में ही लौटना पड़ा, जबकि गर्भावस्था और मातृत्व अवकाश के कारण वह उस अवधि में कई प्रतियोगिताओं में हिस्सा नहीं ले सकीं। उनके मुताबिक ऐसी स्थिति में महिला खिलाड़ियों के लिए विशेष और स्पष्ट व्यवस्था होनी चाहिए।
मई में भी हाईकोर्ट ने विनेश को ट्रायल में उतरने की अनुमति दी थी
विनेश फोगाट के चयन विवाद का यह पहला मामला नहीं है। मई 2026 में दिल्ली हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने उन्हें एशियन गेम्स 2026 के चयन ट्रायल में हिस्सा लेने की अनुमति दी थी।
22 मई के आदेश में अदालत ने कहा था कि उस समय उपलब्ध परिस्थितियों में मातृत्व के कारण विनेश को चयन प्रक्रिया से बाहर नहीं किया जाना चाहिए और उन्हें ट्रायल में भाग लेने की अनुमति दी गई। अदालत ने ट्रायल की वीडियो रिकॉर्डिंग तथा स्वतंत्र पर्यवेक्षकों की मौजूदगी के भी निर्देश दिए थे।
अब WFI के जवाब पर टिकी नजर
अब नई अर्जी में विनेश ने 14 सितंबर के विश्व चैंपियनशिप चयन ट्रायल में शामिल होने की अनुमति मांगी है। हाईकोर्ट ने WFI से इस पर निर्देश लेने को कहा है। 10 सितंबर की सुनवाई में WFI का रुख इस मामले में महत्वपूर्ण होगा।
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